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    Blood Pressure को करना चाहते हैं कंट्रोल, तो इन 5 चीजों का सेवन करें

    By Umanath SinghEdited By:
    Updated: Fri, 11 Dec 2020 05:27 PM (IST)

    सामान्यतः 140/90 से ऊपर के रक्तचाप को हाइपरटेंशन कहा जाता है। जबकि 180/120 से ऊपर के दबाव को खतरनाक माना जाता है। उच्च रक्तचाप का कोई लक्षण नहीं होता। अगर इलाज में कोताही बरतते हैं तो इससे हृदयरोग और स्ट्रोक हो सकते हैं।

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    अर्जुन की छाल को रक्त चाप नियंत्रित करने वाले औषधि के रूप में जाना जाता है।

    नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। उच्च रक्त चाप अथवा हाइपरटेंशन एक सामान्य समस्या है, जिससे 30 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष और महिलाएं दोनों प्रभावित होते हैं। हाल के वर्षों में हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या में बड़ी तेजी से इजाफा हो रहा है। आंकड़ों की मानें तो देश में हाइपरटेंशन के तकरीबन 20 करोड़ मरीज हैं। इनमें 2 करोड़ लोग उच्च रक्त चाप को कंट्रोल में रखते हैं। इसके अतिरिक्त 18 करोड़ लोग हाइपरटेंशन को गंभीरता से नहीं लेते हैं। वहीं, अधिकांश लोगों को उच्च रक्त चाप के बारे में पता नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो 30 साल से अधिक उम्र के लोगों को नियमित रूप से उच्च रक्त चाप की जांच करानी चाहिए। सामान्यतः 140/90 से ऊपर के रक्तचाप को हाइपरटेंशन कहा जाता है। जबकि, 180/120 से ऊपर के दबाव को खतरनाक माना जाता है। उच्च रक्तचाप का कोई लक्षण नहीं होता। अगर इलाज में कोताही बरतते हैं, तो इससे हृदयरोग और स्ट्रोक हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त रक्त चाप को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेद का भी सहारा ले सकते हैं। इसके लिए आप इन 5 चीज़ों को जरूर सेवन करें। इनके सेवन से रक्त चाप नियंत्रित रहता है-

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    अर्जुन की छाल

    अर्जुन की छाल में एंटी-हाइपरटेंशिव गुण पाए जाते हैं। अर्जुन की छाल को रक्त चाप नियंत्रित करने वाले औषधि के रूप में जाना जाता है। इसके अतिरिक्त अर्जुन की छाल में एंटीप्लेटलेट, एंटी-इस्किमिक, एंटीऑक्सीडेंट, इनोट्रोपिक समेत कई अन्य गुण भी पाए जाते हैं। आमतौर पर अर्जुन की छाल पाउडर रूप में ही पाया जाता है। इसे सुबह खाली पेट सेवन करने से रक्त चाप नियंत्रित रहता है।

    त्रिफला

    त्रिफला हरीतकी, आंवला और बिभीतक से मिलकर बना होता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करता है। रोजाना दो चम्मच त्रिफला चूर्ण खाने से रक्त चाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है।

    आंवला

    आंवले को सर्दियों का फल कहा जाता है। डॉक्टर्स रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए रोजाना खाली पेट एक आंवला खाने की सलाह देते हैं। अगर आंवले का फल उपलब्ध नहीं है, तो आंवला का जूस भी ले सकते हैं।

    तुलसी

    तुलसी के पत्तों में युजिनॉल पाया जाता है जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है। युजिनॉल प्राकृतिक कैल्शियम चैनल अवरोधक के रूप में जाना जाता है जो दिल और धमनियों में कैल्शियम के प्रवाह को कम करता है। तुलसी के पत्तों की चाय पीने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।

    अश्वगंधा

    तनाव रक्तचाप का प्रमुख कारण है। वहीं, रक्तचाप समेत तनाव को दूर करने में अश्वगंधा अहम भूमिका निभा सकता है। इसमें शांताकारी प्रभाव पाया जाता है जो चिंता और तनाव का डटकर मुकाबला करता है। अश्वगंधा के सेवन से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। रोजाना सुबह में खाली पेट एक गिलास गुनगुना गर्म पानी में एक चम्मच अश्वगंधा पाउडर मिलाकर सेवन करने से रक्त चाप नियंत्रित रहता है।

    डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।