वजाइना में खुजली की समस्या से ज्यादातर महिलाएं दो चार होती होंगी लेकिन इसे बहुत ज्यादा गंभीर न समझते हुए खुद से ठीक हो जाने का इंतजार करती रहती है। वैसे तो ज्यादातर मामलों में ये नो डाउट खुद से सही भी हो जाता है लेकिन कुछ मामलों में ये बहुत सीरियस रूप भी ले लेता है। तो अगर बहुत ज्यादा खुजली हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेने में बिल्कुल ही न हिचकिचाएं।

यीस्ट इंफेक्शन

वजाइना में नेचुरल यीस्ट तो होता ही है लेकिन जब ये बहुत ज्यादा मात्रा में बढ़ जाते हैं तो इंफेक्शन की समस्या हो सकती है। जिसके परिणामस्वरूप तेज और हर वक्त खुजली के साथ सफेद डिस्चार्ज की प्रॉब्लम भी होती है। हालांकि डॉक्टर की सलाह से लिए गए एंटीबॉयोटिक्स द्वारा ये जल्द दूर भी हो जाती है।

तनाव

तनाव का वजाइनल खुजली से क्या लेना-देना...यही सोच रही होंगी न आप! तो आपको बता दें कि बहुत ज्यादा तनाव लेने से हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर होते जाता है जिसकी वजह से कई तरह के इंफेक्शन होते रहते हैं। इन्हीं में से एक है वजाइनल इंफेक्शन, जिससे खुजली बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।है।

स्किन प्रॉब्लम्स

खुजली और सोरायसिस की प्रॉब्लम सिर्फ हाथ, पैर, पीठ, गर्दन जैसी जगहों तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि इससे जनानांग भी प्रभावित हो सकते हैं। एलर्जी का भी इसमें रोल होता है। खुजली का तुरंत इलाज न किया जाए तो ये वजाइना तक भी पहुंच जाते हैं।

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़

असुरक्षित तरीके से संबंध बनाने से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं जिसमें से एक है वजाइनल खुजली। इसलिए इंटीमेट होने के बाद जनानांगों को अच्छी तरह धो लें। इससे काफी हद तक कुजली की प्रॉब्लम को दूर रखा जा सकता है।

मेनोपॉज

मेनोपॉज आसपास है या शुरू हो चुका है उन महिलाओं को भी वजाइनल खुजली की समस्या हो सकती है। दरअसल ऐसा हॉर्मोन के कम हो जाने की वजह से होता है। जिसकी वजह से म्यूकस मेंब्रेन पतली और सूख जाती है। ट्रीटमेंट न करने पर वह सूखकर खुजली की वजह बनती है।

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Edited By: Priyanka Singh