पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, सीने में दिखने वाले इन बदलावों को कभी न करें अनदेखा
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर दुर्लभ है, लेकिन इसके लक्षणों की अनदेखी और कम जागरूकता खतरनाक हो सकती है।

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर को समझें (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की बात तो की जाती है, लेकिन पुरुषों में इस कैंसर को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। हालांकि, पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर बहुत दुर्लभ है, जो करीब 1% लोगों को ही प्रभावित करता है, पर देरी से इसके लक्षणों की पहचान स्थिति को गंभीर कर सकती है। ऐसे में जरूरी है कि पुरुषों को इस जानलेवा बीमारी से जुड़ी जागरूकता भी हो।
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर को समझें
पुरुषों में निप्पल के नीचे ब्रेस्ट टिशू बहुत कम होते हैं। जान लेने वाली बात यह है कि ये टिशू महिलाओं के स्तनों की तरह विकसित नहीं होते, इसके बावजूद ये ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकते हैं। ज्यादातर पुरुषों में यह कैंसर दूध की नलिकाओं से शुरू होते हैं, जिन्हें मेडिकल भाषा में इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा कहा जाता है।
संकेतों की करें पहचान
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसके संकेतों की जल्दी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में पुरुष डॉक्टर के पास जाने से भी हिचकिचाते हैं। यहां ऐसे कुछ संकेत दिए गए हैं:
बिना दर्द वाली गांठ या ब्रेस्ट टिशू का मोटा होना, खासकर निप्पल के आसपास
निप्पल में बदलाव जैसे- उसका अंदर की तरफ होना, लालिमा या पपड़ी जमना
निप्पल से डिस्चार्ज, खासकर ब्लडी डिस्चार्ज
अन्डरआर्म्स में सूजन या गांठ बनना
त्वचा में बदलाव, जैसे- गड्ढे पड़ना या छाले होना
इस बात को भी समझें कि ये संकेत हमेशा कैंसर की तरफ इशारा नहीं करते, इसके लिए डॉक्टर से सलाह लिया जाना जरूरी है।
पुरुषों में किसे ज्यादा खतरा?
कई कारक हैं जो पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। इनमें बढ़ती उम्र, फैमिली हिस्ट्री, BRCA1 और BRCA2 जैसे जेनेटिक म्यूटेशन, पहले चेस्ट पर रेडिएशन का असर, हॉर्मोनल स्थितियां। इसके अलावा, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम और लिवर से जुड़ी बीमारियां, जिनसे हॉर्मोनल लेवल पर असर पड़ता है, पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाती हैं।
क्या है इसका इलाज?
इलाज के लिए डॉक्टर सबसे पहले क्लीनिकल जांच करते हैं और उसके बाद, इमेजिंग टेस्ट जैसे- मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड और कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं। वहीं, ट्रीटमेंट कैंसर की स्टेज पर निर्भर करता है, जिसमें सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, हॉर्मोन थेरेपी और टारगेटेड ट्रीटमेंट को शामिल किया जाता है।
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरूकता जरूरी
इस बात को ध्यान रखें कि पुरुषों में कैंसर दुर्लभ जरूर है, लेकिन यह कारण इसे अनदेखा करने की वजह नहीं बन सकता। पुरुषों को समझने की जरूरत है कि ब्रेस्ट की हेल्थ सिर्फ महिलाओं के चिंता का विषय नहीं है। इसके संकेतों की सही समय पर पहचान इसके इलाज में मददगार साबित हो सकता है।
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(डॉ. सौरभ गुप्ता, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर और यूनिट हेड हैं)
