मांसपेशियों में कमजोरी और बोलने में दिक्कत... जानिए बच्चों में होने वाले 'सेरेब्रल पाल्सी' के लक्षण
सेरेब्रल पाल्सी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो दिमाग के असामान्य विकास या चोट के कारण होता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी और मूवमेंट में परेशानी आती है।

कैसे होते हैं सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सेरेब्रल पाल्सी न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का एक ग्रुप है, जो दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। ये समस्या तब शुरू होती है, जब किसी बच्चे के दिमाग का असमान्य विकास हुआ हो या जन्म के दौरान या बाद में दिमाग में किसी तरह की चोट लगी हो।
दरअसल, इस कंडीशन में दिमाग में चोट की वजह से मांसपेशियों में कमजोरी या मूवमेंट में रुकावट आने लगती है। इस डिसऑर्डर से प्रभावित व्यक्ति के शरीर की मूवमेंट, पोस्चर, बैलेंस और मसल कॉर्डिनेशन में परेशानी आती है। आइए इस वर्ल्ड सेरेब्रल पाल्सी डे पर जानें इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से जुड़ी कुछ बातें।
क्या सेरेब्रल पाल्सी का इलाज है?
सेरेब्रल पाल्सी में ध्यान देने वाली बात है कि ये समस्या समय के साथ बढ़ती या बिगड़ती नहीं है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है उसके लक्षण और परेशानियां बदल सकती हैं। इस समस्या को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके सही इलाज की मदद से इसके लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं और बच्चे के जीवन की गुणवत्ता को सुधार सकते हैं।
सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण कैसे होते हैं?
इसके लक्षण हर बच्चे में अलग हो सकते हैं और इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसके दिमाग का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है।
- मांसपेशियों में काफी जकड़न या ढीलापन, जिससे चलने-फिरने में परेशानी होती है।
- शरीर के किसी हिस्से की मांसपेशियों में बहुत ज्यादा कमजोरी होना।
- चलते या हिलते-डुलते समय मांसपेशियों में ऐंठन या खिंचाव होना।
- बच्चे के हाथों या पैरों में बार-बार ट्विस्टिंग या अनकंट्रोल एक्टिविटी देखने को मिल सकती है।
- शरीर के बैलेंस और कॉर्डिनेशन में कमी के कारण बैठने, खड़े होने या चलने में परेशानी।
- दूध पीने, खाना चबाने या निगलने में परेशानी होना।
- बच्चे का बहुत रोना या उसे शांत कराना मुश्किल होना।
- बोलने में परेशानी होना, अपनी बात न कह पाना या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना।
- साफ देखने या सुनने में परेशानी।
- ध्यान लगाने में मुश्किल, बहुत जल्दी मूड बदलना या रात में सोने में परेशानी।
- आसपास की एक्टिविटीज पर सामान्य बच्चों से कम रिएक्शन देना।
कैसे करें मैनेज?
सही समय पर फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और दवाओं की मदद से बच्चे की काम करने की क्षमता में सुधार लाया जा सकता है, जिससे उनकी जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। दवाओं और थेरेपी के साथ-साथ माता-पिता का सपोर्ट भी उतना ही जरूरी है।
