कंसीव करना मुश्किल बना रहा है तनाव? महिलाओं का हार्मोनल बैलेंस सुधारने के लिए वरदान है ये 60 मिनट का रूटीन
मानसिक तनाव और अवसाद के चलते शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे गर्भधारण की जटिलता बढ़ जाती है।

हठयोग से दूर होगा हार्मोनल इंबैलेंस (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लगातार तनाव बने रहने के कारण हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, जिससे महिलाओं को गर्भधारण, मासिक अनियमितता, थकान जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ता है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित सातवीं राष्ट्रमंडल परिचारिका एवं प्रसूति विद्या महासंघ की संगोष्ठी में एक महत्वपूर्ण शोध पत्र को प्रस्तुत किया गया, जिसे चिकित्सा जगत में काफी सराहना मिली है।
दरअसल, गर्भधारण की चुनौती से जूझ रही महिलाओं को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) का नया शोध उम्मीद की किरण दिखने वाला है। संस्थान के चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के इस अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि हठयोग के नियमित अभ्यास से महिलाओं में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद के स्तर में 41 प्रतिशत तक की गिरावट आती है। इससे शरीर के हार्मोन संतुलित होते हैं और गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।
तनाव दूर होते ही सुधरता है हार्मोनल तंत्र
संस्थान के मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य विभाग की विशेषज्ञ प्रो. डाक्टर इंदुलता साहू के अनुसार, गर्भधारण न हो पाने की राह में मानसिक तनाव और अवसाद सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़े होते हैं। जब शरीर में तनाव बढ़ता है, तो कार्टिसोल नामक रसायन का स्राव बढ़ जाता है।
इसका सीधा असर महिला के अंडाशय पर पड़ता है, जिससे अंडा बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होती है और भ्रूण को गर्भाशय में स्थापित होने में कठिनाई आती है। हठयोग से मानसिक दबाव घटता है, जिससे शरीर में प्राकृतिक संतुलन बहाल होता है।
अध्ययन के आंकड़े और उसके असर
शोधकर्ताओं ने बांझपन परामर्श केंद्र में उपचार करा रही महिलाओं पर यह अध्ययन किया। महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य का आकलन करने के बाद उन्हें लगातार दो सप्ताह तक प्रतिदिन 60 मिनट तक हठयोग के आसनों, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया गया। इसके बाद परिणामों में असाधारण सुधार देखने को मिले-
- चिंता का स्तर- 41.3 प्रतिशत तक घटा
- अवसाद का स्तर- 35.3 प्रतिशत तक कम हुआ
- मानसिक तनाव- 30.3 प्रतिशत तक नियंत्रित हुआ
दैनिक दिनचर्या में कैसे अपनाएं हठयोग - 60 मिनट की संपूर्ण विधि
योगाचार्य डा. सत्यराम के अनुसार, हठयोग चंद्र और सूर्य दोनों प्रकार की शारीरिक ऊर्जाओं में संतुलन स्थापित करता है। इसमें शरीर के आसन, श्वास प्रक्रिया और ध्यान को एक साथ जोड़ा जाता है, जिससे हार्मोनल तंत्र और मानसिक स्थिति दोनों सुधरती हैं। शोध में इसी कारण प्रतिदिन 60 मिनट की निम्नलिखित कार्यप्रणाली अपनाई गई थी-
प्रारंभिक तैयारी व शरीर का वार्म-अप (पांच मिनट)
- तैयारी- सुबह खाली पेट, स्वच्छ और हवादार स्थान पर चटाई बिछाएं। ढीले सूती वस्त्र पहनें।
- प्रक्रिया- गर्दन, कंधों और कमर को हल्के-हल्के गोल घुमाएं। हाथ-पैरों को हल्का झटका दें ताकि मांसपेशियां खुल जाएं।
योगासन (30 मिनट)
- हर आसन में 20 से 30 सेकंड तक रुकें और सामान्य सांस लेते रहें।
- भद्रासन (तितली आसन)- श्रोणि क्षेत्र (पेल्विक हिस्से) में रक्त का प्रवाह तेज करता है।
- भुजंगासन- गर्भाशय और प्रजनन अंगों की कार्यप्रणाली को सक्रिय करता है।
- सेतुबंधासन- थायराइड ग्रंथि को संतुलित कर मानसिक दबाव घटाता है।
- विपरीत करणी- दीवार के सहारे पैरों को ऊपर उठाकर आराम की मुद्रा में रहें, यह शरीर को पूर्ण विश्राम देता है।
प्राणायाम (15 मिनट)
- अनुलोम-विलोम (पांच मिनट)- नाड़ी शुद्धि करता है और तनाव वाले रसायनों को नियंत्रित करता है।
- भ्रामरी (पांच मिनट)- आंखें बंद करके भौंरे की तरह गुंजन करें। यह चिंता को तुरंत शांत करता है।
- दीर्घ श्वसन (पांच मिनट)- धीरे-धीरे गहरी सांस लें और छोड़ें।
ध्यान और विश्राम (10 मिनट)
- ध्यान (आठ मिनट)- पालथी मारकर बैठें, आंखें बंद करें और अपनी सांसों के आने-जाने पर ध्यान केंद्रित करें।
- शवासन (दो मिनट)- अंत में पीठ के बल लेटकर पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें और विश्राम करें।
अनुसंधान दल-
इस अध्ययन को नर्सिंग महाविद्यालय की मुख्य शोधकर्ता भूमिका सिंह, प्राचार्या डॉ. राधा के., सह-शोधकर्ता एलिस जोसेफ, मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य विभाग के परामर्शदाता प्रो. अमृत गुप्ता व प्रो. डॉक्टर इंदुलता साहू तथा स्नातक छात्र आकाश भारती, मुसाफिर अली और युक्ता यादव की टीम ने मिलकर पूरा किया है।
