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    Jaundice In Pregnancy: क्या प्रेगनेंसी के दौरान पीलिया ख़तरनाक हो सकता है? जानें एक्सपर्ट्स की राय

    By Ruhee ParvezEdited By:
    Updated: Tue, 06 Sep 2022 03:16 PM (IST)

    Jaundice In Pregnancy प्रेगनेंसी के दौरान लिवर से जुड़ी कई बीमारियों का जोखिम रहता है। जिसमें पीलिया मतली उल्टी और पेट दर्द शामिल है। गर्भावस्था के दौरान लिवर से जुड़ी बीमारी न सिर्फ मां बल्कि बच्चे की जान के लिए भी ख़तरनाक साबित हो सकती है।

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    Jaundice In Pregnancy: प्रेगनेंसी के दौरान पीलिया से कैसे बचें?

    नई दिल्ली, रूही परवेज़। Jaundice In Pregnancy: प्रेगनेंसी वो समय है जो हर मां-बाप के लिए खास होता है। हालांकि, यह समय मां के लिए आसान नहीं होता, वह कई तरह के शारीरिक और हॉर्मोनल बदलावों से गुज़रती हैं। इसके अलावा स्वच्छता और खाने-पीने को लेकर विशेष सावधानी न बरती जाए, तो कई गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ सकता है। इन्हीं में से एक है पीलिया। तो आइए हेल्थ एक्सपर्ट्स से जानें कि गर्भावस्था में पीलिया किस तरह के जोखिमों का कारण बन सकता है।

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    प्रेगनेंसी में जॉन्डिस के कारण क्या होते हैं?

    परेल के मुंबई ग्लोबल हॉस्पिटल में स्त्री रोग सलाहकार, डॉ. अनघा छत्रपति ने बताया कि गर्भावस्था में पीलिया के कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें हम दो भागों में बांट सकते हैं।

    पहला: गर्भावस्था से जुड़ा

    दूसरा: गर्भावस्था से संबंधित नहीं

    गर्भावस्था से संबंधित नहीं

    पहले हम बात करते हैं उन स्थितियों की जो प्रेगनेंसी से जुड़ी नहीं हैं।

    1. वायरल हेपेटाइटिस

    हेपेटाइटिस-ए और ई दूषित भोजन या पानी के सेवन से फैलते हैं। हेपेटाइटिस-ए एक हल्की बीमारी होती है, जो खुद ही ठीक हो सकती है। लेकिन हेपेटाइटिस-ई से संक्रमित महिलाओं में मृत्यु दर 20% तक बढ़ सकती है, जिससे लिवर पूरी तरह से विफल हो सकता हैं।

    2. हेपेटाइटिस बी और सी

    आमतौर पर वे यौन क्रिया या हेमेटोजेनियस मार्ग से फैलने वाले पुराने संक्रमण होते हैं। इससे तीव्र हेपेटाइटिस हो सकता है, जिससे पीलिया हो सकता है।

    3. दवा के कारण हेपेटाइटिस

    कुछ दवाएं जैसे पैरासिटामोल या तपेदिक रोधी दवाएं लीवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

    4. ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस

    यह बहुत ही दुर्लभ स्थिति है, जिसके कारण खुद एंटीबायोटिक दवाएं लीवर को नष्ट कर देती हैं।

    5. जिगर का सिरोसिस

    यह एक क्रोनिक स्थिति है, जो लिवर के फाइब्रोसिस के कारण सिकुड़न और लिवर की विफलता के कारण होती है।

    b) स्थितियां जो गर्भावस्था से जुड़ी होती है

    1. हाई ब्लड प्रेशर की वजह से HELLP सिंड्रोम

    गर्भावस्था के दौरान प्रीक्लेम्पसिया या हाई बीपी के कारण लीवर खराब हो सकता है जिससे पीलिया हो सकता है

    2. गर्भावस्था में कोलेस्टेसिस

    आमतौर पर गर्भावस्था के अंतिम 3 महीनों में देखा जाता है। अगर उचित उपचार न किया जाए, तो यह भ्रूण की मृत्यु का कारण बन सकता है।

    3. प्रेगनेंसी में एक्यूट फैटी लिवर

    बहुत ही दुर्लभ स्थिति जहां लिवर अचानक फेल हो जाता है। ऐसा सिर्फ गर्भावस्था में होता है। इसमें मृत्यु दर काफी उच्च है।

    गर्भावस्था के दौरान पीलिया क्या ख़तरनाक साबित होता है?

    मुंबई के मसीना अस्पताल में कंसलटेंट ऑब्ट्रीशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रजनन विशेषज्ञ, डॉ. (श्रीमती) राणा चौधरी ने बताया, "गर्भावस्था के दौरान ज़्यादातर महिलाओं में पीलिया काफी हल्का होता है, जिसे आसानी से मैनेज किया जा सकता है। हालांकि, प्री-एक्लेमप्सिया या एचईएलपी सिंड्रोम और अन्य बीमारियों जैसी कुछ स्थितियों में, यह लिवर फेलियर की गंभीरता के आधार पर मां और बच्चे दोनों में गंभीर स्थिति पैदा करने से जुड़ा हो सकता है।"

    मां की सेहत से जुड़ी जटिलताएं

    1. लिवर को गंभीर रूप से क्षति पहुंचना, जिससे लिवर फेलियर और मौत हो सकती है।

    2. न्यूरोलॉजिकल संबंधी जटिलताएं

    3. किडनी का काम करना बंद कर देना और ब्लीडिंग शुरू हो जाना

    बच्चे को क्या ख़तरा होता है

    1. वक्त से पहले लेबर और डिलिवरी

    2. अपर्याप्त ऑक्सीजनकरण और बच्चे का विकास

    3. गर्भ में बच्चे की मौत और मृत जन्म

    4. मां से बच्चे में वायरल हेपेटाइटिस-बी और ई जैसे संक्रमणों का संचरण

    पीलिया से कैसे बचा जा सकता है?

    गर्भावस्था के दौरान पीलिया किसी को भी प्रभावित कर सकता है, और दुर्भाग्य से इसे रोकने के लिए कोई विशेष उपाय नहीं हैं। हालांकि, गर्भवती महिलाओं के लिए बुनियादी स्वच्छता का सख्ती से पालन करना महत्वपूर्ण है।

    1. सड़क किनारे ठेलों से कुछ न खाएं

    2. खाना खाने से पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह से धोएं।

    3. ऑयली और डीप फ्राई किए गए फूड्स से दूर रहें, क्योंकि यह बैड कोलेस्ट्रॉल का कारण बनते हैं।

    4. हेपेटाइटिस-बी जैसे संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ज़रूरी वैक्सीन्स समय पर लगवाएं।