'सिर्फ महिलाओं की बीमारी है' अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो सावधान! पुरुषों को भी शिकार बनाता है ऑस्टियोपोरोसिस
पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस की अनदेखी खतरनाक साबित हो सकती है। इस बीमारी को अक्सर महिलाओं की बीमारी मानी जाती है।

पुरुषों में भी होता है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब भी ऑस्टियोपोरोसिस की बात आती है, तो ज्यादातर लोग इसे केवल महिलाओं, खासकर मेनोपॉज के बाद की समस्या मान लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये बीमारी पुरुषों को भी उतनी ही तेजी से अपनी चपेट में ले सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस पुरुषों की भी हड्डियां कमजोर करता है, जिससे फ्रैक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है।
इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात है कि ये धीरे-धीरे पनपती है और शुरुआत में इसके कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते। यहीं वजह है कि कई पुरुषों को भी मामलू चोट या गिरने से फ्रैक्चर हो सकता है और उसके पहले तक इस बीमारी का पता ही नहीं चलता।
पुरुषों में क्यों अनदेखी हो जाती है इस बीमारी की?
पुरुषों में इस बीमारी के नजरअंदाज होने का सबसे बड़ा कारण ये सोचना है कि पुरुषों की हड्डियां स्वाभाविक रूप से मजबूत होती है कि उम्र के साथ उनकी डेंसिटी कम नहीं होती। हालांकि, ये सच है कि पुरुषों में भी हड्डियों की डेंसिटी महिलाओं से ज्यादा होती है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ ये कम होने लगती है।
बढ़ती उम्र के अलावा, शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने से भी हड्डियों की डेंसिटी पर असर पड़ता है। खाने में कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, फिजिकल इनएक्टिविटी, स्मोकिंग और शराब भी हड्डियों की सेहत पर असर डालते हैं।
कुछ स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे- थायरॉइड डिसऑर्डर, क्रोनिक किडनी डिजीज और लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवाओं का इस्तेमाल से भी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
किसे रहना चाहिए ज्यादा सतर्क?
50 साल से ज्यादा उम्र के पुरुषों को अपनी हड्डियों को लेकर खास सतर्क रहना चाहिए। अगर पहले कभी कैंसर हुआ हो, परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास रहा हो या कोई रिस्क फैक्टर मौजूद हो, तो और ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है।
बचाव ही है इलाज
- अपनी डाइट में कैल्शियम से भरपूर चीजों को शामिल करें।
- विटामिन-डी की कमी पर ध्यान दें।
- वेट बियरिंग एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज करें।
- समय-समय पर डॉक्टर से सलाह लें। समय रहते इसकी पहचान करके फ्रैक्चर के खतरे को कम किया जा सकता है।
- स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाएं और अगर इनकी आदत है, तो इन्हें छोड़ने की कोशिश करें।
(डॉ. अखिलेश यादव, डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइन्ट रिप्लेसमेंट, मैक्स सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, वैशाली)
