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    Health News: त्वचा के रंग से जुड़ी बीमारियों का इलाज होगा आसान

    By Jagran NewsEdited By: Paras Pandey
    Updated: Mon, 14 Aug 2023 05:38 AM (IST)

    Health News इंसानों की त्वचा बाल और आंखों के रंग अलग-अलग होते हैं। इसके लिए मेलेनिन नामक जीन जिम्मेदार होता है जो प्रकाश अवशोषित करने वाला रंजक होता है। भारतीय मूल के विज्ञानी विवेक बाजपेई के नेतृत्व वाली शोधकर्ताओं की टीम ने ऐसे 135 नए मेलेनिन जीन्स की पहचान की है जो कि वर्णकता (पिग्मन्टेशन) से जुड़े रहते हैं।

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    नए जीन की खोज ने खोली नई राह।

    सैन फ्रांसिस्को,आइएएनएस। इंसानों की त्वचा बाल और आंखों के रंग अलग-अलग होते हैं। इसके लिए मेलेनिन नामक जीन जिम्मेदार होता है जो प्रकाश अवशोषित करने वाला रंजक होता है। भारतीय मूल के विज्ञानी विवेक बाजपेई के नेतृत्व वाली शोधकर्ताओं की टीम ने ऐसे 135 नए मेलेनिन जीन्स की पहचान की है, जो वर्णकता (पिग्मन्टेशन) से जुड़े हैं।

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि मेलेनिन के रेगुलेट होने की प्रक्रिया को समझने से लोगों को मेलानोमा या त्वचा कैंसर से बचाव करना आसान हो सकता है। इन मेलेनिन जीन को लक्षित कर मेलेनिन में सुधार लाने वाली दवा का भी विकास किया जा सकता है और वर्णकता से जुड़ी अन्य बीमारियों का भी इलाज की खोज हो सकती है। यह शोध ‘साइंस’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

    इसके मुताबिक, शरीर में मेलेनिन का उत्पादन मेलानोसोम नामक एक विशेष संरचना में होता है। मेलानोसोम मेलेनिन-उत्पादक वर्णक कोशिकाओं के अंदर पाए जाते हैं, जिन्हें मेलानोसाइट्स कहा जाता है। यद्यपि सभी इंसानों में मेलानोसाइट्स की संख्या लगभग एक समान होती है, लेकिन उनके द्वारा उत्पादित मेलेनिन की मात्रा अलग-अलग होती है, जिससे त्वचा के रंग में भिन्नता पाई जाती है।

    यूनिवर्सिटी आफ ओकलाहोमा में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा इस शोध के मुख्य लेखक विवेक बाजपेई के मुताबिक, मेलेनिन की मात्रा में भिन्नता के कारण समझने की कोशिश में उन्होंने सीआरआइपीआर-सीएएस9 तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक के इस्तेमाल से वे अरबों मेलानोसाइट्स से 20 हजार से ज्यादा जीन को अलग करके मेलेनिन उत्पादन पर उनके असर का अध्ययन किया।

    यह पहचानने के लिए कि कौन से जीन मेलेनिन उत्पादन को प्रभावित करते हैं, उन जीन हटाने की प्रक्रिया के दौरान मेलेनिन खोने वाली कोशिकाओं को लाखों अन्य कोशिकाओं से अलग करने की आवश्यकता होती है, जो अन्य कोशिकाएं नहीं करती थीं। इसके लिए बाजपेई की टीम ने इन-विट्रो सेल कल्चर के जरिये मेलानोसाइट्स उत्पादन की गतिविधियों और मात्रा का अध्ययन किया। 

    साइड-स्कैटर आफ फ्लो साइटोमेट्री की प्रक्रिया से कम या ज्यादा मेलेनिन उत्पादन करने वाली कोशिकाओं की पहचान हो सकी। इन कोशिकाओं का विश्लेषण मेलेनिन-माडिफाइंग जीन की पहचान के लिए किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि 169 प्रकार के जीन मेलेनिन उत्पादन को प्रभावित करते हैं। इनमें से 135 पहले से ज्ञात नहीं थे। 

    इसके अलावा केएलएफ तथा सीओएमएमडी नामक दो नए जीन के कामकाज की भी पहचान हुई। पाया गया कि डीएनए से जुड़ने वाला प्रोटीन केएलएफ इंसान और पशुओं में मेलेनिन के उत्पादन कम होने से जुड़ा है। इसके अलावा सीओएमएमडी3 प्रोटीन से रेगुलेट होने वाले मेलेनिन संश्लेषण को मेलानोसोम की अम्लता से भी नियंत्रित किया जा सकता है।