'दिल टूटना सिर्फ कहावत नहीं, जानलेवा भी', सदमे और गुस्से से कमजोर हो सकती है हार्ट की पंपिंग
दिल टूटना सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम' नामक एक वास्तविक स्थिति है। तीव्र भावनात्मक आघात जैसे सदमा ...और पढ़ें

भावनात्मक सदमा और गुस्सा कर सकता है दिल को कमजोर (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
HighLights
तीव्र भावनात्मक तनाव से दिल की पंपिंग क्षमता घटती है।
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लक्षण हार्ट अटैक जैसे होते हैं।
उचित इलाज से अधिकांश मरीज कुछ हफ्तों में ठीक होते हैं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल टूट जाता है, सिर्फ कहावत नहीं सच है। साहित्यकारों और लेखकों के लिखे तमाम किस्से कहानियों में आपने पढ़ा भी होगा कि दिल टूटने पर इंसान सदमे में चला जाता है। किसी अपने के बिछड़ने का दुख हो, रिश्ते के टूटने का सदमा या अचानक आया तेज गुस्सा, इन तीव्र भावनात्मक आघात का असर दिल की कार्यप्रणाली पर पड़ता है।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, कुछ मामलों में दिल की खून को पंप करने की क्षमता अचानक कमजोर हो जाती है। इस दुर्लभ स्थिति को ‘ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम’ या ‘टाकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी’ कहते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी तीव्र भावनात्मक या शारीरिक तनाव के बाद हार्मोन का स्तर अचानक बढ़ सकता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों के सामान्य ढंग से सिकुड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। किसी प्रियजन की मृत्यु, रिश्ते का टूटना, अत्यधिक गुस्सा, डर या गंभीर बीमारी इसके संभावित कारण हो सकते हैं।
दिल्ली स्थित एम्स के कार्डियोलाजी विभाग के प्रमुख डा. राजीव नारंग के अनुसार, अचानक और तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रिया, जिसमें अत्यधिक क्रोध भी शामिल है, एड्रेनालाईन हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ा सकती है। इसका असर हृदय की मांसपेशियों पर पड़ता है और कुछ समय के लिए उनकी पंपिंग क्षमता कमजोर हो सकती है।
हार्ट अटैक जैसे लक्षण, इसलिए सतर्कता जरूरी
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में अचानक सीने में दर्द, सांस फूलना, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ईसीजी में भी हार्ट अटैक जैसी असामान्यताएं नजर आ सकती हैं।
हालांकि, इन मरीजों की कोरोनरी धमनियों में अक्सर ऐसी बड़ी रुकावट नहीं मिलती, जो लक्षणों की पूरी व्याख्या कर सके। फिर भी जांच के बिना हार्ट अटैक की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।
कोलकाता के बीएम बिड़ला हार्ट हास्पिटल के कार्डियोलाजी निदेशक डा. अंजन सिओटिया बताते हैं कि इस बीमारी के सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। माना जाता है कि एड्रेनालाईन समेत कैटेकोलामाइन नामक तनाव से जुड़े रसायनों का स्तर अचानक बढ़ने से हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर पड़ सकती हैं।
जापानी बर्तन से पड़ा नाम
‘टाकोत्सुबो’ जापान में इस्तेमाल होने वाले उस बर्तन का नाम है, जिसका उपयोग ऑक्टोपस पकड़ने के लिए किया जाता है। इस बर्तन का आकार इस बीमारी में हृदय के बाएं वेंट्रिकल (निचले कक्ष) के बदलते आकार से मिलता-जुलता है। इसी वजह से इस स्थिति को टाकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी नाम दिया गया।
ज्यादातर मरीजों में उचित इलाज से कुछ दिनों या हफ्तों में हृदय की कार्यक्षमता सुधर जाती है। हालांकि, कुछ मामलों में हार्ट फेलियर, धड़कन में गड़बड़ी और कार्डियोजेनिक शाक जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और रक्तचाप व मधुमेह पर नियंत्रण दिल की सेहत के लिए जरूरी हैं। सबसे अहम बात यह है कि भावनात्मक तनाव के बाद सीने में नया दर्द, सांस लेने में परेशानी या ठंडा पसीना आए तो उसे केवल घबराहट मानकर नजरअंदाज न करें। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
