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ब्रेस्ट में गांठ नहीं तो कैंसर नहीं? यह सोच पड़ सकती है भारी, इन संकेतों पर भी रखें खास नजर

By Dr. Nagender SharmaEdited By: Shweta Chauhan
Published: Tue, 06 Oct 2026 02:48 PM (IST)

ब्रेस्ट कैंसर हमेशा गांठ के रूप में नहीं होता, यह बिना किसी संकेत के अंदर ही अंदर विकसित हो सकता है।

ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े संकेत (Image Source: AI Generated)

ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े संकेत (Image Source: AI Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ज्यादातर लोगों को लगता है कि ब्रेस्ट कैंसर का पहला संकेत स्तनों में बनने वाली गांठ है। पर यहां जानने की जरूरत है कि ब्रेस्ट कैंसर हमेशा एक गांठ के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराता। कुछ मामलों में यह जानलेवा बीमारी बिना किसी संकेत के अंदर ही अंदर विकसित होती रहती है। ऐसे में इसका शुरुआत स्टेज में पता चल पाना मुश्किल हो जाता है। 

आइए ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े उन संकेतों के बारे में जानते हैं, जिनकी समय रहते पहचान करना जरूरी है: 

इमेजिंग टेस्ट से ही होगी पहचान 

कई ब्रेस्ट कैंसर के मामले ऐसे हैं जिनकी पहचान खुद के परीक्षण करने से पहले केवल इमेजिंग टेस्ट जैसे- मैमोग्राफी से ही की जा सकती है। उदाहरण के लिए, डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू (DCIS), जिसे ब्रेस्ट कैंसर का पहला चरण कहा जाता है, गांठ के बजाय माइक्रोकैल्सीफिकेशन नामक कैल्शियम के रूप में शरीर में बनता है। 

ब्रेस्ट साइज में बदलाव पर गौर करें 

गांठ के अलावा, महिलाओं को ब्रेस्ट साइज में हो रहे बदलाव और अन्य लक्षणों पर भी खास ध्यान देना चाहिए, जैसे- 

  • शेप का बदलना 

  • त्वचा पर गड्ढे पड़ना 

  • त्वचा की लेयर मोटी होना 

  • लालिमा

  • लगातार खुजली और खुजली

  • निप्पल के सामान्य होना 

  • निप्पल के अंदर की तरफ मुड़ जाना 

  • निप्पल में खून आना और सूजन 

  • त्वचा का टेक्स्चर संतरे के छिलके जैसा हो जाना 

ये सभी संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क किए जाने की जरूरत है। हालांकि, ये संकेत कैंसर के अलावा किसी और बीमारी में भी दिख सकते हैं, पर जरूरी है कि समय रहते इनकी जांच करा ली जाए। 

कैंसर की छोटी गांठ का पता लगाना मुश्किल 

कई बार स्तनों में बन रही गांठ का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है, इसकी वजह छोटी गांठ, उसके आकार का सही से न बन पाना या गांठ का ब्रेस्ट टिश्यूज की गहराई में बनना हो सकता है। वहीं, डेंस ब्रेस्ट टिश्यू भी स्तनों में किसी तरह की असमान्यताओं की जांच खुद से करना मुश्किल बना देते हैं। इन मामलों में कभी-कभी मैमोग्राफी ही पहचान कर सकती है। 

महिलाओं को अपनी ब्रेस्ट की जानकारी होनी चाहिए 

महिलाओं को अपने ब्रेस्ट से अच्छी तरह से परिचित होना चाहिए कि वो कैसी दिखती या महसूस होती है। उम्र, पर्सनल और फैमिली हिस्ट्री के आधार पर रेगुलर स्क्रीनिंग करवाना जरूरी शर्त है। इस बात का भी ध्यान रखें कि हमेशा गांठ का न होना यह साबित नहीं करता कि ब्रेस्ट कैंसर नहीं है, पर इसका मतलब यह भी नहीं कि कैंसर ही है। बस यह बात याद रखें कि ब्रेस्ट में किसी तरह के बदलाव और परेशानी होने पर महिलाओं को बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

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(डॉ. नागेंद्र शर्मा, मैक्स हॉस्पिटल गुरुग्राम में मेडिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट में डायरेक्टर हैं)