H1N1, कोविड या टाइफाइड? एक जैसे हैं तीनों के शुरुआती लक्षण, जानिए कब करवाना चाहिए कौन-सा टेस्ट
बदलते मौसम में H1N1, कोविड-19 और टाइफाइड के शुरुआती लक्षण समान होने से इनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

मौसम बदलते ही H1N1, कोविड और टाइफाइड का 'ट्रिपल अटैक' (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल मौसम बदलते ही हर घर में कोई न कोई बीमार पड़ रहा है। किसी को बुखार है, तो किसी को बदन दर्द या खांसी। सबसे बड़ी उलझन यह है कि इन दिनों H1N1, कोविड-19 और टाइफाइड, तीनों के मामले एक साथ देखने को मिल रहे हैं।
ऐसे में मरीज के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर उसे कौन-सा इन्फेक्शन हुआ है। इस बारे में डिटेल में जानने के लिए हमने कैलाश दीपक अस्पताल की कंसल्टेंट फिजिशियन, डॉ. मानसी निगम से बातचीत की है।
शुरुआती 2-3 दिनों में क्यों एक जैसे लगते हैं लक्षण?
डॉ. मानसी बताती हैं कि जब H1N1, कोविड-19 और टाइफाइड एक ही समय पर फैल रहे हों, तो शुरुआती दिनों में मरीजों का कन्फ्यूज होना बेहद आम है। इन तीनों ही इन्फेक्शन की शुरुआत तेज बुखार, सिरदर्द, थकान और बदन दर्द जैसे लक्षणों से होती है।
H1N1 और कोविड-19 में खांसी, गले में खराश जैसी सांस से जुड़ी तकलीफें भी हो सकती हैं, जबकि टाइफाइड की शुरुआत केवल बुखार और कुछ सामान्य लक्षणों से होती है। इसलिए, सिर्फ लक्षणों को देखकर शुरुआती दिनों में इन बीमारियों के बीच फर्क करना मुश्किल है। इसके लिए डॉक्टर द्वारा मरीज की मेडिकल हिस्ट्री समझना और सही जांच कराना जरूरी है।
क्या कोई ऐसा लक्षण है जो सीधे बीमारी बता सके?
मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या कोई ऐसा खास लक्षण है जिससे पता चल जाए कि यह H1N1 या कोविड जैसा वायरल इन्फेक्शन है या टाइफाइड जैसा बैक्टीरियल इन्फेक्शन? इसका जवाब है- नहीं। दरअसल, शुरुआती स्टेज में ऐसा कोई अकेला लक्षण नहीं है जो इन बीमारियों को अलग कर सके। इसलिए मरीजों को खुद से अपनी बीमारी का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।
कब करवाएं कौन-सा टेस्ट?
तेज बुखार और बदन दर्द होने पर कौन-सा टेस्ट कराना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि डॉक्टर को किस बीमारी का शक है और लक्षण कितने दिन पुराने हैं:
- H1N1 या कोविड: इसके लिए RT PCR जैसे मॉलिक्यूलर टेस्ट किए जाते हैं। इसके लिए रेस्पिरेटरी सैंपल बीमारी की शुरुआत में ही ले लिया जाना चाहिए।
- टाइफाइड: टाइफाइड की पक्की पहचान के लिए जांच का तरीका अलग है। इसके लिए 'ब्लड कल्चर' सबसे अहम तरीका माना जाता है।
हर मरीज के लिए कोई एक फिक्स टेस्ट या फिक्स दिन नहीं होता। यह फैसला इलाज कर रहे डॉक्टर पर छोड़ देना चाहिए।
Widal टेस्ट को लेकर गलतफहमी
अक्सर लोग टाइफाइड के शक में पहले या दूसरे दिन ही विडाल टेस्ट करा लेते हैं और उसे बीमारी का पक्का सबूत मान लेते हैं, लेकिन अगर यह टेस्ट पॉजिटिव आ भी जाए, तो यह टाइफाइड होने का 100% प्रमाण नहीं है। बिना क्लिनिकल हिस्ट्री के ये टेस्ट भ्रामक हो सकते हैं। इसलिए, सिर्फ विडाल रिपोर्ट के पॉजिटिव आने पर तुरंत एंटीबायोटिक दवाइयां शुरू नहीं करनी चाहिए।
क्या महंगे 'मल्टीप्लेक्स पैनल' टेस्ट कराना जरूरी है?
बुखार या फ्लू वाले हर मरीज को महंगे 'रेस्पिरेटरी मल्टीप्लेक्स पैनल' टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। ये टेस्ट एक साथ कई बीमारियों की पहचान कर सकते हैं, लेकिन इनकी जरूरत केवल कुछ खास स्थितियों में ही पड़ती है। महज इसलिए कि कई बीमारियां फैल रही हैं, हर मरीज को यह टेस्ट कराने की सलाह नहीं दी जाती।
खुद से एंटीबायोटिक खाना कितना खतरनाक?
बुखार आते ही कई लोग बिना डॉक्टरी सलाह के एजिथ्रोमाइसिन या एमोक्सिसिलिन जैसी एंटीबायोटिक्स खाने लगते हैं। यह एक बहुत बड़ी गलती है। बुखार का मतलब हमेशा बैक्टीरियल इन्फेक्शन नहीं होता। H1N1 या कोविड जैसी वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक्स बिल्कुल असर नहीं करतीं। इन्हें बिना वजह खाने से साइड इफेक्ट्स होते हैं और शरीर में 'एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस' का खतरा बढ़ जाता है। एंटीबायोटिक तभी खानी चाहिए जब डॉक्टर इसकी सलाह दें।
H1N1 में दवा का सही समय क्या है?
अगर डॉक्टर को H1N1 का शक है, तो ओसेल्टामिविर या टैमीफ्लू जैसी एंटीवायरल दवाएं लक्षण दिखने के शुरुआती 48 घंटों के भीतर शुरू कर देनी चाहिए। इस दौरान ये सबसे अच्छा काम करती हैं। हालांकि, गंभीर रूप से बीमार या हाई-रिस्क वाले मरीजों में 48 घंटे बीत जाने के बाद भी यह दवा फायदेमंद होती है, इसलिए डॉक्टर के पास जाने में देरी न करें।
कब तुरंत भागना चाहिए अस्पताल?
बुखार या रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर देना चाहिए कि मरीज की हालत सुधर रही है या बिगड़ रही है। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना तुरंत डॉक्टर के पास जाएं:
- सांस लेने में तकलीफ होना या सांस फूलना
- सीने में दर्द
- भ्रम की स्थिति या बेहोशी
- बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना
- खांसी का लगातार बढ़ना या बुखार का कम न होना
- निमोनिया या किसी अन्य इन्फेक्शन से बचने के लिए इन लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हाई-रिस्क वाले लोग क्या सावधानी बरतें?
बुजुर्गों, छोटे बच्चों, और डायबिटीज या अस्थमा के मरीजों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। ऐसे लोगों में इन्फेक्शन जल्दी गंभीर रूप ले सकता है। लक्षण दिखने पर इन मरीजों की कड़ी निगरानी होनी चाहिए और बुखार या खांसी बढ़ने पर तुरंत मेडिकल सलाह लेनी चाहिए।
घबराएं नहीं, बस सही कदम उठाएं
मौसमी बुखार के दौरान डॉ. मानसी का सबसे जरूरी मैसेज यही है कि पैनिक न करें, लेकिन खुद डॉक्टर भी न बनें। बुखार का मतलब हमेशा H1N1, कोविड या टाइफाइड नहीं होता। अपनी मर्जी से दवाएं न खाएं। लक्षणों और रिस्क फैक्टर को समझें और जरूरत पड़ने पर सही समय पर डॉक्टर से मिलें।
