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प्रेग्नेंसी में बढ़ा था BP, तो बाद में भी रहें सतर्क! भविष्य में 7 गुना ज्यादा रहता है डायबिटीज का खतरा

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:02 AM (IST)

गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताएं महिलाओं के भविष्य में गंभीर बीमारियों जैसे हृदय रोग, डायबिटीज और किडनी संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकती हैं।

गर्भावस्था की जटिलताएं बढ़ाती हैं रोगों का खतरा (Image Source: AI-Generated)

गर्भावस्था की जटिलताएं बढ़ाती हैं रोगों का खतरा (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. गर्भावस्था की जटिलताएं भविष्य में गंभीर बीमारियों का संकेत होती हैं

  2. गर्भावस्था में हाई बीपी, डायबिटीज से हृदय, किडनी रोगों का खतरा

  3. प्रसवोत्तर अवसाद भी बढ़ाता है हृदय, डायबिटीज, किडनी रोगों का जोखिम

प्रेट्र, नई दिल्ली। गर्भावस्था के दौरान होने वाली शारीरिक और मानसिक समस्याएं केवल प्रसव तक ही सीमित नहीं रहतीं, बल्कि ये महिलाओं के आने वाले जीवन में गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं। ब्रिटेन के एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी तरह की जटिलता का सामना करना पड़ता है, उनमें आगे चलकर दिल, किडनी और डायबिटीज से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल "बीएमजे मेडिसिन" में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था की जटिलताएं सीधे तौर पर बीमारी का कारण नहीं बनतीं, बल्कि ये महिला के शरीर में छिपे हुए अंदरूनी स्वास्थ्य जोखिमों के एक शुरुआती "संकेत" की तरह काम करती हैं।

किन जटिलताओं से क्या है खतरा?

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में मुख्य रूप से चार गंभीर स्थितियों-हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और क्रोनिक किडनी डिजीज-पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया।

  • ब्लड प्रेशर: गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी से पीड़ित महिलाओं में आगे चलकर सामान्य उच्च रक्तचाप का खतरा तीन गुना से अधिक और क्रानिक किडनी डिजीज का खतरा लगभग दो गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा दिल की बीमारियों और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ जाता है।
  • गर्भावस्था में शुगर: जिन महिलाओं को गर्भावस्था में डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें बाद के सालों में सामान्य टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने का खतरा 7 गुना तक बढ़ जाता है। साथ ही, इनमें हाई बीपी और दिल की बीमारियों की संभावना भी ज्यादा रहती है।
  • डिलिवरी के बाद डिप्रेशन: प्रसव के बाद होने वाले अवसाद को अक्सर केवल मानसिक स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अध्ययन से पता चला है कि यह चारों प्रमुख बीमारियों (हृदय रोग, डायबिटीज, बीपी और किडनी रोग) के जोखिम को 35 से 56 प्रतिशत तक बढ़ा देता है।
  • अन्य गर्भावस्था समस्याएं: समय से पहले डिलीवरी, गर्भपात, मृत शिशु का जन्म, गर्भाशय की दीवार से प्लेसेंटा का समय से पहले अलग होना और बच्चे का आकार बहुत छोटा या बड़ा होना भी भविष्य में कम से कम एक कार्डियो-मेटाबोलिक-रीनल स्थिति के खतरे से जुड़ा पाया गया।
  • 14 लाख से अधिक महिलाओं पर हुआ शोध: ब्रिटेन में पंजीकृत 14 लाख से अधिक महिलाओं के स्वास्थ्य और अस्पताल के आंकड़ों का अध्ययन किया जो गर्भवती हुई थीं।

डाक्टरों और गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ा संदेश ब्रिटेन के शोधकर्ताओं का कहना है कि हालांकि इन संबंधों के सटीक जैविक कारणों को समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है, लेकिन यह अध्ययन डाक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश तय करता है। अध्ययन में सिफारिश की गई है कि डाक्टरों को महिलाओं का इलाज करते समय उनकी पूरे प्रजनन इतिहास की जानकारी लेनी चाहिए।

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