Women's Day 2025: सेहत की वो अनकही तकलीफें, जिन पर खुलकर बात करना जरूरी; खूबसूरत हो जाएगी हर महिला की जिंदगी
आज यानी कि 8 मार्च को दुनियाभर में International Womens Day मनाया जा रहा है। ये दिन महिलाओं के लिए समर्पित होता है। यह दिन (Womens Day 2025) महिलाओं को समाज में सम्मान दिलाने और अधिकारों के प्रति जागरूक करने के मकसद से मनाया जाता है। यह दिन मौका है हर उस महिला के प्रति आभार व्यक्त करने का जो आपके जीवन में अहम जगह लगती है।
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज दुनियाभर में International Women's Day मनाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ एक दिन का जश्न नहीं, बल्कि एक ऐसा मौका है जब महिलाओं से जुड़े उन मुद्दों पर खुलकर बात की जाए, जिन पर आमतौर पर चुप्पी साध ली जाती है। आज भले ही दुनिया बहुत आगे बढ़ गई है लेकिन कहीं न कहीं महिलाएं आज भी पीछे हैं। वो अपनी बातों को खुलकर नहीं कह पाती हैं।
आपको बता दें कि महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई समस्याएं ऐसी हैं, जिन पर समाज में खुलकर चर्चा नहीं की जाती है, जिससे कई महिलाएं जानकारी के अभाव में गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। यह जरूरी है कि हम इन विषयों पर बात करें, जागरूकता बढ़ाएं और महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करें।
पीरियड्स और उससे होने वाली समस्याएं
हर लड़की या महिला को महीने में छह दिन पीरियड्स के असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। इस पर खुलकर बात करने से आज भी कई महिलाएं हिचकिचाती हैं। कई महिलाएं असहनीय दर्द, पीसीओडी और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं से जूझती हैं, लेकिन सही समय पर डॉक्टर से परामर्श नहीं ले पाती हैं।
सेक्स के समय होने वाला दर्द
अकसर महिलाएं सेक्स के दौरान दर्द से कराह जाती हैं लेकिन इस बारे में बात करने से आज भी वह हिचकिचाती हैं। सेक्स के दौरान होने वाला दर्द एंडोमेट्रियोसिस का लक्षण भी हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जब गर्भाशय की अंदरूनी परत गर्भाशय के बाहर एकट्ठा हो जाती है। ड्राई वेजाइना के कारण भी सेक्स करते समय दर्द हो सकता है।
मेनोपॉज की अनदेखी
महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक बड़ा बदलाव लेकर आता है, जिसमें उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मूड स्विंग्स, हड्डियों की कमजोरी और हार्मोनल असंतुलन जैसी दिक्कतों से उन्हें जूझना पड़ता है। इसके बावजूद इस पर बात करने से कतराती हैं।
Uterus से जुड़ी समस्याएं
फाइब्रॉइड्स, सिस्ट, एंडोमेट्रियोसिस और यूट्रस कैंसर जैसी बीमारियां महिलाओं में आम हो गई हैं। इन बीमारियों के लक्षणों को नजरअंदाज करना महिलाओं की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर सही समय पर जांच और इलाज न कराया गया तो इससे जान भी जा सकती है।
मेंटल हेल्थ
आजकल ज्यादातर लोगों में तनाव बढ़ता जा रहा है। इसके पीछे घर, ऑफिस या पर्सनल प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। इससे नींद भी नहीं आती है। इसके बाद महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं। इस दौरान महिलाओं को इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है। ताकि वे अपने मन की बात कह सकें और सही उपचार पा सकें।
आपको बता दें कि महिला दिवस सिर्फ सेलिब्रेशन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे एक जागरूकता अभियान का रूप देना जरूरी है। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के लिए खुले मंचों पर इन मुद्दों पर बात करनी चाहिए।
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Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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