कंसीव करने में आ रही है दिक्कत? एक्सपर्ट से जानें इनफर्टिलिटी के वो छिपे कारण जिन पर अक्सर नहीं जाता ध्यान
इनफर्टिलिटी के पीछे कई छिपे कारण हो सकते हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता, जैसे हार्मोनल असंतुलन, पुरुषों से जुड़े फैक्टर और लाइफस्टाइल का असर।

किन वजहों से हो सकती है इनफर्टिलिटी? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इनफर्टिलिटी आज एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिससे दुनियाभर में लाखों लोग जूझ रहे हैं। इनफर्टिलिटी की समस्या तब होती है, जब कोई कपल एक साल से कंसीव करने की कोशिश करे, लेकिन प्रेग्नेंसी न हो पाए या महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा होने पर कोशिश करने के बावजूद 6 महीने तक कंसीव न कर पाना।
आमतौर पर हम इनफर्टिलिटी से जुड़े आम कारणों पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार इसके पीछे कुछ छिपी हुई वजहें हो सकती हैं, जिनकी पहचान करके सही इलाज करवाया जा सकता है। आइए इन कारणों के बारे में डॉ. आस्था गुप्ता (सीनियर आईवीएफ कंसल्टेंट एंड इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, दिल्ली आईवीएफ) से जानते हैं।
हार्मोन्स से जुड़ी गड़बड़ियां
कई बार हार्मोन्स से जुड़ी समस्याएं बिना किसी लक्षण के फर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं, जैसे- थायरॉइड डिसऑर्डर या पीसीओएस। थॉयरॉइड ग्लैंड का जरूरत से ज्यादा या कम एक्टिव होना, महिलाओं में ओव्यूलेशन और पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित करता है।
महिलाओं में पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जैसी स्थिति भी फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। इसके अलावा, डायबिटीज औ मोटापे की वजह से भी कंसीव करने में परेशानी हो सकती है।
पुरुषों से जुड़े कारण
कपल्स में इनफर्टिलिटी के पीछे पुरुषों से जुड़े कारण भी हो सकते हैं। स्पर्म काउंट कम होना, स्पर्म मोटिलिटी कम होना, स्पर्म का आकार सही न होना या फिर वेरीकोसेल जैसे कारण बिना जांच के सामने नहीं आते। इसलिए इनफर्टिलिटी के मामलों में सिर्फ महिलाओं की जांच करवाना काफी नहीं है।
लाइफस्टाइल और पर्यावरण का असर
रोजमर्रा की आदतों का भी फर्टिलिटी पर गहरा असर पड़ता है। स्मोकिंग, शराब पीना, नशा करना, लगातार स्ट्रेस में रहना, नींद की कमी और एक्सरसाइज न करने जैसी आदतें भी फर्टिलिटी कम करती हैं। इसके अलावा, पेस्टिसाइड्स, हैवी मेटल्स, टॉक्सिक पार्टिकल्स और ज्यादा गर्मी की वजह से भी फर्टिलिटी प्रभावित होती है।
उम्र का असर
महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस, किसी इन्फेक्शन के कारण फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होना या ओवेरियन रिजर्व कम होना ऐसे कारण हैं, जिनके कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन इनके कारण फर्टिलिटी कम हो सकती है। इसके अलावा, एसटीआई का इलाज न करवाना भी फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या का कारण बन सकता है।
साथ ही, बढ़ती उम्र भी एक बड़ा फैक्टर है। 35 की उम्र के बाद महिलाओं की फर्टिलिटी तेजी से घटती है, वहीं पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ स्पर्म क्वालिटी कम होने और जेनेटिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
इलाज मुमकिन है
अगर आप इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो घबराएं नहीं। बिना देर किए फर्टिलिटी एक्सपर्ट से संपर्क करें। सही इलाज से माता-पिता बनने का सपना पूरा हो सकता है।
