नवरात्र में व्रत रख रहे हैं तो सिर्फ भूखे रहना काफी नहीं, साबूदाना-कुट्टू से लेकर फलों तक ऐसे रखें फलाहार का ध्यान
नवरात्र व्रत के दौरान सिर्फ भूखे रहने के बजाय पौष्टिक और संतुलित फलाहार का सेवन करें।

नवरात्र का मतलब खाने से परहेज करना नहीं (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र के दिनों में लोग कुछ लोग बिना कुछ खाए व्रत करते हैं तो वहीं कुछ नाम मात्र का भोजन करते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो दिनभर कुछ न कुछ खाते-पीते रहते हैं। व्रत के दौरान खाद्य सामग्री पौष्टिक होने के बजाय स्वास्थ्य पर विपरीत असर भी डाल सकती है। आइए नई दिल्ली के मैक्स हेल्थ केयर में चीफ डायबिटीज एजूकेटर, डॉ. शुभदा भनोट से जानते हैं, कैसा हो व्रत में आपका खानपान...
नवरात्र का मतलब खाने से परहेज करना नहीं
नवरात्र के व्रत सिर्फ भोजन से परहेज करने का नाम नहीं हैं। यह आस्था, अनुशासन और आत्म संयम भी है। अक्सर व्रत में रोजमर्रा के भोजन की जगह साबूदाना, आलू, कुट्टू की पूड़ी, पकौड़ी और मिठाइयों का सेवन लोग अधिक करते हैं, जिससे फलाहार अनजाने में हाइ कैलोरी, हाइ फैट और हाइ साल्ट वाली डाइट बन जाती है। इस नवरात्र थोड़ा अलग सोचें, व्रत करें, लेकिन पोषण का भी खयाल रखें। फलाहार करें, लेकिन वह संतुलित हो।
फलाहार की थाली में चार चीजों का संतुलन
प्रोटीन : दूध, दही, पनीर, मखाना और सीमित मात्रा में मूंगफली के दाने और सूखे मेवे।
फाइबर : खीरा, टमाटर, लौकी, कद्दू, पालक और अन्य हरी सब्जियां।
कार्बोहाइड्रेट : कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगीरा और सामा चावल।
स्वस्थ वसा : बादाम, अखरोट, चिया और अलसी के बीज व सीमित मात्रा में मूंगफली के दाने।
सेहत के अनुकूल हो फलाहार
यदि आपकी व्रत परंपरा में अनुमति है तो बाजरा, रागी, ज्वार या अन्य श्रीअन्न युक्त खाद्य पदार्थ को भोजन में शामिल कर सकते हैं। ये फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के अच्छे विकल्प हैं। श्रीअन्न भी कार्बोहाइड्रेट है, इसकी मात्रा अनियंत्रित नहीं होनी चाहिए, विशेषकर डायबिटीज या वजन कम करने वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
ध्यान रखें कि खाद्य सामग्री पर फलाहारी लिखा होना, उसके हेल्दी होने की गारंटी नहीं होता। साबूदाना वड़ा, कुट्टू की पूड़ी, आलू के चिप्स, पकौड़ी और बहुत ज्यादा घी में बने व्यंजन लोकप्रिय जरूर हैं, लेकिन इनमें कैलोरी और वसा की अधिकता होती है।
ऐसे में पूड़ी की जगह कम तेल में बना कुट्टू या सिंघाड़े का चीला, साबूदाना वड़ा की जगह कम तेल-घी वाली साबूदाना की खिचड़ी, आलू चिप्स की जगह भुने मखाने ले सकते हैं। अधिक आलू के सेवन के बजाय इसके साथ दही और अन्य सब्जियां खा सकते हैं। मिठाई खाने का मन है, तो मीठा फल ले सकते हैं। बिना चीनी का दही सेहत के लिए बहुत है।
फल या जूस में क्या है बेहतर
दिनभर थोड़ा-थोड़ा करके बहुत सारे फल खाने से कुल कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी काफी बढ़ सकती हैं। ऐसे में एक समय में एक फल लेना ही बेहतर रहता है। फलों में कम मीठा सेब, अमरूद, नाशपाती, पपीता और संतरा अच्छे विकल्प हो सकते हैं। अगर आप केला, चीकू, अंगूर और आम जैसे अधिक मीठे फल खा रहे हैं तो इन फलों की मात्रा विशेषकर डायबिटीज वाले और वजन कम करने वाले लोग नियंत्रित रखें।
इसके साथ ही फलों के संदर्भ में एक साधारण नियम का पालन अवश्य करें। फल खाइए, लेकिन जूस का सेवन करना ठीक नहीं है। कारण, पूरा फल फाइबर देता है साथ ही मन को और शरीर को ज्यादा संतुष्टि देता है।
पानी भी हो व्रत का हिस्सा
व्रत में कमजोरी, सिरदर्द या थकान का कारण सिर्फ कम खाना नहीं, बल्कि कम पानी पीना भी हो सकता है, इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में द्रव लेते रहें, जैसे बिना चीनी का नींबू पानी, ताजा छाछ और नारियल पानी। हालांकि, मीठे शरबत, डिब्बाबंद जूस और साफ्ट ड्रिंक्स को व्रत का पेय मानकर बिल्कुल न प्रयोग करें।
नमक पर रखें ध्यान
व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल आम बात है, यह भी सोडियम का ही स्रोत है। सेंधा नमक के सेवन में भी संयम बरतें। बाजार में मिलने व्रत के स्नैक्स, चिप्स, विभिन्न प्रकार के नमकीन, पापड़ आदि में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है, खासकर हाइ ब्लडप्रेशर वालों को तो अपने सोडियम इनटेक पर ध्यान देना चाहिए।
व्रत में कम नहीं, सही खाना जरूरी
पूरे दिन भूखे रहकर शाम को अधिक भोजन करना ठीक नहीं है। दिनभर छोटे और संतुलित मील्स लें। हर बार सिर्फ फल या सिर्फ आलू खाने के बजाय प्रोटीन और फाइबर का भी ध्यान रखें। फल+दही, मखाना+दूध, पनीर+सब्जियां, कुट्टू का चीला या रोटी+दही+सब्जी ले सकते हैं। इससे भूख और ऊर्जा को बनाए रखने में मदद मिलती है।
शुगर-बीपी में कैसे रखें सतर्कता
अगर शुगर या बीपी की समस्या है तो व्रत रखने का निर्णय दवाओं, ब्लड ग्लूकोज की स्थिति और अपने सेहत का ध्यान रखकर करें। अनियंत्रित मधुमेह, बार-बार हाइपोग्लाइसीमिया, गर्भावस्था, किडनी संबंधी समस्या है या पहले परेशानी हुई हो तो चिकित्सक से परामर्श करना अनिवार्य है। डॉक्टर ने व्रत रखने की अनुमति दी है तो ब्लड ग्लूकोज की नियमित मानिटरिंग करें।
इंसुलिन या दवाओं का डोज स्वत: न बदलें। लंबे समय तक खाली पेट न रहें। साबूदाना, आलू, शकरकंद, कुट्टू, सामा चावल, श्रीअन्न और फलों की मात्रा पर ध्यान दें। हर बार भोजन में दही, पनीर, मखाना जैसे प्रोटीन के स्रोत अवश्य शामिल करें।
विभिन्न प्रकार की मिठाई, शहद, गुड़, मीठे पेय और फलों के जूस से बचें। अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें। कंपकंपी, पसीना, चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति, उल्टी या अस्वस्थ महसूस होने पर व्रत रखना उचित नहीं है।
हाइ ब्लडप्रेशर में विशेष सतर्कता
व्रत वाली नमकीन से सावधान रखें। हाइ बीपी वालों के लिए व्रत का सबसे बड़ा ट्रैप अक्सर साल्ट और फ्राइड फूड्स का सम्मिश्रण होता है। नमक का सेवन सीमित रखें। चिप्स, नमकीन, पापड़ और पैकेट बंद व्रत के आहार कम लें। तले हुए भोजन की जगह स्टीम्ड, रोस्टेड या लाइट कुक्ड फूड्स चुनें।
पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें, जब तक डाक्टर ने इस मामले में सावधानी बरतने की सलाह अर्थात फ्लूइड रिसट्रिक्शन न दिया हो। बीपी की दवा नियमित लें और अपने आप बंद न करें। सीने में दर्द, सांस फूलने, बेहोशी, तेज चक्कर या बहुत तेज सिरदर्द हो तो व्रत जारी न रखें और तत्काल डाक्टर से मिलें।
सही फलाहार का बनाएं प्लान
सुबह के समय पानी, बिना चीनी की चाय/दूध, चार-पांच बादाम और एक-दो अखरोट भीगे हुए।
नाश्ते में दही के साथ कुट्टू/ सामक का हल्का चीला या पनीर के साथ कुट्टू/सिंघाड़े की रोटी। थोड़ी देर बाद कोई एक फल।
दोपहर में कुट्टू/राजगीरा की रोटी, पनीर/दही, हरी सब्जी, सलाद। शाम को भुने मखाना या थोड़े मेवे+बिना चीनी का पेय।
रात को हल्की सब्जी, दही/पनीर, सीमित मात्रा में सामक या कुट्टू से बने खाद्य पदार्थ।
इस नवरात्र करें एक छोटा सा बदलाव
व्रत में क्या नहीं खाना है, इसकी सूची बनाने के बजाय अपने शरीर को क्या अच्छा देना है, इसका ध्यान रखें। तली चीजें कम करें। प्रोटीन बढ़ाएं। हरी सब्जियां शामिल करें। फल सही मात्रा में लें। पानी पर्याप्त पिएं। नमक और चीनी पर नजर रखें और भोजन की मात्रा का ध्यान रखें। व्रत में भी आपकी थाली रंगीन, संतुलित और पौष्टिक हो सकती है। आस्था का सम्मान करें, पर अपने स्वास्थ्य की आवाज भी सुनें।
