सोने जाते ही याद आने लगती हैं पुरानी बातें, कल की चिंता और अजीब सवाल? ये उपाय दिला सकते हैं राहत
सोने से पहले मन में विचार आने के पीछे एक्टिव डिफॉल्ट मोड नेटवर्क, बॉडी क्लॉक और दैनिक तनाव जैसे कारण हैं।

सोते समय मन में ज्यादा ख्याल आने की बहुत सी वजहें (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर दिनभर काम करने के बाद जब हम थककर सोने जाते हैं, तो नींद आने के बजाय दुनियाभर के ख्याल मन में आने लगते हैं। कल क्या हुआ था, किसने क्या कहा और क्यों कहा, बीते कल की पुरानी यादें तो कभी हिस्ट्री या करंट अफेयर्स से जुड़े सवाल; जिसे आधी रात को सर्च कर लेने के बाद ही हम दम भरते हैं। पर कभी आपने सोचा है कि आखिर ऐसा होता क्यों है और इससे कैसे बचा जा सकता है? आज हम इसके समाधान पर बात करने वाले हैं।
सोते समय मन में ज्यादा ख्याल क्यों आते हैं?
सोते समय सबसे ज्यादा ख्याल आने के लिए कई कारण जिम्मेदार होते हैं:
एक्टिव डिफॉल्ट मोड नेटवर्क
दिन के समय में हमारा दिमाग बहुत से कामों में उलझा होता है, आसपास बहुत सी आवाजें और शोर दिमाग को सोचने का समय ही नहीं देते। वहीं, सोते समय अंधेरा और सन्नाटा तो हो जाता है लेकिन दिमाग अभी भी काम कर रहा होता है।
अब दिमाग के पास करने को कुछ नहीं है, इससे वह पुरानी चीजों को कुरेदना शुरू कर देता है। इस स्थिति को न्यूरोसाइंस में "डिफॉल्ट मोड नेटवर्क" नाम देते हैं। दरअसल, यह दिमाग के उस हिस्से से जुड़ा हुआ है जो तब एक्टिव हो जाता है, जब हम कोई शारीरिक या दिमागी काम नहीं कर रहे होते।
बॉडी क्लॉक
हमारे शरीर में एक 24 घंटे काम करने वाली घड़ी होती है, जो हमारी आदतों के हिसाब से सोने और उठने का समय तय करती है। रात में सोते समय शरीर मेलाटोनिन का उत्पादन बढ़ा देता है और कोर्टिसोल का लेवल कम कर देता है। ऐसे में जिन भावनाओं को हम दिन में संभाल सकते थे, उन्हें रात में संभालना मुश्किल हो जाता है।
रोजाना का स्ट्रेस
अगर व्यक्ति लगातार स्ट्रेस से गुजर रहा है, तो ऐसी स्थिति में वह क्रोनिक स्ट्रेस में चला जाता है। फिर सोते समय भी कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन लेवल कम नहीं होता, इससे दिमाग में पुरानी और अनुभव घूमने लगते हैं।
कैसे करें कंट्रोल?
डायफ्राम यानी पेट के बीच के हिस्से से धीरे-धीरे सांस लेना शुरू करें। ऐसा करने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिवेट होता है, जो दिमाग के फाइट एंड फ्लाइट मोड के बिल्कुल उलट काम करता है।
दिमाग में ख्याल आने लगें तो दिमाग को शफल करने की प्रैक्टिस करें, जैसे- किसी शब्द के बारे में सोचना या अजीब सी तस्वीर इमेजिन करना।
सोने से पहले स्ट्रेस से जुड़ी बातों को पेपर पर उतारकर मन को हल्का करें।
रोजाना 10-15 मिनट सोने से पहले मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग की प्रैक्टिस करें।
कमरे में अंधेरा रखें और बेड पर सोने के अलावा सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या प्रोजेक्ट बनाने से जुड़े काम न करें।
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Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो, तो हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।
