जितना ज्यादा पैदल चलेंगे टीनएजर्स, दिमाग का विकास होगा उतना ही बेहतर; नई रिसर्च में खुलासा
एक नए शोध में सामने आया है कि किशोरों का रोजाना पैदल चलना उनके मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग के विकास के लिए बेहद फायदेमंद है।

अमेरिकी यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा- बदल रही किशोरों के दिमाग की बनावट (Image Source: AI-Generated)
HighLights
किशोरों का पैदल चलना मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग के विकास के लिए महत्वपूर्ण
रोजाना 12,000 कदम चलने से किशोरों में मानसिक समस्याएं कम होती हैं
अधिक चलने से दिमाग के मूवमेंट और भावनाओं वाले हिस्से मजबूत होते हैं
प्रेट्र, नई दिल्ली। किशोरावस्था दिमाग के विकास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बेहद अहम समय होता है। हाल ही में किशोरों पर हुए एक दिलचस्प शोध से एक बहुत ही आसान और असरदार बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, किशोर रोजाना जितना ज्यादा पैदल चलते हैं, ठीक एक साल बाद उनमें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं उतनी ही कम पाई जाती हैं।
12,000 कदमों का कमाल
अध्ययन में पाया गया है कि जो किशोर दिन भर में 12,000 या उससे ज्यादा कदम चलते हैं, उनके व्यवहार और भावनाओं से जुड़ी परेशानियां सबसे कम होती हैं। कदमों की संख्या और बेहतर मानसिक सेहत के बीच का यह सीधा कनेक्शन वाकई हैरान करने वाला है।
दिमाग की बनावट में दिखा बदलाव
'जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन नेटवर्क ओपन' में प्रकाशित इस रिसर्च के निष्कर्षों की पुष्टि न्यूरोइमेजिंग के जरिए भी हुई है। स्कैन में सामने आया कि जिन किशोरों ने सबसे ज्यादा कदम चले, उनके दिमाग के उन खास हिस्सों में 'कार्टिकल टिश्यू' ज्यादा मोटे पाए गए, जो इंसान के मूवमेंट और भावनाओं को कंट्रोल करते हैं।
फायदे के लिए एथलीट होना जरूरी नहीं
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट में काइनेसियोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर अमांडा पालुच के अनुसार, यह देखना बहुत ही उत्साहजनक है कि शारीरिक गतिविधि से दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को सीधा फायदा पहुंचता है।
उन्होंने साफ किया कि यह स्थिति "सब या कुछ नहीं" वाली नहीं है। यानी, इन फायदों को पाने के लिए किशोरों का बेहतरीन एथलीट होना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। अगर कोई किशोर रोजाना चलने वाले अपने कदमों में केवल 1,000 से 2,000 कदम और जोड़ लेता है, तो भी उसके दिमाग की बनावट और मानसिक स्वास्थ्य में काफी बेहतर नतीजे देखने को मिलते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि कदमों की संख्या के साथ-साथ यह फायदेमंद असर आगे भी लगातार बढ़ता रहता है।
