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    Sudarshan Kriya: तनाव की समस्या को दूर करने के लिए रोजाना करें सुदर्शन क्रिया, जानें करने का सही तरीका

    By Pravin KumarEdited By:
    Updated: Wed, 09 Nov 2022 01:00 PM (IST)

    Sudarshan Kriya योग एक्सपर्ट की मानें तो सुदर्शन क्रिया हिंदी के दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ सु यानी सही और दर्शन यानी देखना है। इस योग का अभिप्राय सही चीज़ देखना है। इस योग को करने से तनाव की समस्या दूर होती है।

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    Sudarshan Kriya: तनाव की समस्या को दूर करने के लिए रोजाना करें सुदर्शन क्रिया, जानें करने का सही तरीका

    दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Sudarshan Kriya: आधुनिक समय में लोग तनाव भरी जिंदगी जीने के आदी हो गए हैं। इस तनाव के कई वजह हैं। इनमें प्रमुख जॉब छूटना, कर्ज, किसी खास के जाने का गम आदि हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो तनाव एक मानसिक विकार है। यह खुद बड़ी बीमारी है, जिसका कोई इलाज नहीं है। इसके अलावा, तनाव लेने की वजह से कई अन्य बीमारियां दस्तक देती हैं। तनाव की वजह से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर से हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके लिए तनाव से दूर रहे हैं। विषम परिस्थिति में गुस्सा करने और निराश होने से समस्या का हल नहीं निकलता है। इसके लिए अंदर से मजबूत होना पड़ता है। साथ ही सही समय का इन्तजार करें। इसके अलावा, तनाव की समस्या को समस्या को दूर करने के लिए रोजाना सुदर्शन क्रिया जरूर करें। इस योग को करने से तनाव में बहुत जल्द आराम मिलता है। यह करने में भी बेहद आसान है। इस योग को करने के कई अन्य फायदे भी हैं। आइए, सुदर्शन क्रिया के बारे में सबकुछ जानते हैं-

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    सुदर्शन क्रिया

    योग एक्सपर्ट की मानें तो सुदर्शन क्रिया हिंदी के दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ सु यानी सही और दर्शन यानी देखना है। इस योग का अभिप्राय सही चीज़ देखना है। इस योग को करने से तनाव की समस्या दूर होती है। तनाव और अवसाद ग्रस्त लोगों को रोजाना सुदर्शन क्रिया करना चाहिए।

    सुदर्शन क्रिया कैसे करें

    -इसके लिए सबसे पहले भस्त्रिका प्राणायाम करें। इस दौरान तेज गति में सांस लें और छोड़ें। इस क्रिया को अपनी क्षमता अनुसार करना चाहिए।

    -इस क्रिया के बाद ध्यान मुद्रा में बैठकर अपने मन मस्तिष्क को नाक के अग्र भाग पर केंद्रित कर ॐ मंत्र का जाप करें। इस जाप को करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    -उज्जायी प्राणायाम के दौरान ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं और सांस लेते समय अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। इस क्रिया का उद्देश्य वायु पर नियंत्रण करना होता है।

    -अंत में क्रिया योग करें। इसमें भस्त्रिका प्राणायाम को दोहराएं।

    डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।