एक मूर्ख इंसान कैसे बना संस्कृत का सबसे महान विद्वान? पत्नी के अपमान और मां काली से जुड़ी है ‘कालिदास’ की कहानी
कालिदास, जो पहले एक अनपढ़ मूर्ख थे, अपनी पत्नी विद्योत्तमा के अपमान के बाद मां काली की तपस्या कर महान संस्कृत कवि बने।

कालिदास कैसे बनें संस्कृति के महान विद्वान? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के शेक्सपियर कहलाने वाले कालीदास का नाम आपने जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं इनके महान कवि बनने की कहानी क्या है? ये कहानी एक ऐसे मूर्ख व्यक्ति की है, जिसे जरा भी ज्ञान नहीं था, लेकिन आज संस्कृत के महान विद्वानों में उसका नाम लिया जाता है। आइए जानें कैसे कालीदास बने संस्कृत साहित्य के महान कवि।
छल से हुआ राजकुमारी से विवाह
लोककथाओं के अनुसार शुरुआत में कालिदास बिल्कुल अनपढ़ और अज्ञानी थे। वे इतने मूर्ख थे कि जिस डाली पर बैठे थे, उसी को कुल्हाड़ी से काट रहे थे। वहीं, दूसरी ओर विद्योत्तमा नाम की एक बेहद खूबसूरत और विद्वान राजकुमारी थीं। उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि जो भी उन्हें शास्त्रार्थ में हरा देगा, वो उससे विवाह कर लेंगी।
अपने ज्ञान के अहंकार में राजकुमारी ने कुछ विद्वानों का अपमान के दिया। जंगल से गुजरते समय उन्हें कालिदास मिले, जो जिस डाली पर बैठे थे, उसे ही काट रहे थे। विद्योत्तमा के अभिमान को तोड़ने के लिए उन विद्वानों ने साजिश रची और कालिदास को मौनी गुरू बनाकर राजकुमारी के पास ले गए।
शास्त्रार्थ के दौरान राजकुमारी ने मौन संकेतों से जरिए कालिदास से बहुत मुश्किल सवाल पूछे, लेकिन कालिदास ने अपनी मूर्खता में उन संकेतों का कुछ और ही मतलब निकाला और विद्योत्तमा की हार हुई। हारने के बाद राजकुमारी विद्योत्तमा की कालिदास से शादी हुई, लेकिन शादी की पहली रात ही कालिदास की सच्चाई सामने आ गई। विद्योत्तमा को पता चल गया कि ये कोई विद्वान साधु नहीं, बल्कि एक मूर्ख है। गुस्से में उसने कालिदास को महल से बाहर निकाल दिया, लेकिन ये अपमान कालिदास के दिल में घर कर गया।
अपमान के दुख में कालिदास ने मां काली की शरण ली और बहुत कठिन तपस्या में लीन हो गए। कालिदास की तपस्या से प्रसन्न होकर मां काली ने उन्हें ज्ञान का वरदान दिया और मां काली के दास होने के कारण उनका नाम कालिदास पड़ा।
संस्कृति साहित्य की रचना
मां काली का आशीर्वाद और ज्ञान हासिल करने के बाद कालिदास घर वापस लौटे और उन्होंने दरवाजा खटखटाया, तो विद्योत्मा ने पूछा- कश्चिद् वाग्विशेषः? अपनी पत्नी के एक वाक्य से कालिदास ने कीन महाकाव्यों की रचना कर दी।
विरह और प्रेम की कहानी मेघदूत
कालिदास की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में मेघदूत का नाम सबसे पहले आता है। ये एक महाकाव्य है, जिसमें अलकापुरी से निकाले गए एक यक्ष की कहानी है। रामगिरी पर्वत पर निर्वासित यक्ष अपनी प्रेमिका के विरह में व्याकुल होकर आषाढ़ के महीने के उमड़ते बादलों को अपना दूत बनाता है और मेघ से कहता है कि हिमालय पर बसे अलकापुरी में रह रही उसकी पत्नी तक उसका संदेश पहुंचा दिया जाए। इस पूरी कविता में इस कहानी को बहुत ही खूबसूरत तरीके से पेश किया गया है।
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