बीपी की दवा रोज लेना क्यों है जरूरी? स्टडी में सामने आया- 11% तक घट जाता है हार्ट अटैक का खतरा
एक बड़े विश्लेषण से पता चला है कि हाई ब्लड प्रेशर की दवा नियमित रूप से लेने से दिल के ...और पढ़ें

ब्लड प्रेशर की दवा छोड़ने से घट सकता है हार्ट अटैक से बचाव (Image Source: AI-Generated)
HighLights
ब्लड प्रेशर की दवा छोड़ने से घट सकता है हार्ट अटैक से बचाव
दुनिया में करीब 1.4 अरब लोग ब्लड प्रेशर से पीड़ित
491 हजार लोगों पर हुए अध्ययन में निकला निष्कर्ष
एएनआई, वॉशिंगटन। हाई ब्लड प्रेशर की दवा नियमित रूप से नहीं लेना दिल के दौरे, स्ट्रोक और दिल से जुड़ी दूसरी गंभीर बीमारियों से बचाव को कमजोर कर सकता है। 91,339 लोगों पर किए गए एक बड़े विश्लेषण में सामने आया है कि जो मरीज नियमित रूप से दवा लेते हैं, उनमें दिल से जुड़ी गंभीर घटनाओं का खतरा 11 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं, दवा की खुराक बार-बार छोड़ने वाले मरीजों को इसका खास फायदा नहीं मिला।
यह अध्ययन इएससी कांग्रेस 2026 में पेश किया गया। दुनियाभर में 30 से 79 वर्ष की उम्र के करीब 1.4 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं। यह बीमारी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मौतों का प्रमुख कारण है। हालांकि, रक्तचाप कम करने वाली दवाएं दिल की बीमारियों का खतरा घटाने में कारगर हैं, लेकिन करीब आधे मरीज डाक्टर के निर्देशों के मुताबिक दवा नहीं लेते। पहले के अध्ययनों में दवा नियमित नहीं लेने और खराब स्वास्थ्य परिणामों के बीच संबंध सामने आया था। लेकिन उन अध्ययनों में दूसरे कारणों का असर भी हो सकता था। इसलिए शोधकर्ताओं ने नौ क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों का विश्लेषण किया।
पांच साल में दवा लेने की नियमितता घटी
शोधकर्ताओं ने मरीजों को दो समूहों में बांटा। जो लोग निर्धारित दवा की कम से कम 80 प्रतिशत खुराक लेते थे, उन्हें नियमित दवा लेने वाला समूह माना गया। इससे कम खुराक लेने वाले मरीज दूसरे समूह में रखे गए। अध्ययन में पाया गया कि पहले साल 88 प्रतिशत मरीज नियमित रूप से दवा ले रहे थे। लेकिन पांचवें साल तक यह आंकड़ा घटकर 79 प्रतिशत रह गया। इससे पता चलता है कि लंबे समय तक दवा लेने में मरीजों की नियमितता कम होती जाती है।
दवा नियमित लेने वालों को ज्यादा फायदा
नियमित रूप से दवा लेने वाले मरीजों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप का ऊपरी स्तर, दूसरे समूह की तुलना में 5.2 एमएमएचजी कम था। वहीं, कम नियमितता वाले मरीजों में यह अंतर केवल 3 एमएमएचजी रहा। दिल का दौरा, स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग और अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु का कारण बनने वाली हार्ट फेल्योर जैसी समस्याओं का विश्लेषण करने पर भी अंतर दिखा। नियमित दवा लेने वालों में गंभीर हृदय संबंधी घटनाएं 11 प्रतिशत कम हुईं। हालांकि, कम नियमितता वाले मरीजों में जोखिम में कमी सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं पाई गई।
दवा लेना आसान बनाने पर जोर
विशेषज्ञों ने दवा नियमित लेने की आदत को बेहतर बनाने पर जोर दिया है। इसके लिए दवा लेने के समय और खुराक की नियमित समीक्षा, मरीजों को जागरूक करना, कई दवाओं को एक ही गोली में देना और लंबे समय तक असर करने वाली दवाओं का इस्तेमाल मददगार हो सकता है। इएससी कम्युनिकेशन कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर फेलिक्स महफूद ने कहा कि हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित न होने के पीछे दवा नियमित न लेना एक अहम कारण है। डाक्टरों को मरीजों से बिना किसी झिझक के बात करनी चाहिए, ताकि दवा लेने में आने वाली परेशानियों को समझकर उनका समाधान किया जा सके।
