First Chikungunya Vaccine: चिकनगुनिया वैक्सीन को लेकर गुड न्यूज, तीसरे फेज के ट्रायल में दिखे अच्छे नतीजे
First Chikungunya Vaccine चिकनगुनिया वैक्सीन को लेकर अच्छी खबर है। चिकनगुनिया की पहली वैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल काफी असरदार और सुरक्षित रहे। इस वैक्सीन को फ्रेंच बायोटेक कंपनी वेलनेवा बना रही है। कंपनी का कहना है कि ये वैक्सीन इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करेगी।

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। First Chikungunya Vaccine: मच्छरों से होने वाली खतरनाक बीमारियों में से एक है चिकनगुनिया। जिसके चलते हर साल कई लोगों की मौत हो जाती है, लेकिन अब शायद इन मौतों को रोका जा सकेगा क्योंकि जल्द ही चिकनगुनिया की वैक्सीन आ सकती है। वैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल सफल रहे हैं। ट्रायल में वैक्सीन को पूरी तरह से सुरक्षित बताया गया है। इस वैक्सीन को फ्रेंच बायोटेक कंपनी वेलनेवा बना रही है। यह वैक्सीन सिंगल डोज में होगी। कंपनी के फेज 3 के ट्रायल डेटा को मेडिकल जर्नल लैंसेट ने पब्लिश किया है। हाल में, CHIKV की वजह से होने वाली बीमारी को रोकने के लिए कोई वैक्सीन नहीं हैं। साथ ही इसके लिए प्रभावी एंटीवायरल इलाज भी नहीं है।
वैक्सीन कर सकती है वायरस को बेअसर
ये प्लेसीबो-कंट्रोल्ड फेज तीन ट्रायल वाला था। इन तीनों ट्रायल में ये देखा गया कि आखिर ये वैक्सीन वायरस को किस तरह से कमजोर करती है और इम्यून रिस्पान्स को कैसे स्ट्रॉन्ग करती है। द लांसेट जर्नल में पब्लिश स्टडी के अनुसार, 266 लोगों को इस रिसर्च में शामिल किया गया था। इसमें से 263 लोग यानी 99 प्रतिशत लोगों में वैक्सीन से एंटीबॉडी विकसित हुई, ये एंटीबॉडी वो हैं जो चिकनगुनिया वायरस को बेअसर कर सकती है।
हाल फिलहाल चिकनगुनिया वायरस के लिए कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। चिकनगुनिया से बुखार होता है और कभी-कभी जोड़ों में दर्द होता है। जो कभी-कभी बेहद खतरनाक हो सकता है। वलनेवा का कहना है कि VLA1553 पहली वैक्सीन है जिसे अमेरिका और कनाडा में अप्रूवल के लिए आवेदन करने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जांचा-परखा गया है।
इस स्टडी को अमेरिका में किया गया है। लैंसेट की रिपोर्ट कहा गया है कि वैक्सीन के ट्रायल की सफलता का भारत जैसे देशों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। ट्रायल रिजल्ट के अनुसार, एक सिंगल डोज के बाद, वैक्सीन ने चिकनगुनिया से बचाव के लिए 99% (263/266) प्रतिभागियों में न्यूट्रीलाइंजिंग एंटीबॉडी को प्रोड्यूस किया। स्टडी की प्रमुख लेखिका मार्टिना श्नाइडर ने कहा, 'रिजल्ट में वैक्सीनेशन के बाद एंटीबॉडी के लेवल की अच्छी निरंतरता दिखाई दी। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चिकनगुनिया का प्रकोप अचानक फिर से शुरू हो सकता है।'
Pic credit- freepik
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