फार्महाउस की चमक और कसीनो की महफिलों से परे, जब दिल मिले तो घर के खाने और दोस्तों से रोशन होती है दीवाली
त्योहार का असली आनंद महंगे आयोजनों में नहीं, बल्कि अपनों के साथ साझा किए गए पलों और समावेशी भावना में निहित है।

त्योहार का असली आनंद घर के खाने और दोस्तों से है (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मिशेलिन स्टार शेफ सुबीर सरन, लखनऊ। दीवाली की पार्टियां अब फार्महाउस और पेंटहाउस को बनारसी घाट, सूफी महफिल या किसी वीआइपी लाउंज में बदल देती हैं। थ्री-डी निमंत्रण, चांदी के दस्तकारी वाले तोहफे, लाइव सुशी काउंटर और सोने की वर्क़ वाली मिठाइयां-त्योहार का यह नया रूप किसी को चकित करता है, किसी को लुभाता है। ताश की पुरानी बाज़ी कहीं ऊंचे दांव वाले पोकर और कसीनो की मेजों तक पहुंच गई है। दीवाली का उत्सव बड़ा हुआ है; सवाल यह है कि क्या उसका अर्थ भी उतना ही बड़ा हुआ है?
मैं आलीशान सजावट या अच्छे खाने के खिलाफ नहीं हूं। दीवाली पर घर सजाइए, नए कपड़े पहनिए, दोस्तों को बुलाइए। सुशी हो या शक्करपारे, नए कपड़े हों या दीये-इन सबमें उत्सव का अपना आनंद है, लेकिन त्योहार की रौनक केवल उस चीज से नहीं बनती जिसे कैमरे में कैद किया जा सके। कभी-कभी उसकी सबसे ख़ूबसूरत तस्वीर वह होती है जिसमें कोई कैमरा नहीं, बस लोग एक-दूसरे के पास बैठे हों।
साल भर पहले मैं दीवाली पर मुंबई में था। घर में मेरे साथ मेरे हाउसकीपर और शानदार रसोइए सत्य थे। हमारे परिवार अपने-अपने शहरों में थे; हम कुछ अकेले, थोड़े आवारा-से लोग संयोग से एक ही शहर में रह गए थे। हमारे दोस्त अब्दुल्लाह आए, आदित्य आए और उत्तर प्रदेश से हमारे एक क्रिकेटर मित्र भी। हमने घर का खाना बनाया-सब्ज़ियों की बिरयानी, दाल, सूखी सब्जी, कचूमर, बूंदी का रायता, चपाती और पराठे। कोई सजावट का नक्शा नहीं था। घर था, खाना था और अपने लोग थे।
फिर अब्दुल्लाह ने कहा, 'दीवाली की पूजा मैं करूंगा।' मैंने पूछा, 'तुम्हें पूजा कैसे पता?' उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में बड़े होते हुए वे अपने परिवेश में अकेले मुसलमान थे; आसपास के हिंदू और जैन परिवारों के बीच उन्होंने दीवाली देखी, सीखी और अपनाई थी।
वे एक तौलिया मांगकर नहाए, पूजा के लिए साफ़-सुथरे हुए और फिर तैयारी की जिम्मेदारी संभाल ली। लक्ष्मी जी की तस्वीर पर पान का पत्ता, मौली, सिक्का, टीका और सुपारी आटे से लगाई जाती है। उन्होंने खाने की हर चीज से थोड़ा-थोड़ा एक कटोरी में रखा, पूजा की थाली में चढ़ाया और पूजा के बाद उसे वापस बड़े बर्तनों में मिला दिया, ताकि हम सब वह खाना खा सकें जिस पर आशीर्वाद था। सत्य और मैं तो आरती गाकर खाना परोसने के लिए तैयार थे; अब्दुल्लाह ने हमें वह रस्म भी ठीक तरह से करवाई, जो मैंने अपने पिता को दिल्ली में करते देखा था। हम दोनों उनके इस आग्रह पर मुस्कराते रहे। कभी-कभी अपना त्योहार हमें किसी दूसरे के हाथ से और साफ दिखाई देता है।
न्यू यार्क में मेरे दोस्त ईसाई, हिंदू, जैन, सिख, मुसलमान और यहूदी थे। दीवाली के दिन वे सब घर आते, काम में हाथ बंटाते, आरती में शामिल होते और खाने की मेज पर बैठते। किसी से अपना विश्वास छोड़ने को नहीं कहा जाता था। किसी को अपना विश्वास साबित भी नहीं करना पड़ता था। दरवाज़े खुले होते थे, और बस यही काफ़ी था।
मेरी दीवाली की यादों में पकवानों की भी अपनी रोशनी है। दादी और मां गुजिया, मठरी, शक्करपारे और नमकपारे बनातीं। ये डिब्बे पड़ोस और रिश्तेदारों के घर जाते; वहां से मिठाइयां और घर के बने पकवान लौटते।
आज भी मामा, विनोद और खग्गी खोए, किशमिश, बादाम, चिरौंजी, चीनी और इलायची से गुजिया बनाते हैं। उन्हें खाते हुए मुझे दादी और पंडितजी याद आते हैं। वे नहीं हैं, मगर उनके हाथों की याद उस गुजिया में बची है। मां आंगन और छत पर रंगोली सजाती हैं; झिलमिलाते दीये घर को अलग ही उजाला देते हैं।
पूजा और खाने के बाद ताश की महफिल जमती थी। मेरे पिता नहीं खेलते थे। उन्हें डर था कि जीतने लगे तो शायद रुकना मुश्किल हो; इसलिए बाकी लोग तीन पत्ती खेलते और वे हमें देखते। बुआ और फूफाजी पूजा और खाने के लिए हमारे घर आते; रिश्तेदार और माता-पिता के क़रीबी मित्र भी जुड़ते। उन शामों की हंसी अब यादों में है। कुछ प्रिय चेहरे इस साल हमसे बिछुड़ गए, मगर त्योहार उन्हें भी अपने भीतर जगह देता है।
भारत हो, अमेरिका हो या सिंगापुर-दीवाली जहां भी मनाई जाए, वह हमें अपनेपन की तरफ बुलाती है। दीयों का उजाला तभी पूरा लगता है जब किसी और के लिए भी जगह हो। भव्य पार्टी भी यादगार हो सकती है, अगर उसके बीच मनुष्य ओझल न हो जाए। घर को घर उसका खर्च नहीं बनाता। उसे घर बनाते हैं वे लोग; जो आते हैं, बैठते हैं, खाना बांटते हैं और जाते हुए अपने पीछे थोड़ी और रोशनी छोड़ जाते हैं!
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।