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भोजपुरी गानों वाला डांस नहीं, ये है बिहार का असली लोक नृत्य; मजेदार है बच्चे के जन्म पर होने वाला ‘सोहर-खिलौना’

Published: Wed, 28 Oct 2026 04:53 PM (IST)

बिहार में कई खास लोक नृत्य किए जाते हैं, जिनमें सोहर-खिलौना भी शामिल है। ये लोक नृत्य बच्चे के जन्म की खुशी से जुड़ा है।

बच्चे के जन्म की खुशी पर किया जाता है बिहार का ये लोक नृत्य (AI Generated Image)

बच्चे के जन्म की खुशी पर किया जाता है बिहार का ये लोक नृत्य (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार का डांस सिर्फ फिल्मी बॉलीवुड गानों में दिखाया जाने वाला डांस नहीं है। यहां हर मौके के लिए आपको खास लोक नृत्य देखने को मिल जाएंगे। इन्हीं में एक लोक नृत्य है सोहर खिलौना, जो बच्चे के जन्म पर किया जाता है। 

सोहर-खिलौना नृत्य सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं किया जाता। इस लोक नृत्य के पीछे और भी कई कारण हैं, जो इसे खास बनाते हैं। आइए जानें सोहर-खिलौना नृत्य का इतिहास क्या है और ये नृत्य क्यों किया जाता है। 

क्या है सोहर-खिलौना का इतिहास?

सोहर बच्चों के जन्म पर गाए जाने वाले गीतों को कहा जाता है और ये नृत्य उसी से जुड़ा है। बिहार में बच्चे के जन्म पर गांव की महिलाएं साथ मिलकर सोहर गाती है, नृत्य करती हैं और बच्चे को आशीर्वाद देती हैं। सोहर गाने की ये परंपरा काफी पुरानी है और कई सालों से चली आ रही है, जिसे आज भी बिहार में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। 

इन लोकगीतों में श्री राम जन्म और श्री कृष्ण जन्म पर अवध और नंद गांव में फैली खुशी को बयां किया जाता है। सोहर में शिशु के माता-पिता, मौसी-मौसा और फुआ-फूफा से जुड़े गीत भी गाए जाते हैं। ये लोकगीत सुनकर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आगे बढ़ते आए हैं। 

सोहर-खिलौना क्यों किया जाता है? 

परिवार में बच्चे के जन्म की खुशी में बच्चे के उज्ज्वल भविष्य और लंबी आयु की कामना करने के लिए गीत गाए जाते हैं। बिहार में बच्चे का जन्म सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं होती, बल्कि इसमें पूरा मोहल्ला शामिल होता है। महिलाएं ढोलक की थाप पर सोहर गाती हैं और नृत्य करती हैं। इनके जरिए बच्चे के लिए मंगलकामना की जाती है और आशीर्वाद दिया जाता है। 

क्या है इस नृत्य की खासियत?

सोहर-खिलौना नृत्य के दौरान महिलाएं जोड़े में या गोल घेरे में पारंपरिक परिधान में नृत्य करती हैं। सोहर गीतों और ढोलक, मंजीरा की थाप पर इस नृत्य को किया जाता है, जो पूरे माहौल को मजेदार बना देता है। इस डांस के गीतों की खासियत है कि इसमें नवजात बच्चे को भगवान राम और श्री कृष्ण की तरह माना जाता है। इसके अलावा, नृत्य में बच्चे के मौसा-मौसी और बुआ-फूफा के साथ भी हंसी-मजाक किया जाता है।