आंखों को खूबसूरत दिखाने का ब्यूटी ट्रेंड कहीं बन न जाए अंधेपन की वजह! जानिए किन चीजों से है सबसे ज्यादा खतरा
आजकल 'परफेक्ट लुक' पाने के लिए फेक आईलैश, कलर्ड कॉन्टैक्ट लेंस और लैश-ग्रोथ सीरम जैसे ब्यूटी ट्रेंड्स काफी मशहूर हो ...और पढ़ें

फेक आईलैश से कलर्ड कॉन्टैक्ट लेंस तक, आंखों के लिए कितने खतरनाक हैं ये Beauty Trends? (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर बेहतरीन रील्स बनानी हों या ऑफिस की वीडियो मीटिंग में खास दिखना हो, आजकल हर किसी पर एकदम 'परफेक्ट' दिखने का खुमार है। आंखों को बड़ा और खूबसूरत दिखाने के लिए फेक आईलैश, रंग-बिरंगे लेंस और कई तरह के आई-सीरम का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है।
जी हां, हर हफ्ते क्लिनिक में ऐसे कई युवा मरीज आते हैं, जिनकी आंखों को इन फैशनेबल चीजों से गंभीर नुकसान पहुंचा होता है। आइए डिटेल में समझते हैं कि ये ट्रेंड्स आपकी आंखों के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं।
फेक आईलैश का बढ़ता शौक
लंबी पलकें आंखों को खूबसूरत जरूर बनाती हैं, लेकिन इन्हें चिपकाने के लिए जिस ग्लू का इस्तेमाल होता है, वह आंखों की संवेदनशील सतह के बेहद करीब होता है। इस केमिकल वाले गोंद से आंखों में एलर्जी, लाली, सूजन और इंफेक्शन हो सकता है। सबसे डराने वाली बात यह है कि नकली पलकों के भारीपन से असली पलकों की जड़ों पर इतना खिंचाव पड़ता है कि वे टूट सकती हैं और हमेशा के लिए झड़ सकती हैं।
सीरम के साइड इफेक्ट्स
पलकों को बढ़ाने का दावा करने वाले बिना जांचे-परखे सीरम भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। इनमें कुछ ऐसे तत्व मिले हो सकते हैं, जो पलकों के आसपास की त्वचा को काला कर देते हैं। इसके अलावा, इनसे आंखों में लगातार जलन और पानी बहने की समस्या भी हो सकती है।
बिना डॉक्टर से पूछे रंगीन लेंस खरीदना
सबसे ज्यादा खतरे वाली बात सस्ते कलर्ड लेंस का इस्तेमाल है। लोग अक्सर बिना किसी जांच के इंटरनेट या ब्यूटी पार्लर से इन्हें खरीद लेते हैं। लोगों को लगता है कि अगर लेंस 'बिना नंबर' के हैं, तो वे सुरक्षित हैं। हालांकि, सच यह है कि लेंस का आपकी आंख की बनावट के हिसाब से फिट होना बहुत जरूरी है।
अगर लेंस की क्वालिटी खराब है या वे सही से फिट नहीं बैठते, तो आंख की पुतली तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे आंखों में अल्सर हो सकता है। ये घाव कभी-कभी ऐसे निशान छोड़ जाते हैं जिससे हमेशा के लिए धुंधलापन आ जाता है। कुछ गंभीर मामलों में तो कॉर्निया बदलने तक की नौबत आ जाती है। इसके अलावा, दोस्तों के साथ लेंस शेयर करना, उन्हें नल के पानी से धोना या पहनकर सो जाना, इस खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
स्क्रीन और मेकअप की दोहरी मार
अगर आप कॉर्पोरेट जॉब में हैं, तो एसी की सूखी हवा, देर रात तक काम और लगातार स्क्रीन देखने की वजह से आपकी आंखें पहले ही सूखने लगती हैं। ऐसे में 10 से 12 घंटे तक कॉन्टैक्ट लेंस लगाए रखना और ऊपर से भारी आई-मेकअप करना, आंखों को बुरी तरह थका देता है।
कब हो जाएं अलर्ट?
अगर आपको अपनी आंखों में इनमें से कोई भी परेशानी महसूस हो, तो उसे बिल्कुल इग्नोर न करें:
- आंखों का लगातार लाल रहना
- दर्द होना या कुछ चुभना
- रोशनी से आंखों में तकलीफ होना
- आंखों से पानी या मवाद आना
- धुंधला दिखाई देना
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत अपने लेंस निकालें और बिना कोई देरी किए आंखों के डॉक्टर के पास जाएं।
आंखों को महफूज रखने के आसान टिप्स
- बिना आंखों की जांच और डॉक्टर की पर्ची के कॉन्टैक्ट लेंस न खरीदें।
- रात को सोने से पहले मेकअप पूरी तरह साफ करें और लेंस जरूर उतारें।
- बाजार का कोई भी नया आई-प्रोडक्ट सीधा इस्तेमाल करने से पहले स्किन पर थोड़ा सा लगाकर टेस्ट करें।
- गैजेट्स पर काम करते समय आंखों को आराम देने के लिए '20-20-20' का नियम फॉलो करें।
खूबसूरत दिखने में कोई बुराई नहीं है। फैशन और ट्रेंड तो बदलते रहेंगे, लेकिन हमारी आंखें दोबारा नहीं मिल सकतीं। एक बार आंखों की रोशनी चली गई, तो वह वापस लौटकर नहीं आती। इसलिए, अपनी अनमोल आंखों के साथ कोई भी समझौता न करें।
(डॉ. सौम्या शर्मा, नई दिल्ली स्थित डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं)
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