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हर धूम्रपान करने वाले को फेफड़ों का कैंसर क्यों नहीं होता? नए शोध से मिला अहम जवाब

Published: Tue, 28 Jul 2026 08:05 PM (IST)Updated: Tue, 28 Jul 2026 08:10 PM (IST)

एक नए शोध से पता चला है कि हर धूम्रपान करने वाले को फेफड़ों का कैंसर क्यों नहीं होता; व्यक्ति ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है, लेकिन हर धूम्रपान करने वाले को यह बीमारी नहीं होती। वहीं, कई ऐसे लोग भी फेफड़ों के कैंसर का शिकार हो जाते हैं जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी। अब प्रतिष्ठित नेचर जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने इस रहस्य पर नई रोशनी डाली है।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, किसी व्यक्ति को विरासत में मिला जेनेटिक मेकअप (आनुवंशिक बनावट) यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है कि धूम्रपान, धूप या अन्य हानिकारक पदार्थों से डीएनए को हुए नुकसान से शरीर कैसे निपटेगा। यानी एक जैसे जोखिम के बावजूद हर व्यक्ति में कैंसर होने की संभावना समान नहीं होती।

कैंसर केवल संयोग का परिणाम नहीं: प्रो. डंकन

शोध के वरिष्ठ लेखक प्रो. डंकन ओडोम ने कहा कि कैंसर केवल संयोग का परिणाम नहीं होता। अलग-अलग लोगों में ट्यूमर बनने का अंतिम परिणाम भले एक जैसा हो, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता उनके आनुवंशिक गुणों से प्रभावित होता है।

शोध में पहली बार यह स्पष्ट प्रमाण मिला कि जेनेटिक पृष्ठभूमि न केवल डीएनए में होने वाले म्यूटेशन, बल्कि ट्यूमर के विकसित होने की पूरी प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है।

अलग-अलग आनुवंशिक विशेषताओं वाले चूहों पर प्रयोग 

इस अध्ययन के लिए विज्ञानियों ने अलग-अलग आनुवंशिक विशेषताओं वाले चूहों पर नियंत्रित परिस्थितियों में प्रयोग किया। सभी चूहों को समान उम्र में कैंसर पैदा करने वाले रसायन डायथाईलनाइट्रोसामाइन (डीईएन) की समान मात्रा दी गई।

इसके बाद लगभग 600 ट्यूमर के जीनोम का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि सभी में कैंसर बनने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं थी, बल्कि अलग-अलग आनुवंशिक बनावट के कारण डीएनए में बदलाव और ट्यूमर के बढ़ने का तरीका भी अलग था।

कैंसर स्क्रीनिंग और व्यक्तिगत उपचार में नई दिशा

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से भविष्य में कैंसर स्क्रीनिंग और प्रिसिजन मेडिसिन (व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट के अनुसार इलाज) को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। केवल धूम्रपान का इतिहास ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी जोखिम का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि धूम्रपान सुरक्षित है। वैज्ञानिकों के अनुसार, धूम्रपान अब भी फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा और रोका जा सकने वाला कारण है। आनुवंशिक सुरक्षा कुछ लोगों में जोखिम कम कर सकती है, लेकिन तंबाकू से होने वाला खतरा समाप्त नहीं होता।

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