कई बार चोट लगने या दर्द होने पर डॉक्टर हीट थेरेपी को बोलते हैं तो कभी कोल्ड थेरेपी। इन दोनों का ही काम दर्द और सूजन से राहत दिलाना है। मोटे तौर पर जान लें कि चोट या दर्द के साथ-साथ सूजन के लिए कोल्ड थेरेपी कारगर होती है वहीं मांसपेशियों में दर्द या जकड़न के हॉट थेरेपी। आइए और विस्तार से जानते हैं।

हीट थेरेपी का इस्तेमाल

- जोड़ों में पुराना दर्द या मांसपेशियों में दर्द या अकड़न दूर करने के लिए फायदेमंद है हीट थेरेपी।

- एड़ियों में होने वाले दर्द में गर्म पानी की सिंकाई लाभ पहुंचाती है।

- सर्जरी के बाद डॉक्टर्स पुराने दर्द व मांसपेशियों की अकड़न में गर्म सिंकाई की सलाह दी जाती है।

कितनी देर लेनी चाहिए हीट थेरेपी

जरा सी जकड़न या तनाव को दूर करने के लिए 15 से 20 मिनट की हीट थेरेपी काफी होती है। लेकिन अगर बहुत ज्यादा दर्द है तो 30-45 मिनट लेनी चाहिए।

कोल्ड थेरेपी का इस्तेमाल

- एक्सरसाइज के चलते शरीर के किसी हिस्से में सूजन आ गई है तो इसमें कोल्ड थेरेपी प्रभावी है।

- ताजे चोट, सूजन में या पैर में आए मोच में कोल्ड बैग का इस्तेमाल करना चाहिए। 

- जॉगिंग, दौड़ने, खेलने, गिरने की वजह से हो रहे दर्द को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए दिन में दो से तीन बार ठंडे पानी से सिंकाई करें। 

- रगड़ या घाव पर सीधे तौर पर बर्फ़ से सिंकाई करने की गलती न करें। आसपास सिंकाई करें। 

कितनी देर लेनी चाहिए कोल्ड थेरेपी

बर्फ को तौलिए में लपेटकर दर्द वाली जगह पर रखें। दिन में दो से चार बार कोल्ड थेरेपी ली जा सकती है। 5 से 10 मिनट काफी होगा। आइस बाथ के लिए 10 से 15 डिग्री सेल्सियस पानी में 5 से 15 मिनट से ज्यादा स्नान न करें। 

-  जोड़ों के पुराने दर्द के लिए कोल्ड थेरेपी का उपयोग नहीं करना चाहिए। ये ठीक होने की जगह बढ़ सकता है।

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Edited By: Priyanka Singh