World No-Tobacco Day 2023: कोविड संक्रमण के बाद बचें धूमपान की बीमारियों से
World No Tobacco Day 2023 अनेक असाध्य बीमारियों और हर साल होने वाली लाखों मौतों को तंबाकू निषेध के जरिये रोका जा सकता है। समुचित प्रयासों से स्वास्थ्य को बेहतर और जीवन को गुणवत्ता पूर्ण बना सकते हैं।
नई दिल्ली। World No-Tobacco Day 2023: तंबाकू का सेवन चाहे धूमपान के रूप में हो या चबाने के रूप में, इसका पूरे शरीर पर असर पड़ता है। इससे फेफड़े की बीमारी का जोखिम सबसे अधिक रहता है। कोविड संक्रमण के दौरान लोगों के फेफड़े पर काफी असर पड़ा है। साथ ही, किडनी, मस्तिष्क समेत कई अन्य अंग भी इससे प्रभावित हुए हैं। हालांकि, कोविड के संक्रमण से उबरने के बाद भी लंबी अवधि में किस तरह के इसके प्रभाव रह जाते हैं, इसके बारे में अभी स्पष्ट अध्ययन सामने नहीं आया है। लेकिन जब हम एक्सरे, सीटी स्कैन देखते हैं तो उसमें बदलाव स्पष्ट रूप से नजर आते हैं यानी यह कोविड संक्रमण के कारण ही है। ऐसे में अगर कोई धूमपान और तंबाकू का सेवन कर रहा है, तो वह बीमारियों को बुलावा दे रहा है।
कमजोर प्रतिरक्षा में बरतें अधिक सतर्कता
कोविड संक्रमण के बाद से लोगों की इम्युनिटी और ऊर्जा का स्तर निश्चित रूप से कम हो गया है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता खासकर लंबी अवधि में कम हो गयी है। कोविड के बाद कैंसर का खतरा बढ़ जाएगा, इसे लेकर कोई अध्ययन सामने नहीं आया है, लेकिन तार्किक रूप से देखें, तो एक जो पहले से डैमेज फेफड़ा है, उसमें निश्चित ही खतरा ज्यादा होगा। कमजोर फेफड़े को बचाने को लेकर पहले से अधिक सतर्क होने की जरूरत है। धूमपान का असर हृदय, फेफड़े पर होता ही है, साथ ही इससे रक्तचाप, कोलेस्ट्राल डिसआर्डर, पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज का भी जोखिम बढ़ जाता है।
निकोटिन से नहीं होता कैंसर
तंबाकू में दो तरह के तत्व होते हैं, एक निकोटिन, दूसरा अन्य तरह के कैंसरकारक तत्व। निकोटिन से कैंसर नहीं होता, उससे एडिक्शन यानी आदत बन जाती है। तंबाकू के अन्य रसायन कैंसरकारक होते हैं। अगर किसी रूप में निकोटिन दी जा सकती है, चाहे च्युंगम या पैच के रूप में। इससे थोड़ा नशा जरूर होगा, पर धूमपान के बाकी जो दुष्प्रभाव हैं, वे नहीं होंगे। कई रिहैबिलिटेशन सेंटर हैं, जहां तंबाकू छुड़ाने के तरीके बताए जाते हैं। यह काफी सफल भी रहता है।
धूमपान के दुष्प्रभाव
- नियमित और अनियंत्रित धूमपान से नसें सिकुड़ती है और काफी दर्द होता है। इसे बर्जर्स डिजीज कहते हैं।
- गर्भस्थ शिशुओं को खांसी, सीने में बार-बार संक्रमण होने का जोखिम रहता है।
- स्मोकिंग से प्रजनन क्षमता में कमी आती है।
बचाव के उपाय
- दिल से अधिक दिमाग की सुनें।
- कुछ लोग कैंसर होने के बाद भी धूमपान करते हैं। ऐसे लोगों के दोबारा बीमार होने का जोखिम बढ़ जाता है। धूमपान से बचने के लिए काउंसिलिंग सेशन, टोबैको सेशन क्लीनिक मदद ली जा सकती है।
- कुछ मेडिसिन जैसे निकोटिन पैचेज आदि भी मददगार हो सकते हैं।
-डॉ. एके दीवान, डायरेक्टर, सर्जिकल आन्कोलाजी, राजीव गांधी कैंसर अस्पताल, नई दिल्ली
प्रस्तुति : ब्रह्मानंद मिश्र
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