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'मैं और पति दोनों गोरे, फिर बच्चा काला कैसे?' बिहार का ये मजाकिया 'सोहर' गीत बुआ-फूफा पर कसता है मजेदार तंज

Published: Sat, 07 Nov 2026 05:39 PM (IST)

बिहार में बच्चे के जन्म पर सोहर गाया जाता है। ये गीत बच्चे के जन्म की खुशी को जाहिर करने के लिए गाया जाता है।

बिहार का मजेदार सोहर गीत (AI Generated Image)

बिहार का मजेदार सोहर गीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार में हर मौके के लिए खास लोकगीत गाए जाते हैं। ऐसे ही बच्चे के जन्म पर सोहर गाया जाता है। घर में बच्चे के जन्म की खुशी मनाने और नवजात को आशीर्वाद देने के लिए सोहर गीत गाए जाते हैं। 

सोहर गीतों में ही एक गीत है ननदी के पड़ी परछईया, ललन मोरा काला निकल गयो जी…। ये सोहर काफी मजेदार है और परिवार के रिश्तों की हल्की-फुल्की नोंक-झोंक को बहुत ही खूबसूरत और दिलचस्प अंदाज में बयां करता है। आइए जानें इस सोहर गीत के बारे में। 

क्या है इस सोहर गीत का मतलब?

इस गीत के बोल हैं-  

ननदी के पड़ी परछईया, ललन मोरा काला निकल गयो जी

मैं गोरी, मेरा बालम भी गोरा, करिया कलूठा ननदोईया

ललन मोरा काला निकल गयो जी

इसमें नवजात की मां और उसके ससुरालवालों के बीच हंसी-मजाक के रिश्ते को दिखाया गया है। गीत में बच्चे की मां कहती है कि मेरा बेटा काला इसलिए हो गया है, क्योंकि वो अपनी बुआ पर गया है। वो खुद गोरी है और उसका पति भी गोरा है, लेकिन उससे ननद-ननदोई काले हैं, जिनपर उसका बेटा चला गया है और वो काला हो गया। 

इस गीत में आगे कहा जाता है-

नानी भी गोरी, नाना भी गोरा

सासू के पड़ी परछईया ललन मोरा काला निकल गयो जी

भाभी भी गोरी, मेरा भैया भी गोरा

देवर के पड़ी परछईया ललन मोरा काला निकल गयो जी

इसी तरह ससुरालवालों का मजाक उड़ाते हुए ये गीत गाया जाता है। इस गीत में बच्चे की मां शिशु के ननिहाल यानी अपने मायके के लोगों को गोरा और अपने ससुरालवालों को काला कहती है। अपने बच्चे के सांवले रंग के लिए, वो मजाकिया अंदाज में अपने सुसरालवालों को दोष देती है। 

बहुत खास होते हैं सोहर गीत

सोहर गीतों में नवजात को आशीर्वाद दिया जाता है और परिवार को बधाई दी जाती है। इन गीतों में हंसी-मजाक की भी झलक देखने को मिलती है। सोहर में अक्सर बच्चे की बुआ-फूफा या दाद-दादी को मजाकिया अंदाज में चिढ़ाया जाता है।

ये लोकगीत खुशी को और दोगुना कर देते हैं। महिलाएं ढोलक की थाप पर पीढ़ियों से गाए जाने वाले सोहर गाती हैं और बच्चे के जन्म की खुशी मनाती हैं। बिहार में इन गीतों का बहुत खास महत्व है। इन गीतों को आमतौर पर सिर्फ महिलाएं गाती हैं। आस-पास की महिलाएं नवजात शिशु के घर आती हैं और साथ मिलकर सोहर गाती हैं। 

 

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