‘कुट्टू’ आटा होकर भी नहीं आता अनाज की गिनती में, फिर नवरात्र के व्रत में कैसे बना खाने का अहम हिस्सा?
नवरात्र व्रत में कुट्टू का आटा ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है, लेकिन यह अनाज नहीं बल्कि एक फूल वाले पौधे का बीज है।

पोषक तत्वों का खजाना है कुट्टू (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र शुरू होते ही 9 दिनों तक कुट्टू के आटे की बाजार में मांग बढ़ जाती है, उपवास के दिनों में इसी से बने पकवान ऊर्जा का सबसे बड़ा स्त्रोत है। पर आपने कभी सोचा है कि कुट्टू का आटा कहां से आया और व्रत में इसे ही क्यों शामिल किया जाता है? क्यों ये आटा होने के बावजूद अन्न में शामिल नहीं होता? आइए आपको बताते हैं कुट्टू के आटे की कहानी।
कहां से आया कुट्टू का आटा?
कुट्टू और अंग्रेजी में Buckwheat कहलाने वाला यह आटा आज से करीब 4000 साल पुराना है। ऐसा माना जाता है कि कुट्टू की उत्पत्ति सबसे पहले दक्षिण-पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत, फिर उसके बाद पश्चिम में तिब्बत और हिमालयी क्षेत्रों में हुई थी। चीन में तो कुट्टू के 6000 साल पहले होने के सबूत पाए गए हैं। इसके बाद यह चीन से होते हुए जापान तक भी पहुंचा। वहीं, पश्चिमी छोर से इसने अपना रास्ता भारत के हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर तक बनाया।
इसके बावजूद यूरोप में 16 वीं सदी तक कुट्टू खानपान में शामिल नहीं था, जबकि अमेरिका में इसकी एंट्री यूरोपीय उपनिवेशवादियों के साथ ही हुई थी। यहां जान लेने वाली बात यह है कि पहले इसका आटा बनाने के साथ-साथ पशुओं के चारे के लिए भी किया जाता था।
इसे अन्न में क्यों नहीं गिना जाता?
कुट्टू बीजों से बनने वाला आटा है, इसका गेहूं या धान जैसे अनाज से कोई संबंध नहीं होता। कुट्टू 'फेगोपाइरम एस्कुलेंटम' नामक एक फूल वाले पौधे में उगाया जाता है। इसे ‘स्यूडोसीरियल’ यानी आभासी अनाज भी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अनाज जैसा दिखता जरूर है, पर एक पौधे से निकला बीज है। इस पौधे की पैदावार ज्यादातर ठंडे और पर्वतीय इलाकों में अच्छी होती है।
पोषक तत्वों का खजाना है कुट्टू
नवरात्र में कुट्टू को शामिल की एक वजह तो हम जानते हैं कि यह अनाज नहीं है। वहीं दूसरी वजह है कि कुट्टू से बना आटा सेहत के लिए बड़ा फायदेमंद है:
कुट्टू में व्हीट जरूर आता है लेकिन यह ग्लूटेन-फ्री होता है। ग्लूटेन एलर्जी वाले लोगों के लिए अनाज का बेहतरीन विकल्प है।
इसके आटे में फॉसफोरस, मैग्नीशियम,फॉलेट, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, जिंक, कॉपर और मैग्नीज जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो व्रत के समय शरीर की जरूरत पूरी करते हैं।
इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट नामक रूटीन भी पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल और बीपी कंट्रोल में मददगार है।
कुट्टू प्रोटीन का पॉवरहाउस है क्योंकि इसमें शरीर की जरूरत वाले पूरे 9 एमीनो एसिड्स पाए जाते हैं।
