बिहार और यूपी में मशहूर है 'लोरिकायन' गीत, प्रेम और बगावत की कहता है कहानी; रोंगटे खड़े कर देगी ये लोकगाथा
बिहार और उत्तर प्रदेश में लोरिकायन गीत काफी मशहूर हैं। इनमें वीरता और प्रेम का मेल देखने को मिलता है।

बिहार में मशहूर है लोरिकायन गीत (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर क्षेत्र की अपनी लोक कथाएं होती हैं, जो वहां की संस्कृति का हिस्सा होती हैं। ऐसे ही बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में लोरिक की कहानी मशहूर है, जिससे लोरिकायन गीत बने हैं। इसे लोरिंकी और चंदैनी के नाम से भी जाना जाता है।
लोरिकायन गीत अहीर या यादव वीर लोरिक की कहानी से जुड़े हैं, जिसमें इनकी प्रेम कहानी और वीरता के किस्से छिपे हैं। लोरिकायन इतने बेहतरीन ढंग से सुनाया जाता है कि इसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। आइए जानें क्या है लोरिकायन की कहानी।
मंजीरी से विवाह और सोनभद्र का युद्ध
ये लोकगाथा अहीर वीर लोरिक की है, जो अपनी शारीरिक शक्ति, मां दुर्गा की भक्ति और तलवारबाजी के लिए जाने जाते हैं। कहानी की शुरुआत सोनभद्र के अत्याचारी राजा मोलागत और मेहरा नाम के ग्वाले के द्वंद से होती है। राजा छल से जुए में मेहरा की संपत्ति और उसकी अजन्मी संतान को जीत लेता है। मेहरा के घर एक पुत्री का जन्म हुआ, जिसका नाम मंजरी रखा गया। मंजरी बेहद खूबसूरत थी, जिस पर राजा मोलागत मोहित हो गया और जबरदस्ती मंजरी से विवाह करने की कोशिश करने लगा।
मंजरी ने अपनी रक्षा के लिए वीर लोरिक को संदेश भेजा। लोरिक मंजरी की रक्षा के लिए आते हैं और सोन नदी के किनारे भीषण युद्ध होता है। इस युद्ध में लोरिक अकेले राजा और उसकी विशाल सेना को हरा देते हैं। इसके बाद लोरिक और मंजरी का विवाह हो जाता है।
इसी कहानी में वीर लोरिक पत्थर का भी जिक्र मिलता है। विदाई के समय मंजरी के कहने पर लोरिक ने अपनी तलवार से एक बड़े पत्थर के दो टुकड़े कर दिए थे, जो आज भी उस जगह पर मौजूद है। ये पत्थर लोरिक की वीरता और मंजरी के साथ उसके प्रेम की कहानी कहता है।
चंदा और लोरिक की कहानी
लोरिक की एक कहानी चंदा नाम की राजकुमारी से जुड़ा है। चंदा आरंग की राजकुमारी थी, जो बेहद रूपवती हुआ करती थी। एक बार लोरिक ने चंदा की रक्षा की और चंदा उसकी वीरता देखकर मुग्ध हो गई। लोरिक भी चंदा की खूबसूरती देखकर मंत्रमुग्ध हो गए, लेकिन चंदा का विवाह पहले ही हो चुका था।
चंदा पहले से विवाहित थी और दोनों की सामाजिक स्थिति भी काफी अलग थी। लोरिक अहीर समाज के थे और चंदा एक राजकुमारी थी। इसलिए समाज में उनके विवाह को लेकर कई रुकावटें आ रही थीं, लेकिन चंदा के प्रेम के लिए लोरिक सामाजिक बंधनों, शत्रुओं और चंदा के पूर्व पति से डटकर लड़ते हैं और सभी चुनौतियों को हराकर हल्दी-हरदी राज्य में जाकर रहने लगते हैं।
लोरिकायन का महत्व
लोरिकायन में वीरता और प्रेम दोनों का मेल देखने को मिलता है। इसलिए ये लोकगाथा वीर रस और शृंगार रस से भरी होती है। इस लोकगाथा को गीतों के जरिए सुनाया जाता है, जिसे ढोलक और टिमकी की धुन पर गाया जाता है। ये लोक गायन शैली बेहद रोमांचक होती है। इसमें गायन अभिनय और हुंकार के साथ गाते हैं, जिसे सुनकर ऐसा लगता है, जैसे आप सचमुच लोरिकायन की कहानी का हिस्सा हैं।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।