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बोटॉक्स और फिलर्स छीन रहे एक्सप्रेशन! परफेक्ट दिखने के लिए चेहरा क्यों 'फ्रीज' करवा रहे सितारे?

Published: Sun, 07 Jun 2026 09:30 AM (IST)

हॉलीवुड और बॉलीवुड में बोटॉक्स और डर्मल फिलर्स का बढ़ता इस्तेमाल कलाकारों के नेचुरल एक्सप्रेशन छीन रहा है, जिससे एक्टिंग प्रभावित हो रही है।

हॉलीवुड में बढ़ रहा बोटॉक्स और फिलर्स का क्रेज (AI Generated Image)

हॉलीवुड में बढ़ रहा बोटॉक्स और फिलर्स का क्रेज (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल हॉलीवुड में खूबसूरत और हमेशा जवां दिखने की एक अजीब-सी होड़ मची है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुंदर दिखने की यह चाहत अब फिल्मों और एक्टिंग को बर्बाद कर रही है? 

जी हां, परफेक्ट दिखने के लिए बोटॉक्स और डर्मल फिलर का इस्तेमाल इतनी तेजी से बढ़ा है कि अब कलाकारों के चेहरों से असली हाव-भाव ही गायब होते जा रहे हैं। डायरेक्टर्स से लेकर खुद कलाकार तक अब इस समस्या से परेशान हैं।

डायरेक्टर्स भी हैं परेशान

इस कॉस्मेटिक बदलाव का असर अब फिल्मों और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर साफ दिखने लगा है। हॉलीवुड के कई डायरेक्टर्स की शिकायत है फिलर्स और बोटॉक्स के कारण स्क्रीन पर कई कलाकार जरूरी इमोशन्स और एक्सप्रेशन ही नहीं दिखा पा रहे हैं।

आजकल कई सेलिब्रिटीज महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की जगह फूले हुए होंठ, खिंची हुई त्वचा और बिल्कुल स्थिर माथे को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। नतीजा यह है कि स्क्रीन पर उनके चेहरे बंधे हुए और अस्वाभाविक नजर आते हैं। 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चेहरे का न हिलना अब एक स्टैंडर्ड बनता जा रहा है, जो बेहतरीन एक्टिंग के लिए एक बड़ा खतरा है। असल में सबसे शानदार परफॉर्मेंस तब निकलकर आती है जब कलाकार परफेक्ट दिखने की चिंता छोड़कर खुलकर एक्सप्रेशन और इमोशन्स देते हैं।

पुरुष कलाकार भी निशाने पर

अक्सर माना जाता है कि सुंदर दिखने का दबाव सिर्फ महिलाओं पर होता है, लेकिन अब हॉलीवुड के पुरुष कलाकार भी इस जाल में फंस चुके हैं। एक जाने-माने अभिनेता पर जब सोशल मीडिया पर फिलर करवाने के आरोप लगे और भद्दे कमेंट्स किए गए, तो उन्होंने पब्लिक लाइफ से दूरी बनाना शुरू कर दिया।

सोशल मीडिया ट्रोलिंग से मानसिक सेहत पर असर

चेहरे पर किए जाने वाले इन कॉस्मेटिक बदलावों और उसके बाद होने वाली सोशल मीडिया ट्रोलिंग का असर कलाकारों की मानसिक सेहत पर बहुत बुरा पड़ रहा है। युवा कलाकार इससे डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। जैसे- एक 22 साल की ब्रिटिश अभिनेत्री को एक प्रेस टूर के दौरान अपने फ्रीज एक्सप्रेशंस के कारण लोगों की ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।

किरदार की सच्चाई के लिए कॉस्मेटिक से दूरी

इस बढ़ते चलन के बीच कुछ अभिनेत्रियां ऐसी भी हैं जो अपने किरदार को पर्दे पर सच्चा बनाए रखने के लिए इन ट्रीटमेंट्स से दूरी बना रही हैं। एक अभिनेत्री ने 1980 के दशक के बैकग्राउंड वाली फिल्म की शूटिंग के दौरान बोटॉक्स लेना पूरी तरह बंद कर दिया। वहीं एक दूसरी टॉप अभिनेत्री ने साफ किया कि वह बोटॉक्स तो लेती हैं, लेकिन अपने माथे पर फिलर कभी नहीं करवाएंगी, क्योंकि वह कैमरे पर साफ और अलग दिखाई देता है।

भारत में भी तेजी से पैर पसार रहा है यह ट्रेंड

यह कहानी सिर्फ विदेशों तक सीमित नहीं है, भारत में भी बोटॉक्स और डर्मल फिलर का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। साल 2024 के एक सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 76,720 बोटॉक्स और 97,160 फिलर की एस्थेटिक प्रोसेस दर्ज की गईं। यह आंकड़े बताते हैं कि अपने लुक को बेहतर बनाने और सुंदरता को निखारने का यह इलाज अब भारतीय मनोरंजन जगत और आम लोगों में भी अपनी जगह बना चुका है।