पार्किंसन और अल्जाइमर के इलाज में जगी नई उम्मीद! वैज्ञानिकों ने खोजा सेल डेथ रोकने वाला मालिक्यूल
पार्किंसन और अल्जाइमर दो ऐसी न्यूरोडिजेनेरेटिव बीमारियां हैं जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। हाल ही में शोधकर्ताओं ने एक ऐसे मालिक्यूल की खोज की है जो मस्तिष्क की कोशिकाओं की मृत्यु (Cell Death) को रोकने में सक्षम हो सकता है। यह खोज पार्किंसन और अल्जाइमर जैसी बीमारियों की प्रगति को धीमा करने या यहां तक कि रोकने का एक नया रास्ता खोल सकती है।

सिडनी, एजेंसी। पार्किंसन और अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों ने लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। मस्तिष्क की कोशिकाओं का धीरे-धीरे नष्ट होना, इन रोगों का मुख्य कारण है, जो रोगी की मानसिक क्षमता और शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित करता है। हालांकि, हाल ही में वैज्ञानिकों ने इन बीमारियों के इलाज की दिशा में एक जरूरी कदम उठाया है। आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक ऐसे छोटे मालिक्यूल की पहचान की है, जो कोशिका मृत्यु (सेल डेथ) को रोक सकता है, जिससे पार्किंसन और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के इलाज की नई उम्मीद जगी है।
यह शोध पत्रिका "साइंस एडवांसेज" में प्रकाशित हुआ है और मेलबर्न स्थित वाल्टर और एलिजा हाल इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल रिसर्च (डब्ल्यूईएचआइ) के वैज्ञानिकों ने यह अविश्वसनीय खोज की है। इस खोज में विशेष रूप से कोशिका मृत्यु को रोकने वाले रसायनों की तलाश की गई थी, जो भविष्य में इन खतरनाक बीमारियों के इलाज में मददगार हो सकते हैं।
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तंत्रिका कोशिकाओं की मृत्यु का खतरा
न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में, मस्तिष्क के तंत्रिका कोशिकाएं (न्यूरॉन) धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं, जिससे मस्तिष्क के कार्यों में गड़बड़ी उत्पन्न होती है। पार्किंसन और अल्जाइमर जैसी बीमारियों में यह प्रक्रिया अधिक तेज हो जाती है, जिससे रोगी की याददाश्त, सोचने की क्षमता और शारीरिक नियंत्रण में कमी आती है।
कोशिका मृत्यु रोकने वाले मालिक्यूल की खोज
यह शोध एक लाख से ज्यादा रासायनिक यौगिकों की जांच के बाद किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों ने एक छोटे मालिक्यूल की पहचान की, जो कोशिका मृत्यु को प्रभावी रूप से रोक सकता है। इस मालिक्यूल ने एक घातक प्रोटीन, बीएक्स (BX) को लक्षित किया, जो कोशिकाओं के पावरहाउस, माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) को नुकसान पहुंचाकर कोशिकाओं को मारता है। बीएक्स प्रोटीन को नष्ट करके, यह मालिक्यूल कोशिकाओं को बचाने में सक्षम हो सकता है।
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प्रोफेसर गिलाम लेसेन का बयान
शोध टीम के प्रमुख, प्रोफेसर गिलाम लेसेन ने इस खोज को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, "हम इस छोटे मालिक्यूल की खोज से रोमांचित हैं, जो बीएक्स नामक घातक प्रोटीन को लक्षित करता है और उसे निष्क्रिय कर देता है। यह न केवल कोशिका मृत्यु को रोकता है, बल्कि भविष्य में न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के इलाज में एक नई दिशा भी प्रदान कर सकता है।"
कोशिका मृत्यु को रोकने वाली दवाओं का महत्व
जहां एक ओर, कैंसर के इलाज के लिए कोशिका मृत्यु को प्रेरित करने वाली दवाओं का विकास हो रहा है, वहीं न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के लिए कोशिका मृत्यु को रोकने वाली दवाएं एक नया और महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज से ऐसी दवाओं का विकास संभव हो सकता है, जो पार्किंसन और अल्जाइमर जैसे रोगों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
एक नई उम्मीद की किरण
इस शोध के बाद, डेवसन लैब के शोधकर्ता ने कहा, "पहली बार हम बीएक्स प्रोटीन को माइटोकॉन्ड्रिया से दूर रखकर और इस मालिक्यूल का उपयोग करके कोशिकाओं को जीवित रख सकते हैं। यह एक क्रांतिकारी खोज हो सकती है, जो भविष्य में इन बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।"
यह अध्ययन पार्किंसन और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के इलाज में नई दिशा और उम्मीद का संकेत देता है। वैज्ञानिकों की यह खोज न केवल इन बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए आशा की किरण बन सकती है, बल्कि यह दवाओं की खोज के लिए भी एक नया मार्ग खोल सकती है। आने वाले समय में अगर इस खोज पर और काम किया गया, तो यह इन खतरनाक रोगों के इलाज में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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