नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। IVF & Twin Pregnancy: हाल ही में पॉपुलर अमेरिकी सोशलाइट पेरिस हिल्टन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो जुड़वा बच्चों, एक लड़का और एक लड़की की चाहत रखती हैं, इसलिए IVF ट्रीटमेंट शुरू करने वाली हैं। जिसके बाद उन्हें दुनिया भर के निःसंतान दंपतियों के प्रति असंवेदनशीलता के लिए सोशल मीडिया पर लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा रहा है। आपको बता दें कि IVF ट्रीटमेंट बेहद महंगा होता है, जिसे हर कोई नहीं करा सकता।  

आईवीएफ आमतौर पर उन जोड़ों के लिए मददगार होता है, जो किसी मेडिकल वजह से मां-बाप बन पाने में असमर्थ होते हैं। ऐसे में क्या सिर्फ जुड़वा बच्चों की चाहत के लिए आईवीएफ करवाना सही है? आइए जानें कि IVF एक्सपर्ट्स इस बारे में क्या राय रखते हैं।

डॉ. मनीष बंकर (नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी के मेडिकल डायरेक्टर) का कहना है कि "आईवीएफ एक ऐसा ट्रीटमेंट है जिसके ज़रिए नि:संतान दंपत्ति बच्चा पैदा कर पाने में सक्षम होते हैं। यह गर्भधारण करने का एक तरीका है न कि जुड़वा बच्चे पैदा करने का। इस ट्रीटमेंट को उन दंपत्तियों को ऑफर किया जाता है, जो किसी मेडिकल कंडीशन की वजह से मां-बाप बन पाने में सक्षम नहीं होते हैं। जो लोग आईवीएफ ट्रीटमेंट कराते हैं, उनमे जुड़वां बच्चे होने का चांस ज़्यादा हो जाता है क्योंकि कई बार उनमें एक से ज्यादा भ्रूण को ट्रांसफर किया जाता है।" 

"यह सब जानते हैं कि आईवीएफ के साथ सामान्य रूप से जुड़वा गर्भावस्था मां और बच्चों दोनों के लिए ज़्यादा ख़तरा पैदा करती है। इसलिए कई देशों में ऐसे कानून / दिशा-निर्देश हैं, जो विशेष परिस्थितियों को छोड़कर एक भ्रूण को ही ट्रांसफर करने का आदेश देते हैं। जैसे-जैसे दुनिया आगे बढ़ रही है, आईवीएफ सफलता की दर अब एक आईवीएफ साइकल के बाद बच्चे के जन्म देने का जरिया बनती जा रही है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आईवीएफ से जुड़वां होते हैं, इस बात की कोई गारंटी नहीं होती है। यहां तक कि अगर आपने दो भ्रूण भी ट्रांसफर कराए हैं, तो भी जुड़वा बच्चे होने की केवल 40% संभावना होती है। इसके अलावा बिना किसी मेडिकल सलाह के आईवीएफ कराने से मां की जान को ख़तरा होता है। हालांकि, बिना बेहतर मेडिकल सलाह के आईवीएफ कराना सही फैसला नहीं होता है।"

डॉ. रेनू मिश्रा (मिराकल्स फर्टिलिटी & आईवीएफ, गुरुग्राम के डिपार्टमेंट हेड) ने कहा, "आईवीएफ इनफर्टिलिटी (बांझपन) बीमारी का ट्रीटमेंट है। इससे आप अपने मनमुताबिक और डिज़ाइनर बच्चे नहीं पैदा कर सकते हैं। जुड़वां प्रेगनेंसी में कॉम्प्लिकेशन होने की दर ज़्यादा होती है। इसलिए गर्भावस्था को धारण कराने के लिए हम जो भी ट्रीटमेंट करते हैं, उसमें हमारा लक्ष्य होता है कि हम हमेशा सिंगल प्रेगनेंसी करें। चिकित्सीय रूप से आईवीएफ का मकसद जुड़वां बच्चे पैदा करने का नहीं होता है। आईवीएफ की प्रक्रिया में कई कॉम्प्लीकेशन्स होती हैं, और अगर इस प्रक्रिया में जुड़वा प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) हो गई, तो इस प्रक्रिया में अपेक्षाकृत ज़्यादा ख़तरा होता है। इन ख़तरों में प्रेग्नेंसी के दौरान एबोर्शन, गर्भपात, समय से पहले प्रसव की संभावना शामिल होती है। इसलिए हमारा लक्ष्य कभी भी जुड़वां प्रेग्नेंसी कराने का नहीं होता है, क्योंकि इसमें बहुत कॉम्प्लीकेशन्स शामिल होते हैं। इसलिए दो भ्रूण डालने से ख़तरा ज़्यादा हो सकता है।"

डॉ. गौरी अग्रवाल (सीड्स ऑफ़ इन्नोसेंस & जेनेस्ट्रिंग लैब की फाउंडर और आईवीएफ एक्सपर्ट) ने कहा, "भारत में दो भ्रूण को ट्रांसफर करना ग़ैरकानूनी है। हालांकि हमेशा एक ही भ्रूण को ट्रांसफर करने की सलाह दी जाती है, ताकि एबोर्शन और मां व भ्रूण को होने वाली किसी भी परेशानी से बचा जा सके। जुड़वां प्रेग्नेंसी होने पर मां को ब्लीडिंग, एबोर्शन/मिसकैरेज या समय से पहले प्रसव होने की संभावना हो सकती है। जबकि भ्रूण में ट्विन टू ट्विन ट्रांसफ्यूजन सिंड्रोम (TTTS) देखने को मिल सकता है। हालांकि मां और भ्रूण मृत्यु दर से बचने के लिए एक से ज़्यादा भ्रूण को ट्रांसफर करने की सलाह दी जाती है। फिर भी आप सिंगल भ्रूण ट्रांसफर (एसईटी) का विकल्प चुनें। हालांकि, एसईटी के 10-15% केसेस में जुड़वां बच्चे हो सकते हैं क्योंकि इसमें एक ही भ्रूण विभाजित हो सकता है और वह जुड़वां हो सकता है। एक से ज़्यादा भ्रूण के ट्रांसफर से जुड़वां प्रेग्नेंसी होने की संभावना बढ़ जाती है।"

kumbh-mela-2021

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप