Katrina Kaif के पोस्ट-प्रेग्नेंसी लुक पर छिड़ी बहस! समझें डिलीवरी के बाद क्यों आसान नहीं होता वजन कम करना
कटरीना कैफ के पोस्ट-प्रेग्नेंसी लुक पर छिड़ी बहस के बाद यह सवाल उठा है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं पर जल्द परफेक्ट फिगर में आने का दबाव कितना सही है।

कटरीना कैफ के पोस्ट-प्रेग्नेंसी लुक पर सवाल उठाने वालों को समझनी चाहिए ये बात (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस कटरीना कैफ (Katrina Kaif) के पोस्ट-प्रेग्नेंसी लुक को लेकर सोशल मीडिया पर काफी टीका-टिप्पणी की गई। जी हां, इस घटना ने एक बेहद गंभीर बहस छेड़ दी है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं पर जल्द से जल्द परफेक्ट फिगर में लौटने का दबाव आखिर कितना सही है?
सच तो यह है कि सिर्फ सेलिब्रिटीज ही नहीं, बल्कि हमारे और आपके घरों की आम महिलाओं को भी मां बनने के बाद वजन घटाने और पुराने कपड़ों में फिट होने के लिए अक्सर ताने और दबाव झेलने पड़ते हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस की मानें तो डिलीवरी के तुरंत बाद शरीर का पहले जैसा हो जाना न तो जरूरी है और न ही हर महिला के लिए मुमकिन। आइए समझते हैं क्यों।
प्रेग्नेंसी के बाद शरीर में क्यों होते हैं बदलाव?
प्रेग्नेंसी के 9 महीनों के दौरान एक महिला के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है, गर्भाशय का आकार बढ़ता है और ब्रेस्ट में भी बदलाव आते हैं। इसके साथ ही पेट की मांसपेशियों और पेल्विक फ्लोर पर भारी दबाव पड़ता है।
डिलीवरी के बाद शरीर को इन तमाम बदलावों से वापस अपनी पुरानी स्थिति में लौटने में समय लगता है। गर्भाशय का सिकुड़ना, हार्मोन का संतुलन बनना और पेट की मांसपेशियों का अपनी ताकत वापस पाना, यह सब एक रातों-रात होने वाली प्रक्रिया नहीं है। जी हां, यह कोई रेस नहीं है, बल्कि एक नेचुरल प्रोसेस है, जिसकी रफ्तार हर महिला के लिए अलग होती है।
वजन कम होने में क्यों लगता है महीनों का समय?
बच्चे के जन्म के तुरंत बाद थोड़ा वजन जरूर कम होता है, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा हुआ बाकी वजन घटने में कई महीने लग सकते हैं। इसके पीछे सिर्फ खानपान या कसरत की कमी नहीं है।
- हार्मोन और नींद: डिलीवरी के बाद के हार्मोनल बदलाव भूख और शरीर में फैट के जमाव को प्रभावित करते हैं। ऊपर से नवजात बच्चे की देखभाल में रातों की नींद उड़ जाती है। इस थकान के कारण रेगुलर एक्सरसाइज करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
- ब्रेस्टफीडिंग का भ्रम: यह सोचना गलत है कि ब्रेस्टफीडिंग कराने से तेजी से वजन कम होता है। स्तनपान कराने वाली मां को ज्यादा ऊर्जा और पोषण की जरूरत होती है। कुछ महिलाओं का वजन इस दौरान घटता है, तो कुछ का स्थिर रहता है।
- बॉडी फिगर: वजन कम होने के बाद भी यह जरूरी नहीं कि शरीर बिल्कुल पहले जैसा दिखे। पेट की त्वचा का ढीलापन और मांसपेशियों का खिंचाव लंबे समय तक बना रह सकता है।
सिर्फ वजन घटाना नहीं है रिकवरी का मतलब
एक नई मां के सेहत को सिर्फ इंच-टेप या वजन तौलने वाली मशीन से नहीं मापा जा सकता। असली रिकवरी का मतलब है कि महिला की शारीरिक ताकत, ऊर्जा, चलने-फिरने की क्षमता और मानसिक स्थिति में सुधार हो रहा है या नहीं।
अगर डिलीवरी नॉर्मल हुई है, तो डॉक्टर की सलाह से हल्की चहलकदमी शुरू की जा सकती है। हालांकि, भारी वर्कआउट या जिम जाने से पहले डॉक्टर से पूछना बेहद जरूरी है, खासकर तब जब डिलीवरी सिजेरियन से हुई हो। इस दौरान शरीर को एक बैलेंस डाइट की जरूरत होती है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स और हेल्दी फैट शामिल हो। तेजी से वजन घटाने के लिए भूखे रहना या डाइटिंग करना नई मां और बच्चे, दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बॉडी शेमिंग का मेंटल हेल्थ पर पड़ता है सीधा असर
एक नई मां पहले ही रातों की नींद की कमी, बच्चे को दूध पिलाने और नई जिम्मेदारियों के बोझ से शारीरिक और मानसिक तौर पर थक चुकी होती है। ऐसे में, जब उसके वजन या शरीर को लेकर बार-बार टिप्पणियां की जाती हैं, तो उसका आत्मविश्वास टूट सकता है। इससे तनाव और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
इस नाजुक समय में पति और परिवार की भूमिका सबसे अहम होती है। नई मां के शरीर पर तंज कसने के बजाय बच्चे की देखभाल में हाथ बंटाना, उन्हें आराम करने का समय देना और अच्छा खाना देना ज्यादा जरूरी है।
सोशल मीडिया का 'परफेक्ट पोस्टपार्टम बॉडी' वाला झूठ
आजकल सोशल मीडिया पर ऐसी कई तस्वीरें दिखती हैं जिनमें महिलाएं डिलीवरी के कुछ ही हफ्तों बाद एकदम फिट नजर आती हैं। ये तस्वीरें एक झूठ और दबाव पैदा करती हैं। इन तस्वीरों के पीछे यह नहीं दिखता कि उस महिला को कितनी नींद मिल रही है या उसे घर में कितना सपोर्ट मिल रहा है।
सेलिब्रिटीज के पास पर्सनल ट्रेनर, डाइटिशियन और घरेलू मदद की पूरी फौज होती है, जो आम महिलाओं के पास नहीं होती। इसलिए उनके शरीर को आम महिलाओं के लिए एक स्टैंडर्ड मान लेना बिल्कुल गलत है।
क्या होना चाहिए हमारा नजरिया?
डिलीवरी के बाद हर महिला की रिकवरी का प्लान उसकी अपनी शारीरिक जरूरत के हिसाब से होना चाहिए। महिलाओं को खुद भी यह समझना होगा कि उनके शरीर में आए बदलाव उनकी कोई नाकामी नहीं हैं, बल्कि एक नए जीवन को जन्म देने का खूबसूरत निशान हैं।
(डॉ. मीनाक्षी सभरवाल, नई दिल्ली स्थित जीवन अस्पताल में गायनेकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स विभाग की प्रमुख हैं)
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