हर वक्त आंखों में रहती है ड्राईनेस? कहीं शरीर आपको किसी बीमारी का संकेत तो नहीं दे रहा
इस 'वर्ल्ड साइट डे 2026' पर, आइए उस छिपे हुए कारण से पर्दा उठाएं जो चुपचाप आपकी आंखों की नमी ...और पढ़ें

क्या दिनभर स्क्रीन देखने के बाद आंखें भारी हो जाती हैं? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह उठते ही फोन चलाना और रात को स्क्रॉल करते-करते सो जाना, हम में से कई लोगों की आदत बन चुकी है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के इस दौर में हम दुनिया से तो जुड़ गए हैं, लेकिन स्क्रीन हमारी जिंदगी पर पूरी तरह हावी हो गई है।
काम हो या मनोरंजन, हमारी आंखें बिना ब्रेक के 'ओवरटाइम' कर रही हैं। इसी वजह से दुनिया भर में लोग सबसे ज्यादा एक ही शिकायत कर रहे हैं- स्क्रीन देखने के बाद आंखों में रूखापन। दरअसल, आंखों की यह ड्राईनेस असल में हमारे शरीर का एक खास संकेत है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है।
आंखों की नमी छिन जाने के मुख्य कारण
पलकें झपकाना भूल जाना
एक सामान्य इंसान एक मिनट में 15 से 20 बार अपनी पलकें झपकाता है। हालांकि, जब हम किसी डिजिटल स्क्रीन को घूरते हैं, तो यह गिनती बहुत कम हो जाती है। हमारी पलकें किसी गाड़ी के 'वाइपर' की तरह काम करती हैं, जो आंखों की सतह पर आंसुओं की एक नमी वाली सुरक्षा परत बिछाती हैं। जब हम पलकें कम झपकाते हैं, तो यह नमी हवा में जल्दी वाष्पित हो जाती है।
डिजिटल स्क्रीन की थकान
घंटों तक स्क्रीन देखना, स्क्रीन से आंखों की गलत दूरी और कमरे में नमी की कमी की वजह से हमारी आंखों की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। लगातार एक ही दूरी पर फोकस करने से सिरदर्द, धुंधलापन और भारी थकान होने लगती है, जिसे 'डिजिटल आई स्ट्रेन' या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहते हैं।
सेहत से जुड़े कुछ छिपे हुए राज
कई बार आंखों का सूखना सिर्फ स्क्रीन की वजह से नहीं होता, बल्कि यह अंदरूनी बीमारियों का भी इशारा हो सकता है:
- ब्लॉक होती ग्रंथियां: हमारी पलकों में तेल की कुछ ग्रंथियां होती हैं, जो आंसुओं को जल्दी सूखने से रोकती हैं। पलकें ठीक से न झपकाने या आंखों की साफ-सफाई न रखने से ये ग्रंथियां बंद हो जाती हैं और आंसू कम बनने लगते हैं।
- अन्य बीमारियां: यह थायरॉइड, हार्मोनल गड़बड़ी, स्जोग्रेन सिंड्रोम या रुमेटॉइड अर्थराइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों का भी शुरुआती लक्षण हो सकता है। कभी-कभी यह कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट भी होता है।
- पोषण की कमी: शरीर में विटामिन डी और जरूरी फैटी एसिड की कमी से भी आंखों में सूखापन आता है।
आंखों को सुरक्षित रखने के असरदार उपाय
- 20-20-20 का नियम: हर 20 मिनट के काम के बाद, 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर रखी किसी भी चीज को देखें। इससे आंखों की फोकस करने वाली मांसपेशियों को आराम मिलता है और पलक झपकाने की प्राकृतिक प्रक्रिया दोबारा सही हो जाती है।
- स्क्रीन की सही पोजीशन: अपनी स्क्रीन को आंखों के स्तर से 15-20 डिग्री नीचे रखें। आपके और स्क्रीन के बीच कम से कम एक हाथ की दूरी होनी चाहिए। सीधे बैठकर काम करें और स्क्रीन की चमक व कंट्रास्ट को सही सेट करें।
- आसपास का माहौल सुधारें: सीधे एसी की ठंडी हवा के सामने बैठने से बचें। कमरे में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें। अपनी दिनचर्या में व्यायाम शामिल करें और थोड़ी देर धूप सेंकें। रात को सोने से एक घंटे पहले सारे गैजेट्स बंद कर दें।
- सही खानपान और हाइड्रेशन: अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और ओमेगा-3 शामिल करें। दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर खुद को हाइड्रेटेड रखें।
- रोजमर्रा की देखभाल: रात को सोने से पहले अपनी बंद आंखों पर 10 मिनट तक गर्म सिकाई करें। आंखों के एकदम अंदरूनी हिस्से पर मेकअप न लगाएं और सोने से पहले चेहरा अच्छे से साफ करें। कॉन्टैक्ट लेंस का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें और बाहर जाते समय यूवी किरणों से बचाने वाले चश्मे पहनें।
- डॉक्टर से चेकअप: अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से कोई भी 'आई ड्रॉप' खरीदकर न डालें। हर इंसान की आंखों की जरूरत अलग होती है। आंखों के सूखेपन के लिए कस्टमाइज्ड इलाज की जरूरत होती है, इसलिए हमेशा डॉक्टर को फैसला लेने दें।
आंखें सिर्फ इस खूबसूरत दुनिया को देखने का साधन नहीं हैं, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर की सेहत का आईना भी हैं। इनकी सही देखभाल करें और उन्हें वह मेडिकल केयर दें जिसकी उन्हें जरूरत है।
(डॉ. अदिति घोष दस्तीदार, मैक्स मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल (पंचशील पार्क) में ऑप्थल्मोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट हैं)
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