पार्किंसंस मरीजों के लिए नई उम्मीद: अब दिमाग के 'नेटवर्क' को टारगेट करने से दोगुनी असरदार होगी थेरेपी
क्या पार्किंसंस बीमारी की रफ्तार को धीमा करना या इसे वापस पलटना मुमकिन है? वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने ...और पढ़ें

बिना किसी सर्जरी के पार्किंसंस के मरीजों को मिल सकती है नई जिंदगी (Image Source: Freepik)
HighLights
पार्किंसंस में दिमाग के 'स्कैन' नेटवर्क को लक्षित किया गया
टीएमएस थेरेपी से इलाज की प्रभावशीलता दोगुनी हुई, 56% सुधार
बीमारी की प्रगति को धीमा करने या पलटने की क्षमता
प्रेट्र, नई दिल्ली। पार्किंसंस एक गंभीर बीमारी है जो बुजुर्गों की चलने-फिरने की क्षमता, संतुलन और तालमेल को बुरी तरह प्रभावित करती है। लेकिन अब इस बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगी है। एक ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अगर हम दिमाग के सिर्फ उन हिस्सों पर ध्यान देने के बजाय, जो मूवमेंट के लिए जिम्मेदार हैं, उस 'नेटवर्क' को लक्षित करें जो सोच और काम को जोड़ता है, तो इलाज दोगुना असरदार हो सकता है।

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863 मरीजों पर हुआ बड़ा शोध
इस महत्वपूर्ण शोध में चीन के पेइचिंग विश्वविद्यालय और अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पार्किंसंस के 863 मरीजों से इकट्ठा किए गए डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया। ये वे मरीज थे जो पहले से ही ऐसे उपचार ले रहे थे जिनसे लक्षणों में सुधार होता है, जैसे कि गहरी मस्तिष्क उत्तेजना और दवाएं।
क्या है 'स्कैन' और क्यों जरूरी?
इस शोध में एक खास बात सामने आई है। हमारे दिमाग में एक 'संज्ञानात्मक क्रिया नेटवर्क' या 'स्कैन' होता है। यह नेटवर्क हमारी सोच (संज्ञान) को हमारी शारीरिक गति से जोड़ने का काम करता है।
नेचर जर्नल में छपे निष्कर्ष बताते हैं कि पार्किंसंस के मरीजों में यह नेटवर्क सामान्य से बहुत ज्यादा मजबूती से जुड़ा होता है (हाइपरकनेक्टिविटी)। यह समस्या सिर्फ पार्किंसंस में देखी गई, अन्य गति संबंधी विकारों में नहीं। जब इलाज के जरिए इस नेटवर्क की अतिरिक्त सक्रियता को कम किया गया और इसे स्वस्थ लोगों के स्तर पर लाया गया, तो मरीजों को काफी राहत मिली।
बिना चीरफाड़ के 56% तक सुधार
इस शोध का सबसे उत्साहजनक पहलू 'ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन' (TMS) है। यह एक बिना चीरफाड़ वाली विधि है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करके न्यूरॉन्स को उत्तेजित किया जाता है।
अध्ययन में पाया गया कि जब TMS के जरिए दिमाग के गति वाले हिस्सों के बजाय सीधे 'स्कैन' नेटवर्क को टार्गेट किया गया, तो इलाज की प्रभावशीलता दोगुनी हो गई। सही तरीके से स्कैन को उत्तेजित करने पर लक्षणों में 56% तक का सुधार देखा गया, जो एक बड़ी सफलता है।
सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी पर होगा वार
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के न्यूरोलॉजी प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-लेखक निको यू डोसेनबैक का मानना है कि पार्किंसंस वास्तव में एक 'स्कैन विकार' है। उन्होंने बताया कि अगर हम हर मरीज के लिए व्यक्तिगत और सटीक तरीके से स्कैन को टार्गेट करें, तो सफलता की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
सबसे बड़ी बात यह है कि स्कैन के अंदर की गतिविधि को बदल देने से न केवल बीमारी के लक्षणों का इलाज होगा, बल्कि बीमारी के बढ़ने की गति को भी धीमा किया जा सकता है या उसे पलटा भी जा सकता है। यह शोध भविष्य में पार्किंसंस के इलाज की दिशा बदल सकता है।
