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    Pilates vs Yoga: पिलाटेस और योगा में क्या है फर्क? क्या इसके फायदे भी हैं अलग?

    By Ruhee ParvezEdited By:
    Updated: Tue, 23 Aug 2022 05:59 PM (IST)

    Pilates vs Yoga आजकल आपके पास वर्कआउट करने के कई विकल्प हैं। आप रनिंग से लेकर कार्डियो और योग से लेकर पिलाटेस तक कर सकते हैं। हालांकि इन सभी तरह के वर्कआउट का असर कुछ अलग तरह से पड़ता है।

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    Pilates vs Yoga: योग और पिलाटेस किस तरह अलग हैं?

    नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Pilates vs Yoga: आज हमारे पास एक्सरसाइज़ के कई विकल्प हैं। यही वजह है कि हम सभी कुछ ट्राई करने के लिए एक्साइटेड रहते हैं। हालांकि, ज़रूरी नहीं कि आपको सभी तरह के वर्कआउट सूट करें, क्योंकि हर तरह के व्यायाम का असर आपके शरीर पर अलग तरह से पड़ता है। साथ ही यह भी ज़रूरी है कि आप वर्कआउट को एंजॉय करें। हो सकता है कि आपको कार्डियो ज़्यादा पसंद आता हो और योग नहीं।

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    जिस तरह कार्डियो और योग अलग हैं, उसी तरह पिलाटेस और योग भी काफी अलग तरह की एक्सरसाइज़ हैं। इन दोनों तरह की एक्सरसाइज़ की इंटेंसिटी कम होती है, लेकिन फायदे कई और अलग-अलग हैं। लेकिन एक बात है कि इन दोनों से ही आपकी सेहत को फायदे पहुंच सकते हैं। तो आइए जानें योग और पिलाटेस के फायदों में क्या फर्क है।

    पिलाटेस के फायदे

    पिलाटेस करने से मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन बढ़ता है। इसके नियमित अभ्यास से पॉस्शचर बेहतर होता है और मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द कम हो सकता है। एक्सरसाइज़ का यह रूप मुख्य रूप से शरीर की छोटी-छोटी गतिविधियों पर फोकस करता है। पिलाटेस को मैट के अलावा इक्विपमेंट पर भी किया जा सकता है। ये उपकरण स्प्रिंग्स, और लीवर का उपयोग करके बनाए जाते हैं, और यह आपके शरीर का उपयोग इसे प्रतिरोध देने के लिए करता है। अगर आप गठिया, सांस की स्थिति, जोड़ों की चोट और पीठ दर्द से पीड़ित हैं, तो पिलाटेस आपकी मदद कर सकता है।

    योग के फायदे क्या हैं?

    योग कई तरह के होता है, इसे करने के कई तरीके भी हैं। योग के लिए आपको मैट चाहिए और उपकरण की ज़रूरत नहीं पड़ती। हालांकि, कुछ लोग ब्रिक्स और रेज़िस्टेंस बैंड का उपयोग करते हैं। सांस लेना और ध्यान योग के दो सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसी कई बीमारियां और स्वास्थ्य स्थितियां हैं, जिनका पता अगर समय से चल जाए, तो योग की मदद से इन्हें ठीक किया जा सकता है। यह शारीरिक गतिविधि और दिमागी फोकस को जोड़ता है। योग के अभ्यास से सांस और ऊर्जा के बारे में भी जागरूकता बढ़ा सकती है। योग बेचैनी, आर्थराइटिस, सांस से जुड़ी दिक्कतों, हाई ब्लड प्रेशर, क्रोनिक दर्द और कई तरह के स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतों में मददगार साबित हो सकता है।

    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

    Picture Courtesy: Freepik