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    क्या है Meningitis और इसके लक्षण, जानें किन लोगों के लिए खतरनाक है यह बीमारी

    Updated: Sat, 27 Apr 2024 02:46 PM (IST)

    मेनिनजाइटिस (Meningitis) एक गंभीर बीमारी है जो किसी भी व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती है। हालांकि नवजात और छोटे बच्चे टीनएजर और युवाओं को इसका खतरा ज्यादा होता है। यह ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की लाइनिंग मेनिंजेस में होने वाला संक्रमण है जो कुछ ही घंटों में मौत का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में सबकुछ।

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    क्या है Meningitis, जो कुछ घंटों में ले सकता है आपकी जान

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की लाइनिंग जिसे मेनिंजेस कहते हैं, इसके संक्रमण को मेनिनजाइटिस (Meningitis) कहते हैं। इससे कोई भी प्रभावित हो सकता है, लेकिन नवजात शिशु, छोटे बच्चे, टीनएजर और जवान लोगों में इसकी संभावना अधिक होती है। मेनिनजाइटिस एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जो कि घंटों में मौत का कारण बन सकती है। इसलिए इसके लक्षणों को समय रहते समझना जरूरी है, जिससे सही समय पर उचित इलाज शुरू किया जा सके।

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    मेनिनजाइटिस का कारण

    यह वायरल या बैक्टिरियल संक्रमण के कारण हो सकता है। आमतौर पर जिनके नाक या गले में ये संक्रमण मौजूद होता है, लेकिन खुद वे इस बीमारी से ग्रस्त नहीं होते हैं उनसे ये फैलता है।

    मेनिनजाइटिस के लक्षण

    • उल्टी, मितली
    • फीवर, सिरदर्द
    • अच्छा महसूस न होना
    • हाथ पैर में दर्द
    • स्किन का पीलापन
    • ठंडे हाथ पांव
    • गर्दन में अकड़न
    • तेज रोशनी से उलझन
    • कन्फ्यूजन
    • स्किन रैश

    ऐसे करें इसकी पहचान

    पूरे शरीर का अच्छे से परीक्षण करें। छोटे लाल या भूरे रंग के छोटे रैश जो कि बढ़ कर बैंगनी या गहरे लाल रंग के बड़े रैश या ब्लिस्टर में भी बदल सकते हैं। काले या भूरे स्किन पर रैश दिखना मुश्किल हो तो हथेलियों, पैर के तलवे, मुंह का पैलेट और आईलिड को ध्यान से चेक करें। जरूरी नहीं है कि जिसे मेनिनजाइटिस है उसे रैश हो। बिना रैश के भी मेनिनजाइटिस हो सकती है और इसकी पुष्टि करने के लिए रैश होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।

    किन लोगों को ज्यादा खतरा?

    • उम्र के अनुसार एक साल से छोटे नवजात शिशुओं में इसका खतरा अधिक बना रहता है। टीन एजर और जवान लोगों को भी इसका खतरा अधिक होता है।
    • मेडिकल स्थिति के अनुसार जिन्हें हर समय किसी न्यूट्रिएंट की कमी रहती है, उन्हें ये संक्रमण तेजी से पकड़ता है। साथ ही एचआईवी पॉजिटिव के मरीजों को भी इसका खतरा बना रहता है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट जो हर समय विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया से घिरा रहता है, उनमें भी मेनिनजाइटिस का खतरा अधिक होता है।

    मेनिनजाइटिस का उपचार

    • कारण के अनुसार इलाज किया जाता है। बैक्टिरियल मेनिनजाइटिस एंटीबायोटिक और कोर्टिकोस्टेरॉइड से ठीक किया जाता है।
    • वायरस के कारण होने पर एंटीवायरल दवाइयां चलाई जाती हैं।
    • मेनिनजाइटिस से बचाव के लिए मेनिंजोकॉकल वैक्सीन (MCV) भी लगाई जाती है।

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    Picture Courtesy: Freepik