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H1N1 से घबराने की जरूरत नहीं, ICMR के डॉक्टर बोले- यह मौसमी फ्लू है कोई नया वेरिएंट नहीं

Published: Tue, 25 Aug 2026 11:42 PM (IST)

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि भारत में एच1एन1 संक्रमण के मामलों में ...और पढ़ें

एच1एन1 मामलों में वृद्धि मौसमी इन्फ्लुएंजा का सामान्य हिस्सा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने मंगलवार को बताया कि भारत में एच1एन1 संक्रमण के मामलों में वृद्धि मौसमी इन्फ्लुएंजा के सामान्य चलन का हिस्सा है और वायरस के किसी नए स्वरूप की पहचान नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अधिकांश मामले गंभीर नहीं हैं और मरीज बिना विशेष उपचार के ठीक हो जाते हैं।

डॉ. बहल ने बताया कि वर्तमान में फैल रहा वायरस इन्फ्लुएंजा ए (एच1एन1) पीडीएम09 का वही जाना-पहचाना स्वरूप है जो 2009 की महामारी के समय से मौजूद है।

उन्होंने कहा कि एच1एन1 अब मौसमी फ्लू का रूप ले चुका है और इसके अधिकतर संक्रमण गंभीर नहीं होते। उन्होंने स्पष्ट किया कि खांसी-जुकाम के लक्षण अक्सर इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होते हैं।

एच1एन1 को पहले 'स्वाइन फ्लू' कहा जाता था, लेकिन अब यह हर साल फैलने वाला मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस बन चुका है। डा. बहल ने कहा कि इन्फ्लुएंजा वायरस समय के साथ अपने स्वरूप में बदलाव करते रहते हैं, जो उनकी सामान्य प्रवृत्ति है।

उन्होंने बताया कि आइसीएमआर के आंकड़ों के अनुसार, खांसी-जुकाम के लक्षण वाले लोगों में एच1एन1 सबसे अधिक पाया जाने वाला श्वसन संक्रमण है।

बहल ने फ्लू, खांसी, जुकाम या बुखार से पीड़ित लोगों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने, पौष्टिक भोजन करने और पर्याप्त आराम करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को दूसरों के निकट संपर्क में आने से बचना चाहिए, खांसते या छींकते समय मुंह एवं नाक को ढकना चाहिए, बार-बार हाथ धोने चाहिए और बीमार लोगों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

बहल ने कहा कि सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)