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निमोनिया का बैक्टीरिया शरीर में कैसे फैलाता है अपना टॉक्सिन? वैज्ञानिकों ने खोजा छिपा हुआ सुराग

Published: Mon, 26 Oct 2026 10:30 AM (IST)

क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी हमारे शरीर को बचाने वाली प्रणाली ही अनजाने में बीमारी को बढ़ाने का काम ...और पढ़ें

निमोनिया का चौंकाने वाला सच (Image Source: AI-Generated)

निमोनिया का चौंकाने वाला सच (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. निमोनिया बैक्टीरिया का टॉक्सिन 'न्यूमोलाइसिन' कोशिकाओं में छेद करता है

  2. कोशिकाएं मरम्मत में 'वेसिकल्स' छोड़ती हैं, जो जहर फैलाते हैं

  3. राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी ने यह अहम खोज की

प्रेट्र, नई दिल्ली। हम सब यही मानते हैं कि हमारा शरीर बीमारियों से लड़ने और खुद को बचाने की पूरी कोशिश करता है। लेकिन, क्या हो अगर शरीर की यही कोशिश अनजाने में किसी खतरनाक बीमारी की मदद करने लगे? हाल ही में निमोनिया के मामले में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ही चौंकाने वाला सच खोज निकाला है।

एक से दूसरी कोशिका तक कैसे पहुंचता है टॉक्सिन?

'स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया' एक ऐसा बैक्टीरिया है जो निमोनिया समेत कई गंभीर संक्रमणों के लिए जिम्मेदार होता है। यह बैक्टीरिया शरीर के अंदर 'न्यूमोलाइसिन' नाम का एक बेहद घातक टॉक्सिन पैदा करता है। नए अध्ययन में उस खुफिया रास्ते का पता चल गया है, जिसके जरिए यह जहर शरीर की एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक आसानी से पहुंच जाता है।

कोशिकाओं में छेद करने वाला टॉक्सिन

'न्यूमोलाइसिन' कोई आम जहर नहीं है। यह हमारी कोशिकाओं में छेद करने में माहिर होता है। यह जहर कोशिकाओं की बाहरी परत में मौजूद कोलेस्ट्रॉल के साथ जुड़ जाता है और वहां खतरनाक सुराख बना देता है, जिससे कोशिकाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं।

खुद को बचाने के चक्कर में फैलती है बीमारी

जब इस जहर का हमला इतना तेज नहीं होता कि कोशिका तुरंत नष्ट हो जाए, तब कोशिका खुद की मरम्मत करने में जुट जाती है। वह अपनी झिल्ली के उस क्षतिग्रस्त और छेद वाले हिस्से को छोटे-छोटे पैकेटों के रूप में बाहर निकाल फेंकती है। इन छोटी-छोटी थैलियों को 'वेसिकल्स' कहा जाता है।

बीमारी को कैसे बढ़ा देते हैं 'वेसिकल्स'?

असल मुसीबत इन्हीं 'वेसिकल्स' से शुरू होती है। कोशिकाएं तो अपनी तरफ से खराब हिस्से को बाहर निकालकर खुद को बचा रही होती हैं, लेकिन इन छोड़े गए वेसिकल्स के अंदर वह 'न्यूमोलाइसिन' जहर पूरी तरह सक्रिय रहता है। नतीजतन, ये थैलियां अनजाने में इस जहर को आस-पास की अन्य स्वस्थ कोशिकाओं तक ले जाती हैं और बीमारी को बढ़ा देती हैं।

इस अहम प्रक्रिया का पता 'राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी' के विज्ञानियों ने लगाया है। उनका यह महत्वपूर्ण शोध जाने-माने 'जर्नल ऑफ एक्स्ट्रासेल्युलर वेसिकल्स' में प्रकाशित हुआ है।

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