विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

2030 तक भारत में विकराल रूप लेगा फेफड़ों का कैंसर, नॉन-स्मोकर्स भी 'हाई रिस्क' पर; स्टडी में खुलासा

Published: Fri, 09 Jan 2026 12:02 PM (IST)

भारत में फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) का खतरा आने वाले वर्षों में बेहद गंभीर रूप लेने वाला है। इंडियन ...और पढ़ें

2030 तक तेजी से बढ़ेगा लंग कैंसर का खतरा (Image Source: AI-Generated)

2030 तक तेजी से बढ़ेगा लंग कैंसर का खतरा (Image Source: AI-Generated) 

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप यह सोचते हैं कि सिगरेट या तंबाकू से दूर रहने पर फेफड़ों का कैंसर आपको छू भी नहीं सकता? अगर हां, तो यह खबर आपकी चिंता बढ़ा सकती है। एक नए और चौंकाने वाले अध्ययन ने भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। दरअसल, इसमें बताया गया है कि साल 2030 तक देश में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है।

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह जानलेवा बीमारी अब अपना तरीका बदल रही है। सबसे डराने वाली बात यह है कि इसका शिकार अब केवल पुरुष या धूम्रपान करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि महिलाएं और नॉन-स्मोकर्स भी बड़ी तेजी से हो रहे हैं।

lung cancer risk

(Image Source: AI-Generated) 

पूर्वोत्तर भारत पर सबसे बड़ा खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां आइजोल में कैंसर का बोझ सबसे ज्यादा पाया गया है।

  • पूर्वोत्तर में महिलाओं में कैंसर की दर पुरुषों के लगभग बराबर पहुंच गई है, जो भारत के लिए एक असामान्य पैटर्न है।
  • यहां तंबाकू का उपयोग भी बहुत अधिक है- पुरुषों में 68% और महिलाओं में 54%, जो इस बीमारी का मुख्य कारण बना हुआ है।

नॉन-स्मोकर्स को भी हो रहा है कैंसर

स्टडी में सामने आया कि अब ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जहां धूम्रपान न करने वाली महिलाएं भी फेफड़ों के कैंसर का शिकार हो रही हैं। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

  • घर के अंदर का वायु प्रदूषण
  • खाना पकाने के लिए बायोमास ईंधन (लकड़ी, उपले आदि) का इस्तेमाल
  • सेकेंड-हैंड स्मोक (दूसरों के धूम्रपान का धुआं)
  • कामकाजी जगहों पर प्रदूषण का संपर्क

बदल रहा है कैंसर का स्वरूप

देशभर में ट्यूमर के प्रकार में भी बदलाव देखा गया है। अब 'स्क्वैमस-सेल कार्सिनोमा' (जो अक्सर धूम्रपान से जुड़ा होता है) की जगह 'एडेनोकार्सिनोमा' ने ले ली है।

  • बेंगलुरु: यहां महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के आधे से ज्यादा मामले अब एडेनोकार्सिनोमा के ही हैं।
  • दिल्ली: देश की राजधानी में 'लार्ज-सेल कार्सिनोमा' के मामलों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है।

उत्तर और दक्षिण भारत की स्थिति

हैरानी की बात यह है कि दक्षिण भारत के कुछ जिलों (जैसे कन्नूर, कासरगोड और कोल्लम) में तंबाकू और शराब का कम सेवन होने के बावजूद पुरुषों में कैंसर की दर ऊंची है। यह इशारा करता है कि तंबाकू के अलावा अन्य जोखिम कारक भी सक्रिय हैं।

दक्षिण में महिलाओं के बीच हैदराबाद और बेंगलुरु में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं।

उत्तर भारत में, श्रीनगर में पुरुषों में कैंसर की दर अधिक पाई गई, जबकि श्रीनगर और पुलवामा में कम नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के बावजूद महिलाओं में भी मामले बढ़े हैं।

महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा

आंकड़े बताते हैं कि कुछ क्षेत्रों में महिलाओं में कैंसर के मामले 6.7% सालाना की दर से बढ़ रहे हैं, जबकि पुरुषों में यह बढ़ोतरी 4.3% है। तिरुवनंतपुरम में महिलाओं के मामलों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि डिंडीगुल में पुरुषों के मामलों में सबसे ज्यादा उछाल आया है। चूंकि देशभर में महिलाओं में तंबाकू का उपयोग 10% से भी कम है, शोधकर्ता इसके लिए खराब हवा और घरेलू प्रदूषण को जिम्मेदार मान रहे हैं।

2030 की डरावनी तस्वीर

अनुमान है कि 2030 तक:

  • केरल के कुछ हिस्सों में पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की दर प्रति लाख आबादी पर 33 से ज्यादा हो सकती है।
  • बेंगलुरु जैसे शहरों में महिलाओं के लिए यह दर 8 प्रति लाख तक बढ़ सकती है।

अध्ययन में यह भी पाया गया है कि कई क्षेत्रों में मौतों की रिपोर्टिंग सही से नहीं हो रही है, जिससे इस बीमारी से होने वाली असली तबाही का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है।

Source: Indian Journal of Medical Research

यह भी पढ़ें- जहरीली हवा बढ़ा रही है लंग कैंसर का खतरा, इन 8 लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

यह भी पढ़ें- लंग कैंसर की शुरुआत हो सकते हैं ये 4 लक्षण, डॉक्टर ने बताया फेफड़ों पर कैसे असर डालता है प्रदूषण