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किसी को H1N1 में हल्के लक्षण तो कोई पहुंच जाता है ICU; आखिर क्यों होता है ऐसा?

Published: Sat, 29 Aug 2026 02:36 PM (IST)

दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। यह वायरस कुछ लोगों को हल्के तो कुछ को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

स्वाइन फ्लू से रहें सावधान (Picture Courtesy: Freepik)

स्वाइन फ्लू से रहें सावधान (Picture Courtesy: Freepik)

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संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में इस इन्फेक्शन से बचाव करना काफी जरूरी है। हालांकि, इस वायरस के साथ एक दिलचस्प चीज देखने को मिल रही है। कुछ लोगों में ये इन्फेक्शन इतना हल्का होता है कि वे घर पर देखभाल से ठीक हो जाते हैं, वहीं कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाने की नौबत तक आ जाती है। 

एक ही वायरस के इन्फेक्शन का इतना अलग-अलग प्रभाव क्यों देखने को मिलता है? कैसे एक ही वायरस किसी के लिए मामूली सर्दी-जुकाम, तो किसी के लिए जानलेवा कैसे साबित हो सकता है? आइए जानें इन्हीं सवालों के जवाब। 

शरीर का अंदरूनी हाल

किसी व्यक्ति पर H1N1 वायरस कितना असर करेगा, ये उसकी अंदरूनी सेहत पर निर्भर करता है। जो लोग उम्रदराज हैं, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं या पहले से सांस से जुड़ी कोई बीमारी या डायबिटीज जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनका शरीर इस वायरस से आसानी से नहीं लड़ पाता। 

फेफड़ों में गंभीर इन्फेक्शन

आमतौर पर हल्का फ्लू सिर्फ नाक और गले तक ही सीमित रहता है, लेकिन H1N1 वायरस फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकता है। जब यह वायरस फेफड़ों में गहराई तक पुहंच जाता है, तो इम्यून सिस्टम ज्यादा रिएक्टिव हो जाता है, जिसे साइटोकाइन स्टॉर्म कहा जाता है। इस स्थिति में फेफड़ों की थैलियों में पानी भर जाता है, जिससे निमोनिया होता है और खून में ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है। 

बैक्टीरिया का हमला

H1N1 वायरस के अटैक के कारण शरीर पहले से ही कमजोर हो चुका होता है। ऐसे में स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया जैसे बैक्टीरिया भी शरीर पर हमला कर देते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। 

इलाज में देरी पड़ सकती है भारी

इस इन्फेक्शन में सबसे बड़ी भूल है समय पर डॉक्टर से सलाह न लेना। स्वाइन फ्लू की दवाएं लक्षण दिखने के दो दिनों के अंदर ली जाए, तो वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। लेकिन अगर इलाज में देरी हो जाए, तो फेफड़ों को हुए नुकसान को ठीक करना मुश्किल हो जाता है। अगर सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, चक्कर या कन्फ्यूजन, कमजोरी, होंठ और चेहरे का नीला पड़ना, लगातार उल्टी या पेशाब कम आने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।  

स्वस्थ लोग भी रहें सावधान

H1N1 स्वस्थ लोगों में भी गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए सावधानी जरूरी है। इससे बचने के लिए वैक्सीन लेना सबसे असरदार तरीका है। लक्षण नजर आते ही इलाज करवाना इन्फेक्शन को गंभीर रूप लेने से रोकता है।