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न तंबाकू, न सिगरेट... फिर भी युवाओं में क्यों बढ़ रहा है सिर और गर्दन का कैंसर? डॉक्टरों ने बताई वजह

Published: Wed, 29 Jul 2026 01:00 PM (IST)

अगर आप सिगरेट और तंबाकू से सख्त परहेज भी कर रहे हैं तो भी यह कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं।

सिर और गर्दन के कैंसर का बदलता स्वरूप (Image Source: AI Generated)

सिर और गर्दन के कैंसर का बदलता स्वरूप (Image Source: AI Generated)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पहले सिर और गर्दन के कैंसर को तंबाकू और सिगरेट पीने वालों से जोड़कर देखा जाता था। पर समय के साथ बीमारियों ने अपना स्वरूप बदल दिया है क्योंकि अब ये कैंसर तंबाकू खाने या सिगरेट पीने तक सीमित नहीं रह गए हैं।

बीते कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें मरीजों की उम्र बहुत कम थी और उन्होंने कभी न तो सिगरेट पी थी, न ही तंबाकू का सेवन किया था। इसके बावजूद उनमें कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी देखी गई। यहां यशोदा मेडिसिटी से सर्जिकल ऑन्कोलॉजी - हेड एंड नेक, कंसल्टेंट, डॉ. सुमंत बोलू ने सिर और गर्दन के कैंसर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी है। 

सिर और गर्दन के कैंसर का बदलता स्वरूप 

डॉक्टर का कहना है कि हाल के कुछ सालों में कम उम्र के कैंसर के ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं, जिन्होंने कभी सिगरेट या तंबाकू का सेवन नहीं किया। इसका एक बड़ा कारण बदलती जीवनशैली, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, नींद की कमी और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी हो सकते हैं। युवा अक्सर यह मान लेते हैं कि कैंसर उनकी उम्र की बीमारी नहीं है, इसलिए वे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। 

डॉक्टर का कहना है कि अगर मुंह में कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, आवाज में लगातार बदलाव आए, निगलने में दिक्कत हो या गर्दन में गांठ महसूस हो, तो बिना देरी किए जांच करानी चाहिए। आज जरूरत केवल इलाज की नहीं, बल्कि जागरूकता की भी है। 

कौन सी बुरी आदतें जिम्मेदार? 

इसे लेकर शारदाकेयर - हेल्थसिटी से डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट (क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी), डॉ. अनिल ठकवानी ने बताया है कि हमारी रोजमर्रा की बहुत सी आदतें सिर और गर्दन के कैंसर का कारण बन सकती हैं: 

  • लंबे समय तक खराब मौखिक स्वच्छता

  • दांतों की अनदेखी

  • लगातार होने वाले संक्रमण

  • प्रदूषण के संपर्क और आनुवंशिक कारण 

डॉक्टर अनिल ठकवानी का कहना है कि समस्या तब और बढ़ जाती है जब मरीज महीनों तक मुंह के छाले, जीभ पर सफेद या लाल धब्बे, गले में खराश या गर्दन की सूजन को सामान्य समझकर घरेलू उपचार करते रहते हैं। जब तक वे विशेषज्ञ के पास पहुंचते हैं, तब तक बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है।

इन बातों का रखें ध्यान 

आज सबसे जरूरी है कि लोग अपने शरीर के संकेतों को गंभीरता से लें। नियमित डेंटल चेकअप, अच्छी ओरल हाइजीन, संतुलित जीवनशैली और किसी भी लक्षण के दो सप्ताह से अधिक बने रहने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद आवश्यक है। कम उम्र में बढ़ते मामलों को देखते हुए अब कैंसर की जांच केवल हाई-रिस्क लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि युवाओं में भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।

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