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Ovarian cancer Prevention: लाइफस्टाइल में इन बदलावों व बातों का ध्यान रख टाल सकते हैं ओवेरियन कैंसर का खतरा

Ovarian cancer Prevention ओवेरियन कैंसर महिलाओं में होने वाला बहुत ही गंभीर कैंसर है जिससे हर साल कई महिलाओं की मौत हो जाती है तो अगर आप इस गंभीर कैंसर से बचे रहना चाहती हैं तो लाइफस्टाइल में करें ये जरूरी बदलाव।

By Priyanka SinghEdited By: Priyanka SinghPublished: Mon, 22 May 2023 10:17 AM (IST)Updated: Mon, 22 May 2023 10:17 AM (IST)
Ovarian cancer Prevention: लाइफस्टाइल में इन बदलावों व बातों का ध्यान रख टाल सकते हैं ओवेरियन कैंसर का खतरा
Ovarian cancer Prevention: ओवेरियन कैंसर से बचाव के टिप्स

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Ovarian cancer Prevention: ओवेरियन कैंसर (ओसी) यानी अंडाशय कैंसर 5.4-8/100,000 की दर के साथ भारत में महिलाओं में होने वाला तीसरा प्रमुख कैंसर है और महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का भी प्रमुख कारण है। इस कैंसर के शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते। ज्यादातर केसेज़ में इसका पता स्टेज-3 या 4 में चल पाता है। इसलिए इस कैंसर को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। तो लाइफस्टाइल में कुछ जरूरी बदलावों से ओवेरियन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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1. शरीर का वजन मेनटेन रखने से ओवेरियन कैंसर का खतरा टाला जा सकता है क्योंकि अतिरिक्त वजन से कैंसर सेल को बढ़ाने वाले हार्मोन बनते हैं। ताजा और घर पर पका खाना खाने, हेल्दी एंड बैलेंस्ड डाइट लेने और नियमित तौर पर फिजिकल एक्टिविटीज फिर चाहे वह एक्सरसाइज हो, स्वीमिंग, साइकिलिंग या जॉगिंग करने से इसके होने की संभावनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

2. शरीर में पर्याप्त विटामिन डी का स्तर कैंसर सेल को बढ़ने से रोक कर ओवेरियन कैंसर की रोकथाम में अहम योगदान देता है। तो इसके लिए विटामिन डी से भरपूर फूड एंड सप्लीमेंट लें। इसके अलावा इस गंभीर कैंसर को रोकने में धूप (खासकर सुबह वाली) लेना भी बेहद फायदेमंद होता है। 

3. करीब 10 प्रतिशत कैंसर वंशानुगत है तो अपने फैमिली डॉक्टर्स को इसके बारे में बताएं। यह पता लगाने के लिए ब्लड सैम्पल के जरिए जेनेटिक टेस्ट किया जा सकता है कि क्या आनुवंशिक भिन्नता है, उदाहरण के लिए, बीआरसीए1 या बीआरसीए2 जीन में यह देखा जा सकता है कि डिम्बग्रंथि या स्तन कैंसर पैदा होने का जोखिम तो नहीं है।

4. पेल्विक इन्फेक्शन को लेकर सचेत रहें और खासकर 35 वर्ष की उम्र के बाद गायनेकोलॉजिस्ट से नियमित तौर पर जांच कराएं। कंडोम इस्तेमाल करें और आंत तथा वेजाइनल माइक्रोबायम को स्वस्थ रखें। छूने से होने वाले संक्रमण का पता लगाएं तथा पेल्विक इनफ्लेमेटरी रोग का उचित उपचार कराएं, खासकर अगर यह समस्या कम उम्र की महिलाओं में बार-बार होती हो।  इससे न सिर्फ पेल्विक संबंधित दर्द और बांझपन दूर करने में मदद मिल सकेगी बल्कि ओवेरियन कैंसर की भी रोकथाम की जा सकेगी।

5. फैमिनिन हाइजीन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल अवॉयड करें, क्योंकि यह देखा गया है कि योनि को गलत तरीके से साफ करने या ज्यादा अंदर तक सफाई करने से टिश्यू, मासिक धर्म संबंधित तरल पदार्थ या प्रजनन क्षेत्र में नुकसानदायक बैक्टीरिया से फैलोपियन ट्यूब्स, गर्भाशय या अंडाशय की सूजन बढ़ जाती है। यह सूजन ओवेरियन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है।

(डॉ. अमित वर्मा, मोलीक्यूलर ऑनकोलॉजिस्ट एवं कैंसर विशेषज्ञ से बातचीत पर आधारित)

Pic credit- freepik


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