हर सिर दर्द माइग्रेन नहीं, दोनों के लक्षणों में होता है बड़ा फर्क; इन संकेतों से करें पहचान
जहां सामान्य सिरदर्द तनाव के कारण होता है, वहीं माइग्रेन में उल्टी, प्रकाश संवेदनशीलता जैसे गंभीर लक्षण होते हैं।

माइग्रेन और सिर दर्द में अंतर समझें (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दिनभर के काम के दबाव के चलते सिर में दर्द होने पर कई बार यह अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है कि यह मामूली सिर दर्द है या माइग्रेन का अटैक। लेकिन इन दोनों के बीच का फर्क समझना जरूरी है, ताकि उसका इलाज भी उसके हिसाब से किया जा सके। आइए यहां जानते हैं कि हम किन संकेतों से आम सिर दर्द और माइग्रेन के बीच अंतर को समझ सकते हैं।
सिर दर्द क्या है?
सिर दर्द एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति दर्द के साथ ही दबाव भी महसूस करता है। इसकी पहचान है कि मामूली यह दर्द पूरे सिर में होता है पर इसकी रेंज कम या ज्यादा कुछ भी हो सकती है। वहीं, यह आम सिर दर्द माथे, कनपटी, गर्दन के ऊपरी हिस्से में होता है, जो 5 मिनट से लेकर 4 घंटे तक रह सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की माने तो आम सिर दर्द अक्सर तनाव के चलते होता है। इसके अलावा, एंग्जाइटी, मांसपेशियों में तनाव, आंखों पर जोर पड़ना जैसे कई कारक इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
माइग्रेन क्या है?
सिर दर्द से हटकर माइग्रेन एक गंभीर रूप है, जिसमें दर्द के साथ ही और भी कई लक्षण देखने को मिलते हैं, जैसे- गर्दन और कंधे में दर्द, मतली, कान के पीछे या ऊपरी हिस्से में दर्द होना, देखने में परेशानी, लाइट, साउंड को लेकर सेंसिटिविटी, उल्टी और मांसपेशियों में तनाव।
माइग्रेन के दो प्रकार
माइग्रेन के एपिसोड्स को दो श्रेणी में बांटा गया है, जिनमें बिना ऑरा के माइग्रेन और ऑरा के साथ माइग्रेन शामिल है। यहां ऑरा का मतलब है माइग्रेन अटैक से पहले 10-30 मिनट के बीच मिलने वाले शारीरिक संकेत। इनमें दिमाग का अलर्ट न रहना, सोचने में परेशानी, फ्लैश लाइट दिखना या अजीब सी लाइंस दिखना, हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्न हो जाना, अजीब सी महक और स्वाद आने जैसे लक्षण शामिल हैं।
माइग्रेन की कैसे पहचान करें?
माइग्रेन में सिर दर्द गंभीर रूप से होता है, कई बार तो इतना ज्यादा कि इमरजेंसी में जाना पड़ सकता है।
ज्यादातर मामलों में यह दर्द सिर के किसी एक हिस्से में होता है।
माइग्रेन का दर्द इतना तीव्र होता है कि रोजमर्रा के काम में दखल दे सकता है।
यह दर्द 3 घंटे ए लेकर 72 घंटों यानी 3 दिन तक बना रह सकता है।
