रोज खाते हैं जो नमक, क्या उससे मिल रहा है आयोडीन; सफेद, गुलाबी या सेंधा नमक, सेहत के लिए कौन है ज्यादा सही?
यह लेख विभिन्न प्रकार के नमक - सफेद, गुलाबी हिमालयन और सेंधा नमक - में आयोडीन की मात्रा की तुलना ...और पढ़ें

आयोडीन के लिए कौन सा नमक बेहतर: सफेद, गुलाबी या सेंधा नमक? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
आयोडीन थायरॉइड ग्लैंड के लिए बेहद जरूरी है
सादा सफेद आयोडाइज्ड नमक आयोडीन का सस्ता सोर्स है
गुलाबी और सेंधा नमक में नेचुरल आयोडीन नहीं है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारे खाने में कई ऐसी चीजें इस्तेमाल होती हैं, जो न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि सेहत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। नमक इन्हीं में से एक है, जिसके बिना खाने की कल्पना तक करना मुश्किल है। खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ यह शरीर में आयोडीन की कमी को भी पूरा करता है।
पहले जहां लोग खाने में सिर्फ आयोडीन युक्त सफेद नमक ही खाते थे, तो वहीं अब 'हेल्थ कॉन्शियस' लोग गुलाबी हिमालयन नमक और व्रत वाला सेंधा नमक भी अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। लोग इन्हें नेचुरल होने की वजह से काफी पसंद कर रहे हैं, लेकिन क्या ये नए ऑप्शन में वाकई साधारण नमक से बेहतर हैं? इन नमक को डाइट में शामिल करने पर क्या आपके शरीर को उतना ही आयोडीन मिल रहा है, जितनी उसे जरूरत है? आइए जानते हैं आसान भाषा में समझते हैं तीनों नमक के बारे में विस्तार से-
क्यों जरूरी है आयोडीन?
नमक के बारे में जानने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर आयोडीन क्या है और क्यों यह हमारे लिए जरूरी है। आयोडीन हमारे गले में मौजूद थायरॉइड ग्लैंड (Thyroid gland) के लिए ईंधन का काम करता है। क्योंकि हमारा शरीर खुद आयोडीन नहीं बना सकता, इसलिए हमें इसे अपने खाने से ही लेना पड़ता है।
थायरॉइड ग्लैंड ऐसे हार्मोन बनाती है, जो हमारे शरीर के तापमान, मेटाबॉलिज्म और बच्चों के दिमागी विकास को कंट्रोल करते हैं। अगर शरीर में आयोडीन की कमी हो जाए, तो थायरॉइड की बीमारी, गले में सूजन यानी घेंघा और बच्चों के विकास में रुकावट जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इन्हीं समस्याओं से बचने के लिए भारत समेत कई देशों में नमक में आयोडीन मिलाना शुरू किया गया।
सादा टेबल सॉल्ट
बाजार में मिलने वाला साधारण सफेद नमक आयोडीन का सबसे सुरक्षित और सस्ता स्रोत है। इसे बनाते समय इसमें सही मात्रा में आयोडीन मिलाया जाता है, जो आपकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर देता है। इसलिए, अगली बार नमक खरीदते समय यह जरूर ध्यान रखें कि उसके पैकेट पर "आयोडीन युक्त" यानी आयोडाइज्ड (Iodised) लिखा हो।
पिंक हिमालयन सॉल्ट
इन दिनों गुलाबी नमक यानी पिंक सॉल्ट का बड़ा ट्रेंड है। कई लोग इसे शुद्ध और ज्यादा हेल्दी मानते हैं, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है। इसका गुलाबी रंग इसमें मौजूद कुछ मिनरल्स के कारण होता है, न कि आयोडीन के कारण। जब तक इसके पैकेट पर 'आयोडाइज्ड' न लिखा हो, तब तक यह आपके थायरॉइड के लिए किसी काम का नहीं है। साथ ही सोडियम, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, इसमें भी उतना ही होता है जितना कि सादे नमक में।
सेंधा नमक
कई लोग व्रत में इस्तेमाल होने वाले सेंधा नमक को ही अपनी डाइट का हिस्सा बना लेते हैं, क्योंकि यह सीधा चट्टानों से आता है और इसे प्रोसेस नहीं किया जाता। लेकिन सीधा खदानों से आने की वजह से इस नमक में नेचुरली आयोडीन नहीं होता और इसलिए अगर आप रोजाना इसे खाते हैं, तो धीरे-धीरे आपके शरीर में आयोडीन की कमी हो सकती है।
सही संतुलन कैसे बनाएं?
डॉक्टर्स और WHO की सलाह है कि एक दिन में 5 ग्राम (करीब एक छोटे चम्मच) से ज्यादा नमक न खाएं। अपने थायरॉइड को हेल्दी रखने के लिए हमेशा 'आयोडीन युक्त' नमक का ही इस्तेमाल करें, फिर चाहे वह सफेद हो, गुलाबी या सेंधा। इसके अलावा, दूध, दही, अंडे और सीफूड भी आयोडीन के अच्छे स्रोत हैं।
