शरीर की ‘सफाई मशीन’ पर वैज्ञानिकों का कंट्रोल, कोशिकाओं के कचरे को बाहर से किया जा सकेगा मैनेज?
वैज्ञानिकों ने पाया है कि कोशिकाओं की कचरा साफ करने की प्रक्रिया (ऑटोफैगी) को बाहर से नियंत्रित किया जा सकता है।

कोशिकाओं की काम को बाहर से किया जा सकता है नियंत्रित (Image Source: AI Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। यह सबको पता है कि हमारे शरीर में जितनी भी कोशिकाएं मौजूद हैं, वो अपना कचरा खुद से साफ करती हैं। पर क्या आप जानते हैं कि कोशिकाओं की इस प्रक्रिया को बाहर से भी नियंत्रित किया जा सकता है? यह बात अटपटी जरूर लग सकती है लेकिन इसे लेकर हाल ही में हुआ शोध यही कहता है।
कोशिकाओं की काम को बाहर से किया जा सकता है नियंत्रित
शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर में सेल जब अपने-आप कचरा साफ करने की प्रक्रिया शुरू करती है, तो उसे बाहर से भी नियंत्रित किया जा सकता है। इससे कैंसर या पार्किंसंस में सेल की सफाई की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है, क्योंकि इन बीमारियों में यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती।
साझे शोध में हुआ खुलासा
यह शोध नई दिल्ली के काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआइआर)-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आइजीआइबी) और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ इम्यूनोलॉजी, सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी और अमेरिका की यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिलिस के शोधकर्ताओं ने की थी।
क्या है आटोफैगी प्रोसेस?
बताते चलें कि आटोफैगी एक रीसाइक्लिंग प्रोसेस है, जिसमें सेल आटोफैगोसोम नाम की रीसाइक्लिंग बिन जैसी कैविटी बनाकर बेकार चीजों को हटाने का काम करता है। इस रीसाइक्लिंग बिन में एक परत बनती है, जो सेल के मलबे को पहले घेर लेती है, इसके बाद यह सेल उसे तोड़ती है और उसके हिस्सों का इस्तेमाल ऊर्जा या नई ग्रोथ के लिए करती है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग आटोफैगी शुरू करने में बहुत मददगार
शायद आपको पता न हो पर आटोफैगी को शुरू करने वाली चीजों में से एक है इंटरमिटेंट फास्टिंग यानी बीच-बीच में उपवास करना। इसमें लंबे समय तक भूखे रहने के बाद, ग्लूकोज और अमीनो एसिड का स्तर कम होने पर शरीर को ऊर्जा बचाने का संकेत मिलता है।
अगर इसके मतलब को समझें तो ग्रीक भाषा में फैगी का मतलब होता है ‘खुद को खाना’। शोधकर्ताओं ने रिसर्च के दौरान सिमुलेशन के जरिए आटोफैगी में शामिल प्रोटीन "एलसी3" के व्यवहार को देखा और यह भी पाया कि सेल की रीसाइक्लिंग बिन की अंदरूनी सतह को छूते ही यह अपना आकार बदल लेता है।
