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सिर्फ मीठा और तेल बंद करना काफी नहीं! जानिए क्यों केवल डाइट से कंट्रोल नहीं होती टाइप-2 डायबिटीज

Published: Tue, 13 Oct 2026 03:46 PM (IST)

डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे लोगों को खानपान में सतर्कता की सलाह दी जाती है, जो आमतौर पर शुगर ...और पढ़ें

कैसे करें डायबिटीज मैनेज? (Picture Courtesy: Freepik)

कैसे करें डायबिटीज मैनेज? (Picture Courtesy: Freepik)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों ज्यादा प्यास लग रही है, ऊर्जा का स्तर कम हो रहा है, भूख ज्यादा लग रही है, सिर दर्द भी रहता है तो इस बात की आशंका रहती है कि आप भी इंसुलिन रेजिस्टेंस के शिकार हो रहे हों। 

जब इंसुलिन जांच में भी जब यह बात सामने आती है तो आपका सबसे पहला काम हो सकता है डाइट से शुगर को एकदम कम या खत्म कर देना। तेल की मात्रा को कम कर देना और तेल की गुणवत्ता को लेकर सतर्क होना। ध्यान रहे डायबिटीज मैनेजमेंट इतने तक ही सीमित नहीं है।

दरअसल, अस्त-व्यस्त दिनचर्या और निष्क्रिय जीवनशैली में डायबिटीज प्रबंधन एक कठिन चुनौती है। सही दिनचर्या जैसे, समय पर खानपान, शारीरिक सक्रियता के साथ आहार का संतुलन न हो तो यह इंसुलिन प्रतिरोध का बड़ा कारण बन जाता है और टाइप-2 डायबिटीज की आशंका बढ़ जाती है। 

सही समय पर निदान न हो, तो टाइप-2 डायबिटीज से जुड़ी जटिलताएं सामने आने लगती हैं और अन्य असाध्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। संतुलित आहार में सही मात्रा में स्वस्थ फैट, पर्याप्त प्रोटीन, कम रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शुगर के साथ फल व सब्जियां आपके आहार में शामिल होनी चाहिए। 

दरअसल, यह मेटाबॉलिक सेहत के लिए सही आधार तैयार कर सकता है। ऐसे में डायबिटीज से बचाव केवल शुगर या तेल बंद करना नहीं, बल्कि आहार व शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है।

संपूर्णता में समझें

यह समझना जरूरी है कि डायबिटीज केवल शुगर अधिक या कम लेने अथवा तेल से जुड़ा विषय ही नहीं है। यह शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करता है। यह धमनियों के संकरा होने से जुड़ा विषय भी है जो अतिरिक्त फैट के जमा होने के कारण होता है। 

ऐसे में अगर आप डायबिटीज में केवल शुगर के स्तर को महत्वपूर्ण मानते हैं तो यह धारणा बदल दें। शुगर का स्तर सही भी है, पर फैट नियंत्रण में नहीं रहता तो अलग परेशानी हो सकती है। अतिरिक्त वसा शरीर के उन भागों में जमा होने लगती हैं जहां नहीं होना चाहिए, जैसे- लिवर, हृदय, पैंक्रियाज आदि। ये फैट इन अंगों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने लगते हैं और डायबिटीज के कारण दूसरे अंग भी प्रभावित होने शुरू हो जाते हैं।

कैसा हो आहार संतुलन?

रोजमर्रा के खानपान में कार्ब की मात्रा बढ़ती जा रही है। यह थाली में या आपके रोजाना के खानपान में अमूमन अधिक रहता है। खासकर उन लोगों में जो डिब्बाबंद या बाहर के खानपान के आदी हो गए हैं। ये ज्यादातर रिफाइंड कार्ब जैसे, सफेद चावल, मैदे, सफेद ब्रेड, पास्ता, क्रैकर, पेस्ट्री आदि का सेवन अधिक कर रहे हैं। 

इन आहारों में एडेड शुगर की मात्रा भी अधिक होती है। इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च और इंडिया डायबिटीज के हालिया सर्वे की भी मानें तो ज्यादातर लोगों के खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा 60 प्रतिशत से अधिक पायी गई। इसमें वसा यानी फैट 25 प्रतिशत व इससे भी अधिक देखा गया। उनकी थाली में प्रोटीन की मात्रा 12 प्रतिशत तक थी, जो कि अपेक्षाकृत बहुत कम है। 

बता दें कि रिफाइंड कार्ब व एडेड शुगर से शरीर में सूजन का खतरा अपेक्षाकृत अधिक बढ़ जाता है। यही मेटाबोलिक विकार के जोखिम बढ़ाने में प्रमुख योगदान करता है। बता दें कि टाइप-2 डायबिटीज भी मेटाबोलिक विकार है।

डायबिटीज नियंत्रण का सही तरीका


डायबिटीज प्रबंधन के लिए जरूरी है कि आप शुगर और कोलेस्ट्रोल की जांच कराएं। डायबिटीज में एलडीएल 100 से नीचे रखने का प्रयास करें। डायबिटीज अप्रत्यक्ष रूप से आपके बीपी को भी बढ़ा सकता है। बीपी को नियंत्रण में रखें तो आप इससे उपजी जटिलताओं को रोक सकते हैं। आहार को ठीक करें, पर यह काफी नहीं है। इनके साथ कसरत व तनाव प्रबंधन करना भी न भूलें।

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डॉ. नवल के. विक्रम, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, एम्स दिल्ली

इन बातों का रखें ध्यान

  • भोजन में सिंपल कार्ब यानी ब्रेड, केक, मीठी चीजें जिनसे शरीर को तुरंत शुगर मिलता है, के बजाय जटिल कार्ब जैसे, ओटस, फाइबर युक्त चीजें शामिल करें।
  • फैटी लिवर है तो सजग हो जाएं। मोटापा इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाने वाला कारक है। इससे बचाव के लिए कैलोरी के प्रबंधन का ध्यान रखें।
  • दिनचर्या में समय प्रबंधन ऐसा रखें कि खानपान व नींद से कोई समझौता न हो।
  • यदि आप डाइट में बदलाव कर डायबिटीज प्रबंधन ठीक से ठीक नहीं कर पा रहे हैं तो चिकित्सक से परामर्श करें।।

जानने योग्य जरूरी बातें-

  • मोटापे से जूझ रहे हैं तो वजन कम करने वाली जीवनशैली अपनाएं जैसे आहार व शारीरिक सक्रियता।
  • वजन सामान्य है लेकिन मांसपेशियां कमजोर है तो भी टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बना रहता है। इसके लिए उचित आहार के साथ शारीरिक सक्रियता बनाए रखें।
  • आप यह सोच रहे हैं कि चीनी अधिक लेते हैं, इसलिए डायबिटीज हो सकता है तो इसकी जगह पर यह समझें कि समस्या केवल शुगर खाने से नहीं बल्कि वास्तविक समस्या शरीर की कोशिकाओं के द्वारा शुगर के सही प्रयोग नहीं करना  है।
  • यदि आप अधिक फैट ले रहे हैं तो इस बात का हमेशा ध्यान रहे कि स्वस्थ फैट लें पर इसकी मात्रा भी संतुलित रखें। यदि आहार में स्वस्थ फैट कम है तो शरीर में शुगर-फैट का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे इंसुलिन प्रतिरोध की आशंका अधिक बढ़ सकती है।
  • यह नहीं भूलना चाहिए कि डायबिटीज के मरीजों में फैटी लिवर का खतरा बना रहता है। इसलिए हमेशा प्रयास करें कि शुगर टेस्ट के साथ अपना लिपिड प्रोफाइल भी जांच कराते रहें।
  • आपके आहार में शुगर कम है, फैट कम है लेकिन प्रोटीन व फाइबर कम नहीं करें बल्कि इनकी मात्रा भी संतुलित रहे ताकि इंसुलिन प्रतिरोध की आशंका कम से कम हो। मांसपेशियां मजबूत बनी रहें।

कुकिंग आयल का प्रयोग

यदि आप बार-बार तेल को गर्म कर खासकर तलने में करते हैं तो यह तरीका सही नहीं है। इससे आक्सिडेशन कम हो सकता है व ऐसे कंपाउंड बन सकते हैं जो सेहत को नुकसान कर सकते हैं व टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकते हें।