Dengue Fever: बदलते मौसम की वजह से बढ़ रहा डेंगू का खतरा, इन टिप्स की मदद से बरतें सावधानी
देशभर में डेंगू का कहर बढ़ रहा है। बदलते मौसम के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में इस गंभीर बीमारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। डेंगू मच्छर से होने वाली एक बीमारी है जो किसी को भी अपनी चपेट में ले सकती है। सही समय पर इलाज न मिलने से यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। इससे बचने के लिए आप इन उपायों को अपना सकते हैं।

नई दिल्ली। Dengue Fever: आमतौर पर बारिश का मौसम खत्म होने के साथ डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। हालांकि, कुछ इलाकों में अभी भी बारिश हो रही है और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। पानी जमा होने, कूलर आदि की सफाई नहीं होने या घर के आसपास गंदा पानी एकत्रित होने से मच्छर पनपते हैं, जिससे मच्छरजनित बीमारियों का जोखिम बना रहता है।
इन दिनों तापमान में बदलाव आ चुका है, कभी बहुत गर्मी होती है, तो कभी अचानक से बारिश होने लगती है। जहां बारिश नहीं होती थी, वहां बारिश हो रही है, जहां होती थी, वहां नहीं हो रही है। जलवायु परिवर्तन का असर भारत के साथ दुनियाभर में देखा जा रहा है। जहां-जहां अभी बारिश हुई है, वहां डेंगू और अन्य तरह की बीमारियों का फैलना स्वाभाविक है। ध्यान रखें पानी और गंदगी न जमा होने पाए।
डेंगू के साथ अन्य समस्याएं भी
इस बार कुछ मरीजों में लिवर की समस्या भी देखी जा रही है। शुरुआत में ही पर्याप्त सतर्कता नहीं बरतने के कारण कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स में काफी कम हो जा रही है। डेंगू शॉक या हैमरेजिक समस्या अभी नहीं देखी जा रही है, हो सकता है कुछ स्थानों पर यह समस्या हो। इसमें बुखार, सिरदर्द या बदन दर्द की समस्या सामान्य से थोड़ी गंभीर होती है। लक्षण गंभीर भले हों, लेकिन बीमारी का सही और समुचित इलाज हो सकता है। डेंगू की गंभीरता के चलते जो मरीज पहले-दूसरे दिन ही भर्ती हो जाते हैं, उनका सही इलाज हो जाता है।
बचाव के उपाय
- आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो उसे सुखाकर रख दें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें। बचाव के लिए मच्छरदानी और रेप्लेंट का इस्तेमाल करें।
- पैरासिटामोल छोड़कर किसी अन्य दवाई का इस्तेमाल स्वयं से न करें।
- जो लोग निमूस्लाइड आदि का प्रयोग करते हैं, उन्हें बचना चाहिए। अपने आप स्पंजिंग करनी चाहिए।
- बुखार हो रहा है तो पैरासिटामोल से कम करें और पानी का भरपूर इस्तेमाल करें।
- अगर हार्ट या किडनी की समस्या नहीं है, तो तीन से चार लीटर पानी जरूर पिएं।
- रक्त में पानी की कमी होने से प्लेटलेट्स को ज्यादा नुकसान होता है। इससे ब्लडप्रेशर में कमी आ जा सकती है।
- यदि खून के धब्बे बन रहे हैं या ब्लीडिंग हो रही है, तो बीपी में तेज गिरावट आ रही है। अस्पताल में भर्ती हो जाएं।
- प्लेटलेट्स 50 हजार से कम हो गई है, तो भी अस्पताल में अवश्य भर्ती हो जाएं और डाक्टर की निगरानी में इलाज शुरू कर दें।
- स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण भोजन करें। यदि आप स्वस्थ भोजन का सेवन करेंगे और इम्युनिटी बेहतर रहेगी, जीवनशैली दुरुस्त रहेगी, तो जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे।
- तनाव से दूर रहें और अच्छी नींद लें।
(डॉ. सुरनजीत चटर्जी सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, इंद्रप्रस्थ अपोलो, नई दिल्ली से बातचीत पर आधारित)
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