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Good Cholesterol and Dementia: क्या दिल का दोस्त बन सकता है दिमाग का दुश्मन, जानें क्या पाया गया स्टडी में

दिल के लिए फायदेमंद गुड कोलेस्ट्रॉल दिमाग के लिए नुकसानदेह हो सकता है। एक स्टडी मे पाया गया है कि गुड कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकती है। इस बारे में स्टडी करने के लिए 18668 प्रतिभागी इस स्टडी में शामिल हुए थे। जानें क्या है गुड कोलेस्ट्रॉल और डिमेंशिया के बीच रिश्ता और कैसे कर सकते हैं डिमेंशिया के खतरे को कम।

By Swati SharmaEdited By: Swati SharmaPublished: Sun, 03 Dec 2023 12:03 PM (IST)Updated: Sun, 03 Dec 2023 12:03 PM (IST)
गुड कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा बन सकती है डिमेंशिया की वजह

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। Good Cholesterol and Dementia: आमतौर पर लोग यहीं मानते हैं कि जितना अधिक गुड कोलेस्ट्रोल होगा, हमारा दिल भी उतना ही सेहतमंद रहेगा। लेकिन, हाल ही में आई स्टडी कुछ और ही बयां कर रही है। लांसेट रीजनल हेल्थ जर्नल में आई एक स्टडी में पाया गया कि गुड कोलेस्ट्रोल की अधिक मात्रा डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकती है। यह खबर लोगों के लिए काफी चौंकाने वाली है, क्योंकि गुड कोलेस्ट्रोल को दिल का दोस्त माना जाता है, वह दिमाग का दुश्मन कैसे हो सकता है। आइए जानते हैं इस क्या पाया गया इस रिसर्च में।

ऑस्ट्रेलिया के मोनाश यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च की गई, जिसमें 18,668 प्रतिभागियों को शामिल किया गाया और यह पाया गया कि जिन लोगों में लगभग 6 साल तक गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक रही है, उनमें डिमेंशिया का खतरा 27 प्रतिशत अधिक दिखा। 75 या उससे अधिक उम्र के लोगों में इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है। इनमें गुड कोलेस्ट्रॉल अधिक मात्रा में होने की वजह से, डिमेंशिया का खतरा 42 प्रतिशत ज्यादा देखने को मिला। स्टडी के शुरुआत में, किसी भी प्रतिभागी को कोई बीमारी नहीं थी और वे बिल्कुल स्वस्थ थे। ऐसे प्रतिभागी इसलिए चुने गए ताकि कोई अन्य फैक्टर डिमेंशिया और गुड कोलेस्ट्रॉल के बीच के रिश्ते को समझने में बाधा न बनें। हालांकि, ऐसा क्यों होता है इस बारे में और स्टडी करने की जरूरत है।

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इस रिसर्च यह समझा जा सकता है कि जरूरत से ज्यादा कुछ अच्छा नहीं होता, चाहे वह आपका गुड कोलेस्ट्रॉल ही क्यों न हो। गुड कोलेस्ट्रॉल की सही मात्रा स्त्रियों और पुरुषों में अलग-अलग होती है। स्त्रियों में इसकी सामान्य मात्रा 50-60mg/dL होता है और पुरुषों में 40-60 mg/dL होना चाहिए।

क्या है डिमेंशिया?

अलजाइमर सोसाइटी के मुताबिक, 'डिमेंशिया' शब्द लक्षणों के एक समूह का वर्णन करता है, जो समय के साथ याददाश्त, प्रॉब्लम- सॉल्विंग, भाषा और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इसके लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं-

  • याददाश्त कमजोर होना
  • अटेंशन कम होना या चीजें प्लान करने में तकलीफ होना
  • बात-चीत करने में परेशानी खासकर भाषा की वजह से
  • आस-पास क्या हो रहा है, यह समझने में तकलीफ होना
  • भावनाओं को काबू न कर पाना या मूड में जल्दी-जल्दी बदलाव आना
  • कुछ डिमेंशिया के मामलों में भ्रम होने की समस्या भी हो सकती है

कैसे कर सकते हैं बचाव?

  • ब्लड प्रेशर मैनेज करें। हाई ब्लड प्रेशर की वजह से डिमेंशिया का खतरा अधिक होता है।
  • एक्सरसाइज करें। इससे आपका वजन कंट्रोल रहेगा। अधिक वजन भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाता है। साथ ही, यह आपके दिल के लिए भी अच्छा होता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।
  • कोलेस्ट्रॉल लेवल मैनेज करें। कोलेस्ट्रॉल की सही मात्रा से स्ट्रोक और दिल की बीमारियां होने का जोखिम कम होता है, जो डिमेंशिया होने की संभावना को कम करता है। इसके साथ ही, ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल करें।
  • अगर आपको सुनने में तकलीफ होती है, तो तुरंत उसका इलाज कराएं। अलजाइमर सोसाइटी के अनुसार, सुनने में दिक्कत होने की वजह से डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है।
  • शराब और सिग्रेट से बिल्कुल दूर रहें। अधिक शराब पीने से या स्मोकिंग करने से डिमेंशिया आपको अपना शिकार बना सकता है।

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Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

Picture Courtesy: Freepik


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